होम /न्यूज /नॉलेज /पुण्यतिथि : सरोजिनी नायडू जो केवल 12 साल में हो गईं थीं फेमस

पुण्यतिथि : सरोजिनी नायडू जो केवल 12 साल में हो गईं थीं फेमस

महात्मा गांधी के साथ सरोजिनी नायडू (फाइल फोटो)

महात्मा गांधी के साथ सरोजिनी नायडू (फाइल फोटो)

आजादी के बाद सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली गर्वनर बनीं. वह ऐसी महिला थीं, जिन्होंने पहले अपनी पहचान देश की मजबूत क ...अधिक पढ़ें

सरोजिनी नायडु आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की पहली गर्वनर बनी थीं. कार्यकाल के दौरान ही 02 मार्च 1949 को हार्ट अटैक से निधन हो गया. बचपन से ही सरोजिनी नायडू बहुत होशियार थीं. उन्होंने 12 साल की आयु में ही 12 वीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास कर ली थी. उन्होंने 13 साल की आयु में ‘लेडी ऑफ दी लेक’ नामक कविता लिख दी थी. जिसने फेमस कर दिया. ये कविता उन्होंने स्कूल में बैठे हुए गणित की कॉपी 1300 लाइनों में लिखीं थीं. इस पर हैदराबाद के निजाम इतने खुश हुए कि विदेश में पढ़ाई के लिए उन्हें स्कॉलरशिप दे दी. वह पढ़ने के लिए पहले लंदन के किंग्स कॉलेज और बाद में ग्रिटन कॉलेज कैम्ब्रिज गईं.

पढ़ाई के साथ-साथ कविताएं भी लिखती रहीं. गोल्डन थ्रैशोल्ड उनका पहला कविता संग्रह था. उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह ‘बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें फेमस कर दिया.

गांधीजी से पहली बार भारत में नहीं बल्कि ब्रिटेन में मिली थीं
बहुत कम लोग जानते हैं कि गांधीजी से सरोजिनी नायडू की पहली मुलाकात इंग्लैंड में हुई थी. ये 1914 की बात है. गांधी जी अपने दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह के चलते प्रसिद्ध हो चुके थे. सरोजिनी नायडू उस समय इंग्लैंड में थीं. जब उन्होंने सुना कि गांधीजी भी इंग्लैंड में हैं, तब वो उनसे मिलने गईं.

गांधीजी को देखकर चौंकीं लेकिन प्रभावित भी हुईं
राबर्ट पेन की बेहद चर्चित पुस्तक “द लाइफ एंड डेथ ऑफ महात्मा गांधी” कहती है कि सरोजिनी ने देखा कि गांधीजी जमीन पर कंबल बिछाकर बैठे हुए हैं और उनके सामने टमाटर और मूंगफली का भोजन परोसा हुआ है. सरोजिनी नायडू गांधी की प्रशंसा सुन चुकी थीं, पर उन्हें कभी देखा नहीं था. जैसा कि वो खुद वर्णन करती हैं, ‘कम कपड़ों में गंजे सिर और अजीब हुलिये वाला व्यक्ति और वो भी जमीन पर बैठकर भोजन करता हुआ.’

इसी किताब में आगे लिखा है, “गांधी जी के ऐसे व्यक्तित्व से सरोजिनी नायडू बहुत प्रभावित हुईं और गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर ही वे देश के लिए समर्पित हो गईं. उन्होंने एक कुशल सेनापति के रूप में अपनी प्रतिभा का परिचय सत्याग्रह और संगठन में भी दिया. उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं.”

नाभा की राजकुमारी और उनकी बेटी के साथ सरोजिनी नायडू

दोनों के आपस में थे बहुत दोस्ताना संबंध
राबर्ट पेन की ये किताब कहती है, “गांधीजी ने उनके भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी. लेकिन वो अपने पत्रों में उन्हें कभी-कभी ‘डियर बुलबुल’,’डियर मीराबाई’ तो यहां तक कि कभी मजाक में ‘अम्माजान’ और ‘मदर’ भी लिखते थे. मजाक के इसी अंदाज में सरोजिनी भी उन्हें कभी ‘जुलाहा’, ‘लिटिल मैन’ तो कभी ‘मिकी माउस’ संबोधित करती थीं.”

