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चीन को सख्त नापसंद करने वाले सरदार पटेल की प्रतिमा में चीन से ही मदद

चीन को सख्त नापसंद करने वाले सरदार पटेल की प्रतिमा में चीन से ही मदद

आज सरदार पटेल की जयंती है इस बार यह जयंती और भी खास होने वाली है. दरअसल आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह विश्व की सबसे ऊंची सबसे लंबी प्रतिमा है. आज पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भी कहा कि सरदार पटेल जो जमीन से जुड़े थे, अब आसमान की भी शोभा बढ़ाएंगे. आइए आपको बताते हैं की इस मूर्ति को देखने के लिए आपको क्या करना होगा और कितनी है इस मूर्ति का दीदार करने की टिकट..

आज सरदार पटेल की जयंती है इस बार यह जयंती और भी खास होने वाली है. दरअसल आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह विश्व की सबसे ऊंची सबसे लंबी प्रतिमा है. आज पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भी कहा कि सरदार पटेल जो जमीन से जुड़े थे, अब आसमान की भी शोभा बढ़ाएंगे. आइए आपको बताते हैं की इस मूर्ति को देखने के लिए आपको क्या करना होगा और कितनी है इस मूर्ति का दीदार करने की टिकट..

सरदार वल्लभ भाई ने चीन से 12 साल पहले ही आगाह कर दिया था, बाद में युद्ध ने साबित किया कि वो सही थे

  • News18Hindi
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    यह विडंबना ही है कि जिस सरदार पटेल ने चीन पर कभी यकीन नहीं किया, उनकी मूर्ति ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण में चीन का अहम रोल है. दुनिया के इस सबसे ऊंची प्रतिमा का कांस्य अावरण चीनी कंपनी बना रही है. पटेल जब तक जिंदा रहे, तब तक वो हमेशा चीन की मंशाओं का शक जाहिर करते रहे. उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को चीन की ओर दोस्ती का हाथ बढाने पर बार बार चेताया.

    ये खत पटेल चीन के खिलाफ भारत की 1962 की लड़ाई के 12 साल पहले लिखा था. जब नेहरू पूरी तरह चीन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बढ़ना ही नहीं चाहते थे बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वो लगातार चीन का साथ दे रहे थे. पटेल उन्हें चेताने की कोशिश करते थे. आखिरकार सरदार पटेल को एक लंबा खत नेहरू को लिखना पड़ा.
    ये खत उन्होंने 7 नवंबर, 1950 को अपने निधन के महज एक महीने लिखा. पूरे पत्र में वो लगातार ये समझाते रहे कि चीन से चाहे जितनी भी दोस्ती कर ली जाए लेकिन अंदर से वो हमें अपना दोस्त नहीं मानता और ना ही कभी मानेगा. बाद के बरसों में पटेल की आशंकाएं सच साबित हुईं.

    सरदार पटेल ने हमेशा यही कहा कि चीन कभी हमारा दोस्त नहीं हो सकता


    चीनी कंपनी बना रही कांस्य का आवरण 
    सरदार पटेल की 182 फुट ऊंची प्रतिमा जो गुजरात के वडोदरा में बनाई जा रही है, उसमें करीब 22500 टन कांस्य की प्लेटें चीन की नानचिंग प्रांत की एक कंपनी बना रही है. चीनी कंपनी के मजदूर और विशेषज्ञ इस मूर्ति के निर्माण से जुड़े हैं. लगातार प्रतिमा के लिए कांस्य प्लेटों का आवरण की मापतौल पर चीन में अपनी कंपनी को भेज रहे हैं, जहां उनका निर्माण हो रहा है. फिर इसे मूर्ति में असेंबल करने के लिए भेजा जा रहा है.

    एलएंडटी को यह ठेका इसलिए चीन की कंपनी को देना पड़ा, क्‍योंकि इसके लिए काफी बड़ा ढलाई घर चाहिए और भारत में 4600 ढलाईधर तो हैं, लेकिन इनमें कोई भी इतना बड़ा नहीं है, जो इसे बना सके. इसलिए मूर्ति बनाने का काम L&T द्वारा चीन में स्थित विश्व के सबसे बड़े ढलाईघर को दिया गया है.

    पटेल ने नवंबर 1950 में नेहरू को एक लंबा खत लिखकर चीन की मंशा कई सवाल खड़े किए थे


    क्या पटेल इसे बर्दाश्त करते 
    ये बात सही है कि अगर पटेल जिंदा होते तो वो किसी भी स्तर पर चीन के इस सहयोग को कतई बर्दाश्त नहीं करते. चीनी कंपनी की ‘फैक्‍ट्री’ को दिया गया ये अहम काम वर्तमान केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी के भी खिलाफ है. भले ही सरकार ने यह कहकर पल्‍ला झाड़ लिया है कि ये उस कंपनी का मामला है, जिसने मूर्ति के निर्माण की बोली जीती है, लेकिन कुल मिलाकर मामला तो देश का ही है.

    चीन हमें दोस्त नहीं मानता
    इस गुप्त पत्र में उन्होंने नेहरू को लिखा था,
    "भले ही हम खुद को चीन के मित्र के तौर पर देखते हैं, लेकिन चीन हमें अपना दोस्त नहीं मानता और उसका आक्रामक रवैया हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है."


    चीन कभी मदद नहीं करेगा
    नेहरू ने चीन को यूएन की सुरक्षा परिषद में जगह दिलाने की अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर वकालत की. जबकि खत में पटेल ने नेहरू को साफ कहा,
    "आप भले ही यूएन में चीन की तरफदारी कर रहे हैं, लेकिन उसके रुख को देखकर मुझे शक है चीन कभी आपकी इस तरह से मदद करेगा."


    उसकी भाषा शत्रु की भाषा है
    उन्होंने इसी पत्र में ये भी लिखा,
    "मुझे इसमें संदेह है कि चीन को अपनी सदइच्छाओं, मैत्रीपूर्ण उद्देश्यों और निष्कपट भावनाओं के बारे में बताने के लिए हम जितना कुछ कर चुके हैं, उसमें आगे भी कुछ किया जा सकता है.उनके टेलिग्राम की भाषा साफ बताती है कि यह किसी दोस्त की नहीं, बल्कि भावी शत्रु की भाषा है."

    Tags: Sardar patel

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