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नेहरू ने क्यों दो बार कम की थी अपनी और मंत्रियों की सैलरी

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 11:37 AM IST
नेहरू ने क्यों दो बार कम की थी अपनी और मंत्रियों की सैलरी
प्रधानमंत्री के रूप में क्या था नेहरू का वेतन

हम नेहरू जी से जुड़ी विशेष शृंखला चला रहे हैं. पेश है इसकी आखिरी कड़ी. ऐसा दुष्प्रचार है कि नेहरू शाहखर्ची करने वाले और विलासितापूर्ण जीवन जीने वाले शख्स थे. लेकिन क्या वाकई ऐसा था. आखिर क्या बात थी कि उन्होंने कम वेतन लेना स्वीकार किया और फिर इसमें दो बार वेतन में कटौती भी की

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  • Last Updated: November 15, 2019, 11:37 AM IST
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जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री (First Prime minister of Independent India) थे. एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी तनख्वाह (Salary Of Nehru) हमेशा कौतुहल का विषय रही है. इसे लेकर तमाम बातें कही जाती रही हैं. जब उन्होंने करीब खुद ही अपनी सैलरी तय की तो उनका साथी हैरान रह गए. प्नधानमंत्री के तौर पर उनके दिल्ली स्थित तीन मूर्ति आवास (Teen Murti Bhavan) में शिफ्ट होने की भी अलग कहानी है.

1947 से लेकर 1964 तक जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री रहे. एमओ मथाई (MO Mathai) ने करीब 20 बरसों तक उनके साथ निजी सचिव के रूप में काम किया था. नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद मथाई काफी ताकतवर शख्सियत समझे जाते थे. उन्होंने नेहरू को लेकर "रेमिनिसेंसेज ऑफ नेहरू एज" (Reminiscences of the Nehru Age) एक किताब लिखी. जिसमें नेहरू के बारे में बहुत सी ऐसी बातें सामने आईं, जो आमतौर पर एक निजी सचिव को ही मालूम हो सकती हैं.

इस किताब में कई जगह मथाई ने नेहरू की तीव्र आलोचना की तो कई जगह तारीफ. कई जगह उन्होंने तटस्थ होते हुए वो बातें लिखीं, जो नेहरू के साथ रहते हुए उनकी जीवनशैली, दृष्टिकोण और लोगों से आपसी व्यावहार में देखीं.

जब नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने तो बड़ा मुद्दा ये था कि उनकी सैलरी क्या होगी. इस बारे में नेहरू ने कभी कोई पहल खुद से नहीं की. हालांकि उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों को लगता था कि जिस तरह ब्रिटेन का प्रधानमंत्री अपने कैबिनेट मंत्रियों की तुलना में दोगुना वेतन और अन्य सुविधाएं पाता है, वैसा ही भारत में भी होना चाहिए.

नेहरू ने मंत्री के बराबर तनख्वाह ली
तब देश में कैबिनेट मंत्रियों की सैलरी 3000 रुपए प्रति माह तय की गई. जब नेहरू कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य एन गोपालस्वामी आयंगर ने संसद में पीएम के वेतन को दोगुना करने का सुझाव दिया तो इसका एक ही शख्स ने विरोध किया, वो खुद नेहरू थे, जिन्हें ये कतई मंजूर नहीं था. आखिरकार नेहरू ने सैलरी के रूप में 3000 रुपए लेना स्वीकार किया, जितना वेतन एक कैबिनेट मंत्री का था.

इसके बाद नेहरू से कहा गया कि उन्हें कम से कम 500 रुपए का टैक्स फ्री एंटरटेनमेंट अलाउंस तो मिलना चाहिए. जिस तरह ब्रिटेन में प्रधानमंत्री को मिलता है, नेहरू ने साफतौर पर इसे भी ठुकरा दिया.
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दो बार अपनी और मंत्रियों की सैलरी में कटौती की
नेहरू ने इसके बाद दो बार सबकी स्वैच्छा से अपनी और मंत्रियों की सैलरी घटाई. पहले ये सैलरी 3000 से 2,225 रुपए की गई. तब भी उन्हें लगा कि शायद ये वेतन भी वो लोग ज्यादा ले रहे हैं. इसमें और कटौती करके तब वेतन को 2000 रुपया प्रति माह किया गया. ये काम तब किया गया था जबकि रुपए का अवमूल्यन शुरू हो चुका था और मंत्रियों का ज्यादा वेतन और अन्य सुविधाएं देने का दबाव पड़ रहा था.

रिटायरमेंट पर पेंशन और सुविधा भी नहीं लेना चाहते थे 
मथाई ने अपनी किताब के चैप्टर 14 "द प्राइम मिनिस्टर्स हाउस" में ये भी लिखा कि नेहरू ने केवल ज्यादा वेतन और अलाउंस लेने से ही मना नहीं किया बल्कि उस सुझाव को भी खारिज किया कि ब्रिटेन की तरह ऐसा कानून बनाया जाए, जिसमें प्रधानमंत्री को रिटायर होने के बाद पर्याप्त पेंशन और सुविधाएं हासिल हो सकें.