वैसे जब देश में आजादी के साथ भड़की हिंसा को शांत कराने का प्रयत्न महात्मा गांधी कर रहे थे, उस वक्त सरोजनी नायडू ने उन्हें ‘शांति का दूत’ कहा था और हिंसा रुकवाने की अपील की थी. सरोजिनी नायडू 1925 में कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन में कांग्रेस की दूसरी महिला अध्यक्ष बनीं. वे भारत की पहली महिला गवर्नर भी थीं. आजादी के बाद उन्हें संयुक्त प्रांत का राज्यपाल बनाया गया था.

बंगाली परिवार में जन्म
सरोजिनी जी का जन्म एक बंगाली परिवार में हुआ था, उनके पिता वैज्ञानिक व डॉक्टर थे, जो हैदराबाद में रहने लगे थे, जहां वो हैदराबाद कॉलेज के एडमिन थे. वह इंडियन नेशनल कांग्रेस हैदराबाद के पहले सदस्य भी बने. उन्होंने अपनी नौकरी को छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूदने का फैसला किया. सरोजिनी जी की माता वरद सुन्दरी देवी एक लेखिका थी, जो बंगाली में कविता लिखा करती थी. सरोजिनी जी 8 भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी. उनके एक भाई वीरेन्द्रनाथ क्रन्तिकारी थे, जिन्होंने बर्लिन कमिटी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी. इन्हें 1937 में एक अंग्रेज ने मार डाला था व इनके एक और भाई हरिंद्रनाथ कवि और एक्टर थे.

मद्रास यूनिवर्सिटी में टॉप कर प्रसिद्धी पाई थी
12 साल की उम्र में सरोजिनी जी ने मद्रास यूनिवर्सिटी में मैट्रिक की परीक्षा में टॉप किया था, जिससे उनकी बहुत वाहवाही और नाम हुआ. सरोजिनी के पिता चाहते थे, की वे वैज्ञानिक बने या गडित में आगे पढाई करे, लेकिन उनकी रुचि कविता लिखने में थी. जब वह लंदन में पढ़ाई के लिए गईं तो सरोजिनी की रुचि कविता पढने-लिखने में थी.

इंटरकास्ट मैरिज करके धमाका किया
कॉलेज की पढाई के दौरान सरोजिनी जी की मुलाकात डॉ गोविन्द राजुलू नायडू से हुई. कॉलेज के ख़त्म होने तक दोनों एक दुसरे के करीब आ चुके थे. 19 साल की उम्र में पढाई ख़त्म करने के बाद सरोजिनी ने अपनी पसंद से 1897 में दूसरी इंटरकास्ट शादी कर ली. तब दूसरी जाति में शादी करना किसी गुनाह से कम नहीं था. उनके पिता ने अपनी बेटी का साथ दिया.

उनकी कविताएं नेहरू और टैगोर जैसे लोग भी पसंद करते थे
सरोजिनी ने शादी के बाद भी अपना काम जारी रखा. वह बहुत सुंदर कविताएं लिखती थीं.  1905 में उनकी कविता “बुलबुले हिन्द” प्रकाशित हुई. फिर तो देश का हर पढ़ा लिखा उन्हें जानने लगा. उनकी कविताओं के प्रशंसकोे में जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी थे. वो इंग्लिश में कविताएं लिखती थीं.

गांधी से दूसरी मुलाकात के बाद आजादी की लड़ाई में कूदीं
1916 में वह महात्मा गांधी से मिलीं. इसके बाद से उनकी सोच पूरी तरह से बदल गई. उन्होंने पूरी ताकत देश को आजाद कराने में लगा दी. इसके बाद वह पूरे देश में घूमी. उन्होंने देश में औरतों को मुख्य रूप से जगाया. औरतों को उनके अधिकार के बारे में बताया. उन्हें आजादी की लड़ाई में आगे आने को प्रोत्साहित किया.

उप्र की गर्वनर रहने के दौरान मृत्यु 
1947 में देश की आजादी के बाद सरोजनी जी को उत्तर प्रदेश का गवर्नर बनाया गया. वह पहली महिला गवर्नर थी . 2 मार्च 1949 को ऑफिस में काम करते हुए उन्हें हार्टअटैक आया. वह चल बसीं.

Tags: Freedom fighters, Freedom Movement, Freedom Struggle

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें