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Sardar Vallabhbahi Patel Birthday: पटेल की देन है देश का 'मजबूत प्रशासन तंत्र'

Sardar Vallabhbahi Patel Birthday: पटेल की देन है देश का 'मजबूत प्रशासन तंत्र'

सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) को आधुनिक भारतीय प्रशासनिक सेवा को आकार देने का श्रेय दिया जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) को आधुनिक भारतीय प्रशासनिक सेवा को आकार देने का श्रेय दिया जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

सरदार वल्ल्भ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) के जन्मदिन को पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना रहा है. भारत (India) आजादी के बाद सरदार पटेल ने देश में बिखरी हुई 565 रियासतों को अपने कुशल नेतृत्व के जरिए एक देश में लाने का कार्य किया. यह भारत के लौह पुरुष (Iron man of India)कहे जाने वाले सरदार पटेल का देश के लिए सबसे बड़ा योगदान माना जाता है. लेकिन उनका योगदान इससे कहीं ज्यादा रहा है. उन्होंने देश को ना केवल आजादी के समय के मुश्किल दौर से निकाला है, बल्कि देश को कई जरूरी व्यवस्थाएं भी दी हैं जो देश की एकता का आधार हैं.

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    आधुनिक भारत (India) के निर्माता कहे जाने वाले सरदार वल्ल्भ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) ही हैं जिन्हें भारत को कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, गुजरात लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एक ही सूत्र में बांधने का श्रेय दिया जाता है. गणतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार को देश उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में याद कर रहा है. सरदार पटेल ने देश को आजादी के बाद बहुत ही कठिन परिस्तिथियों से जिस प्रकार निकाला वह शायद ही कोई और कर सकता था. आजादी के समय बंटवारे का दंश झेल रहे देश में हिंदू मुस्लिम एकता  बनाए रखने की चुनौती. 565 अलग अलग रियासतों को देश में मिलाने की चुनौती के अलावा सरदार पटेल ने देश के लिए योगदान में से कुछ लोकप्रिय उपलब्धियां हैं.

    बेमिसाल व्यक्तित्व
    सरदार पटेल का राजनैतिक करियर,कम से कम शुरुआती राजनैतिक करियर तो गांधी जी से बहुत प्रेरित हुआ. एक बेहतरीन तर्क और तीक्ष्ण बुद्धि के मालिक होने के साथ ही पटेल शानदार तर्कशक्ति वाले स्पष्टवादी व्यक्ति रहे थे. पटेल ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य कायम रखा और शानदार निर्णय क्षमता दिखाई. चाहे बारदोली में  महिलाओं के आंदलोन का नेतृत्व हो, बंटावारे के समय देश के लिए कठोर निर्णय लेना हो या फिर एक भारत के लिए रियासतों को मनाने का काम हो हर बार पटेल की सूझबूझ दिखाई दी.

    खुद पढ़ाई का खर्चा उठा कर बने वकील
    सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में बम्बई प्रेसिडेंसी के नाडियाद में हुआ था जो आज के गुजरात के खेड़ा जिले में आता है.  उन्होंने 22 साल की उम्र में मेट्रिकुलेशन की परीक्षा पास की. इसके बाद  वे इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर बनना चाहते थे लेकिन आर्थिक हालात मजबूत ना होने की वजह से ऐसा ना कर सके. लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा के लिए खुद खर्चे उठाए वकालत पढ़ी और प्रैक्टिस भी की. आखिरकार 36 साल की उम्र में वे इंग्लैड जाकर पढ़ाई भी कर सके.

    दिल के बहुत मजबूत थे पटेल
    पटेल दिल के बहुत ही सख्त व्यक्ति थे. एक बार जब वे गुजरात में बुबोनिक प्लेग फैला और अपने दोस्तों की सेवा करते हुए वे खुद भी संक्रमित हो गए, तब उन्होंने खुद को परिवार से अलग कर लिया और अकेले एक मंदिर में रहने लगे और धीरे धीरे खुद को ठीक भी कर लिया.  1909 में उनकी पत्नी झावेर बा का कैंसर से निधन हो गया था. जब यह खबर उन्हें दी जा रही थी तब पटेल अदालत में जिरह कर रहे थे. उन्हें एक कागज में लिखकर नोट दिया गया, जिसे पढ़कर उन्होंने जेब में रख लिया और जिरह जारी रखी.

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    सरदार पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) को भारत का लौह पुरुष और बिस्मार्क भी कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    गांधी ने किया हृदय परिवर्तन
    कहा जाता है कि पटेल की राजनीति में आने की रुचि नहीं थी. लेकिन 1917 में ही दोस्तों के कहने पर उन्होंने अहमदाबाद नगरपालिका का चुनाव लड़ा और जीत भी गए. पहले उन्हें महात्मा गांधी को सुनने का मौका भी मिला था, लेकिन वे उस समय गांधीजी में रुचि नहीं रखते थे. लेकिन गांधी जी के नील आंदोलन में गांधी जी के योगदान से प्रभावित हुए और 1917 में ही उनसे मुलाकात के बाद उनका जीवन ही बदल गया और वे देश सेवा में कूद पड़े.

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    बंटवारे की प्रक्रिया

    पटेल के नेतृत्व कौशल और सूझबूझ का उत्कृष्ट नमूना आजादी से पहले के ही समय देखने को मिला जब भारत पाकिस्तान के बीच बंटवारे की प्रक्रिया चल रही थी. पटेल की ने यहां एक बेहतरीन तरीके से बंटवारे की प्रक्रियाओं को निपटाया और आजादी के बाद देश के उपप्रधानमंत्री रहते हुए बंटवारे से पैदा हुए हिंदु मुस्लिम तनाव से भी सूझबूझ, सख्ती और संवेदनशीलता से निपटे.

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    31 अक्टूबर अब हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है. (फाइल फोटो)

    565 रियासतों के बाद एक भारत
    भारत में आजादी के  बाद 565 रियासतों को मिलाने का काम सरदार पटेल ने बहुत ही कुशलता के साथ किया जिसकी वजह से उन्हें भारत का लौह पुरुष और भारत के बिस्मार्क की उपाधि  दी गई. उन्हें हर मामले में बहुत ही चतुराई से रियासतों के राजाओं का दिल जीता और जरूरत पड़ने पर सख्ती से भी काम लिया.

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    आजाद भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को नया रूप देने में पटेल का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है. कहा जाता है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के साथ अखिल भारतीय सेवा को आधुनिक रूप पटेल की ही देन था. यहां तक कि उन्हें अखिलभारतीय सेवाओं का पिता तक कहा जाता है. वे इस सेवाओं को देश का लोहे का ढांचा कहा करते थे.  भारत के गणतंत्र बनने वाले साल में 15 दिसंबर 1950 को उनका देहांत हो गया.

    Tags: History, India, Research, Sardar Vallabhbhai Patel

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