समझौता एक्सप्रेस ब्लॉस्ट: भारत में हुए इस ट्रेन धमाके से दहल गया था पाकिस्तान, जानें 12 सालों में क्या-क्या हुआ

समझौता एक्सप्रेस ब्लॉस्ट में कई पाकिस्तानी लोगों की जान गई थी. पाकिस्तान वायुसेना का विमान आकर घायलों को ले गया था. जानिए, पूरा मामला.

News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 8:58 AM IST
समझौता एक्सप्रेस ब्लॉस्ट: भारत में हुए इस ट्रेन धमाके से दहल गया था पाकिस्तान, जानें 12 सालों में क्या-क्या हुआ
समझौता एक्सप्रेस ब्लॉस्ट में कई पाकिस्तानी लोगों की जान गई थी. पाकिस्तान वायुसेना का विमान आकर घायलों को ले गया था. जानिए, पूरा मामला.
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Updated: March 14, 2019, 8:58 AM IST
18 फरवरी 2007 को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से अटारी, पंजाब के लिए निकली समझौता एक्सप्रेस में भीषण बम धमाका हुआ. इसकी गूंज पाकिस्तान तक सुनाई दी क्योंकि यह अटारी से यह ट्रेन और लाहौर, पाकिस्तान के लिए रवाना होती है. धमाके में 68 लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए थे. मरने वालों में ज्यादातर लोग पाकिस्तान के रहने वाले थे. वे भारत-पाक के बीच चलने वाली ट्रेन से मुल्क वापसी कर रहे थे.

मामले की शुरुआती जांच हरियाणा पुलिस कर रही थीं. लेकिन बाद में इसी तर्ज पर दूसरे शहरों में हुए कुछ हादसों की व्यापक जांच के लिए यह मामला नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी. एनआईए ने मामले की जांच-पड़ताल के बाद चार्जशीट में 8 लोगों को आरोपी बनाया. इसी मामले में सोमवार को पंचकुला की एनआईए कोर्ट ने अंतिम चरण की सुनवाई की. फैसले पर 14 मार्च को सुनवाई होगी.

हालांकि, नबा कुमार सरकार ऊर्फ स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी चार आरोपी ही पुलिस की गिरफ्त में हैं. 12 साल बाद भी मामले के तीन आरोपियों रामचंद्र कलसंगरा, संदीप डांगे और अमित को पुलिस नहीं पकड़ पाई है. जबकि कथ‌ित तौर पर इस धमाके के मास्टर माइंड सुनील जोशी की दिसंबर 2007 में ही मौत हो गई थी.



NIA के मुताबिक, "अक्षरधाम (गुजरात), रघुनाथ मंदिर (जम्मू), संकट मोचन (वाराणसी) मंदिरों में हुए इस्लामी आतंकवादी हमलों से दुखी लोगों का एक गुट 'बम का बदला बम से' लेना चाहता था." उल्लेखनीय है कि साल 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच चलने वाली इस ट्रेन को रोक दिया गया था. लेकिन 2004 में दोनों देशों की आपसी सहमति से फिर इस सेवा को बहाल किया गया था. इसके बाद यह ट्रेन हमले का शिकार बनी. आइए जानते हैं समझौता एक्सप्रेस ब्लॉस्ट के 12 सालों के केस में अब तक क्या-क्या हुआ है.

समझौता ब्लॉस्ट के बाद पाक वायुसेना का विमान आया था भारत
18 फरवरी 2007: पुरानी दिल्ली से निकली समझौता एक्सप्रेस निकली. भारतीय समयानुसार रात 23:53 बजे जब ट्रेन करीबन 80 किलोमीटर की दूरी तय चुकी थी, एक भीषण धमाका हुआ. यह ब्लॉस्ट तब हुआ जब ट्रेन हरियाणा के पानीपत जिले दिवाना रेलवे स्टेशन के पास हुआ. यह क्षेत्र चांदनी बाग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गांव शिवा गांव के करीब था. यात्रियों के अनुसार दो धमाकों की आवाज आई थी. इसके ट्रेन के दो जनरल कोचों में आग लग गई थीं. मौके पर पहुंची पुलिस को दो ऐसे और सूटकेस मिले थे, जिनमें विस्‍फोटक रखे हुए थे.

