Home /News /knowledge /

क्या कोरोना वायरस चमगादड़ से सीधे नहीं, कुत्ते से होते हुए इंसानों में आया था

क्या कोरोना वायरस चमगादड़ से सीधे नहीं, कुत्ते से होते हुए इंसानों में आया था

आवारा कुत्तों ने महिला को मार डाला (सांकेतिक तस्वीर)

आवारा कुत्तों ने महिला को मार डाला (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना वायरस इंसानों में कैसे आया, इसको लेकर कई तरह के शोध हो रहे हैं. ताजा शोध कहता है कि यह इंसानों में कुत्तों से होता हुआ था.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) के इलाज को लेकर जहां शोध अब भी जारी है. वहां इस सवाल पर शोध अब तक चल ही रहा है कि आखिरी यह इंसानों में आया कहां से. शुरू में कहा जा रहा था कि यह वायरस चमगादड़ों (Bats) से इंसानों में आया था. लेकिन बाद इस बात को लेकर अन्य मत भी सामने आए. अब एक मत कह रहा है कि यह चमगादड़ों से पहले कुत्तों (Dogs) में आया फिर इंसानों में फैला.

कैसे आया यह इंसानों में, इस पर अलग-अलग राय
कोरोना वायरस के फैलने को लेकर कई मत सामने आए जिसमें एक मत यह भी है कि चीन के वुहान शहर से फैला यह वायरस चीन की एक प्रयोग शाला से दुनिया में फैला. यह भी कहा कहा कि यह वायरस पहले पेंगोलिन से सब जगह फैला. तो वहीं एक मतानुसार यह भी कहा गया कि यह वायरस पहले से ही इंसानों में था लेकिन हाल ही में उसने खुद को घातक बना डाला.  इस मत को खारिज करने वाले शोध भी सामने आए हैं.

इस शोध को भी नहीं मिल रहा है सीधा समर्थन
ताजा अध्ययन कहता है कि इंसानों में आने से पहले सार्स कोव-2 कुत्तों में पहुंचा और वहां से इंसानों में आया. इस बात को खारिज करने वाले भी कम नहीं हैं. लेकिन इसे सीधे  खारिज भी नहीं किया जा रहा है. फिर भी बहुत से शोधकर्ता इस बात से सहमत हैं कि इस बात की संभावना ज्यादा है कि यह वायरस सीधे चमगादड़ों से इंसानों में नहीं आया.

suspected patient of corona virus, Durg News, Bhilai from China, dhamtari, छत्तीसगढ़ न्यूज, धमतरी, कोरोना वायरस, चमगादड़, Bats

पहले बताया जा रहा था कि चमदागदड़ से ही कोरोना वायरस मनुष्यों मं फैला था. . सांकेतिक फोटो.


कहां हुआ यह शोध
कनाडा की ओटावा यूनिवर्सिटी के बायोलॉजी के प्रोफेसर जुहुआ जिया का हाल ही में एक विश्लेषण मॉलीक्यूलर बयोलॉजी एंड एवॉल्यूश जर्नल में प्रकाशित हुआ है. लाइव सांइस के लेख के मुताबिक इस विश्लेषण में उन्होंने इस पहेली का जवाब दिया है. उनके मुताबिक कोरोना चमगादड़ से पहले कुत्तों में आया और फिर इंसानों में फैला.

क्या आधार था जिया के शोध का
जिया ने अपेन शोध में सार्स कोव-2 का जेनेटिक कोड स्कैन किया.इसमें उनका ध्यान खास तौर पर  ‘CpG साइट्स’ नाम की कोड सीक्वेंस पर था, जिसे इंसानी इम्यून सिस्टम एक खतरे के तौर पर पहचानता है. शोध में यह माना गया ( या कहें कि शोध का एक यह आधार भी था) कि वायरस में जितनी कम ‘CpG साइट्स’ होंगी. वह इंसानी शरीर में उसे कम खतरा होगा.