मथाई ने लिखा, "मैं डर रहा था कि नेहरू इस मामले में बहुत आत्मपरक हो रहे हैं. वो केवल अपने बारे में सोच रहे हैं. उनका गर्वीलापन उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है. उन्हें आत्मविश्वास था कि वो अपनी लेखनी  से ही पैसा कमाकर आरामदायक जिंदगी जी सकते हैं. ये बात उन्होंने मुझसे कही भी. "

नेहरू के निजी सचिव ने आगे लिखा, "मैने उनसे कहा कि अगर भविष्य में उनकी जगह कोई गरीब व्यक्ति प्रधानमंत्री बनता है तो उन्हें उसके बारे में भी सोचना चाहिए, इस बारे में संसद के विचार पर ध्यान देना चाहिए, बेशक अगर उन्हें वो सुविधाएं नहीं चाहिए तो वो उन्हें ना लें. नेहरू इसके बाद भी इस मामले में आत्मपरक बने रहे. टस से मस भी नहीं हुए."

नेहरू ने केवल ज्यादा वेतन और अलाउंस लेने से ही मना नहीं किया बल्कि उन्होंने उस सुझाव को भी खारिज किया कि ब्रिटेन की तरह एक कानून बनाया जाए, जिसमें प्रधानमंत्री को रिटायर होने के बाद पर्याप्त पेंशन और सुविधाएं हासिल हों.


नेहरू को चार कमरों का मकान पसंद था  
जब देश आजाद हुआ तब वो यार्क रोड के घर में रह रहे थे. सितंबर 1946 में अंतरिम सरकार बनने के बाद नेहरू  17, यार्क रोड पर (अब मोतीलाल नेहरू मार्ग) स्थित चार कमरे के आवास में शिफ्ट कर चुके थे. नेहरू को ये आवास बहुत पसंद था. यहीं से वो 15 अगस्त 1947 के बाद लाल किले पर झंडा फहराने पहुंचे थे. यहीं से वो संसद जाते थे. हालांकि बंटवारे के बाद देश में जो हालात पैदा हुए, उससे नेहरू की जान को खतरा हो गया था. उनकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की स्थिति आ गई थी. नेहरू को पसंद नहीं था कि उनके घर में पुलिस हर ओर नज़र आए और उनसे मिलने आने वालों को पुलिस की सुरक्षा से गुजरकर आना पड़े.

लार्ड माउंटबेटन चाहते थे कि नेहरू को प्रधानमंत्री होने के नाते अब बड़े और सुरक्षित घर में शिफ्ट होना चाहिए ताकि वहां उनकी सुरक्षा व्यवस्था मुकम्मल तरीके से लागू की जा सके. माउंटबेटन ने इसके लिए नई दिल्ली में स्थित ब्रिटिश राज के कमांडर - इन -चीफ के आवास को माकूल माना. नेहरू वहां शिफ्ट होने के लिए राजी नहीं थे.

पटेल को सौंपा गया नेहरू से मकान शिफ्ट कराने का काम 
मथाई लिखते हैं कि ऐसे में नेहरू के आवास शिफ्ट कराने का जिम्मा माउंटबेटन ने तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को सौंपा. पटेल एक दिन सुबह नेहरू के 17, यार्क रोड स्थित आवास पर पहुंचे.

नेहरू आजाद भारत के प्रधानमंत्री बनने के पहले से मोतीलाल नेहरू रोड पर 17 नंबर के घर में रहते थे. जब सुरक्षा के लिहाज से उन्हें ब्रिटिश राज के कमांडर इन चीफ का आवास (तीन मूर्ति भवन) दिया गया तो वहां जाने के इच्छुक नहीं थे. उन्हें अपना पुराना घर ही बेहतर लगता था.


पटेल ने तीनमूर्ति भवन जाने के लिए डाला  दबाव 
पटेल ने उनसे कहा, "वो पहले से दुखी हैं कि कि गांधीजी की सुरक्षा करने में विफल रहे. अब वह प्रधानमंत्री नेहरू की सुरक्षा को लेकर खुद पर कोई कलंक नहीं लगने देना चाहते. अगर नेहरू खतरे को समझने के बाद भी सुरक्षित भवन में शिफ्ट नहीं होते तो वो इस्तीफा दे देंगे."

इस तरह पटेल ने नेहरू को नए आवास में शिफ्ट होने के लिए तैयार कर लिया. हालांकि नेहरू तैयार नहीं थे. उन्हें अपने 17, यार्क रोड के बंगले से  ज्यादा प्यार था. उन्होंने नाखुशी भी जताई. उन्हें अंदाजा था कि नए आवास में शिफ्ट कराने के लिए माउंटबेटन से लेकर सरदार पटेल तक ने उनकी घेराबंदी की है और इसमें उनके निजी सचिव मथाई की भी भूमिका है.

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First published: November 15, 2019, 11:17 AM IST
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