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19 फरवरी 2007: इसके बाद दिल्ली हरियाणा के अस्पतालों में इलाज के दौरान हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई, 12 घायल हो गए. इसमें ज्यादातर लोग पाकिस्तान के थे.

20 फरवरी 2007: पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद अहमद कसूरी भारत आए. दोनों देशों ने हमले की कड़ी निंदा की.

घायलों की पहचान के बाद भारत ने पाकिस्तानी वायुसेना के विमान को दिल्ली आने की अनुमति दी. दिल्ली से सात पाकिस्तानी घायलों को पाकिस्तान ले जाया गया. मामले की जांच पड़ताल हरियाणा पुलिस ने शुरू की. 20 फरवरी को ही प्रत्यक्षदर्शियों के याददाश्त के आधार पर दो संदिग्ध लोगों के 'स्केच' जारी कर दिए.

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फरवरी 2007: हरियाणा सरकार ने मामले की जाचं के लिए एसआईटी ग‌ठित कर दी.



मार्च, 2007: मामले की छानबीन करते हुए हरियाणा पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस की सहायता से इंदौर से दो संदिग्ध पकड़े. पुलिस के मुताबिक घटनास्‍थल से प्राप्त सूटकेस पर लगे कवर से उन तक पहुंची. ये सूटकेस इंदौर के एक बाजार से खरीदे गए थे. पड़ताल के दौरान इस घटना के तार हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव धमाके से जुड़े हुए होने की आशंका जाहिर की गई. हरियणा पुलिस और एंटी टेरेरिस्टि स्‍क्वॉड (ATS) दोनों को कुछ ऐसे सबूत मिले जिसके आधार पर एक हिंदू कट्टरपंथी संगठन 'अभिनव भारत' के मामले में लिप्त होने के आसार थे.

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जुलाई, 2010: धमाकों की पड़ताल के दौरान मिले संकेतों के आधार पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) के नेता इंद्रेश कुमार से हुई पूछताछ के बाद सरकार ने इसकी गहन जांच के लिए मामला एनआईए को सौंप दिया.

समझौता ब्लॉस्ट मामले में स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी
साल 2010: सीबीआई ने उत्तराखंड के हरिद्वार से असीमानंद को गिरफ्तार किया. समझौता एक्सप्रेस समेत 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों से उनके तार जुड़े होने के आरोप थे.

26 जून 2011: एनआईए ने अपने हिस्से की पड़ताल के बाद पंचकुला विशेष अदालत को अपनी चार्जशीट सौंपी. इसमें कुल 5 लोगों नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा को आरोपी बनाया. लेकिन एनआईए ने एक अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करने की मांग की.

साल 2012: एनआईए ने साल 2011 से 2012 के बीच तीन बार चार्जशीट फाइल की. बाद में फाइल चार्जशीट में तीन अन्य लोगों कमल चौहान, राजिंदर चौधरी और अमित को भी आरोपी बनाया.

दिसंबर 2012: एनआईए ने राजिंदर चौधरी को इंदौर से गिरफ़्तार किया गया. राजिंदर चौधरी के साथ ही कमल चौहान और लोकेश शर्मा का नाम भी 2006 में हुए मालेगांव ब्लास्ट में सामने आया.

24 फरवरी 2014: पंचकुला की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई.

अगस्त 2014: पंचकुला की विशेष अदालत से असीमानंद को जमानत मिल गई. एनआईए उनके खिलाफ कोर्ट में पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाई.

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मार्च 2019: पंचकुला विशेष अदालत सभी आठ आरोपियों पर फैसला आ सकता है.
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