CpG ने कैसे दी जिया के अध्ययन को दिशा
जिया ने पाया कि सार्स कोव-2 में कम ‘CpG साइट्स’ थे. जबकि अन्य जानवरों में पाए गए दूसरे कोरोना वायरस जैसे सार्स कोव या मर्स कोव, में ज्यादा ‘CpG साइट्स’ थे. वहीं चमगादड़ में पाया जाने वाला सार्स कोव-2 के निकतम संबंधी RaTG13 में अन्य चमगादड़ कोरोना वायरस के मुकाबले भी कम ‘CpG साइट्स’ थे. जिया के मुताबिक, इससे साफ होता है कि सार्स कोव 2 किसी दूसरे जीव में पनपा जिसमें ‘CpG साइट्स’ पहचानने की क्षमता थी और उसी दबाव में उसने वायरस ने खुदको बदला जिससे ‘CpG साइट्स’ कम हो जाएं. यानि साफ था कि सार्स कोव 2 ऐसे जीव में पनपा जिसमें ‘CpG साइट्स’ पहचाने की क्षमता ज्यादा थी. और सार्स कोव 2 सीधे इंसानों में नहीं आया.

Corona
कोराना वायरस परिवार के ज्यादातर वायरस खतरनाक नहीं होते लेकिन सार्स कोव 2 बहुत खतरनाक पाया गया है.


ऐसा निष्कर्ष निकाला कुत्तों पर
जिया के पास बहुत जानवरों में ‘CpG साइट्स’ की पहचान करने वाले प्रोटीन की जानकारी नहीं थी.  उन्होंने उन जानवरों को खोज करनी शुरू की जिसमें  कम मात्रा में ‘CpG साइट्स’ स्तर हों. उन्होंने एक कोरोना वायरस पाया जो मूल रूप से कैनाइन आंत को संक्रमित कर सकता है. और यह भी कुत्तों में ही वह प्रोटीन ज्याद मात्रा में हो सकता है जिससे सार्स कोव-2 का वर्तमान स्वरूप आ सका होगा. जिया के मुताबिक केवल  कुत्तों में ही ऐसे  ऐसे कम CpG CoV स्तर के ऊतक (Tissue) हो सकते हैं.

उठते हैं कई सवाल
इस शोध पर कई सवाल उठते हैं.  सैन फ्रांसिसकों स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर प्लेयुनी पेनिंग्स इस शोध में शामिल नहीं थीं, लेकिन वे उन्होंने कई वायरसों के CpG स्तरों पर काम किया है.  उन्होंने इस शोध के नतीजों की कई खामियां बताईं.

ये हैं अध्ययन की खास खामियां
शोध से यह पता नहीं चलता कि सार्स कोव 2 इंसानों पर इतना घातक कैसे हो गया. यह भी कि इसका CpG के स्तर से कोई सीधा संबंध हो यह जरूरी नहीं है. जबकि जिया का शोध तो यही दावा करता दिखता है. इसके अलावा अगर CpG का स्तर कम होने का सीधा संबंध सार्स कोव 2 की घातकता से होता तो अब तक इसकी वैक्सीन बन चुकी होती.

Corona
कोरोना दुनिया के 210 देशों में फैल चुका है.


नहीं है शोध के प्रमुख निष्कर्ष में दम
जिया ने केवल एक संभावना बताई की कुत्तों से इंसानों में सार्स कोव 2 आ सकता है. लेकिन इस के समर्थन में हमारे पास ज्यादा  प्रमाण नहीं मिले हैं.

यह भी पढ़ें:

क्या कोरोना वायरस के खात्मे के लिए आधे देश को होना होगा संक्रमित?

वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे चमकीला सुपरनोवा, जानिए क्यों खास है यह

Coronavirus: जानें चीन ने रूस से आने वालों की सूचना देने पर क्‍यो रखा इनाम?

Tags: Corona, Corona Virus, Coronavirus, Health, Health Explainer, Science

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर