जानिए कैसे पता चला- पृथ्वी की तरह शनि के चंद्रमा पर भी हैं महासागरीय जलधाराएं

(Tweet: ) 
शनि (Satrun) के चंद्रमा एन्सेलेडस (Enceladus) में बर्फ की सतह की पर ही सभी संकेत मिले हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

(Tweet: ) शनि (Satrun) के चंद्रमा एन्सेलेडस (Enceladus) में बर्फ की सतह की पर ही सभी संकेत मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

शनि (Saturn) के चंद्रमा एन्सेलेडस (Enceladus) के महासागरों में वैसी ही जलधाराएं (Ocean Currents) होने के संकेत मिले हैं जैसी पृथ्वी के महासागरों की गहराइयों में होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2021, 7:07 PM IST
  • Share this:
जब भी पृथ्वी (Earth) से बाहर जीवन की तशाल की बात होती है तो आमतौर पर उसे मानव जीवन की तलाश ही समझा जाता है. लेकिन हमारे खगोलविद पृथ्वी के बाहर जीवन की हर संभावना को टटोलने का भी प्रयास कर रहे हैं. इसी के तहत उन्हें शनि (Satrun) के चंद्रमा एन्सेलेडस (Enceladus) की एक रोचक प्रक्रिया का पता चला है. एन्सेलेडस की बर्फीली सतह के नीचे के महासागरों में शोधकर्ताओं का महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) का पता चला है जो पृथ्वी पर महासागरों के अंदर मौजूद धाराओं की तरह काम करती हैं.

बर्फ के नीचे तरलता

शनि के इस चंद्रमा के बर्फीली पर्पटी के नीचे गहराई में काला पानी पृथ्वी की महासागरीय जलधाराओं की तरह घूम रहा है. नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित शोध में शनि के चंद्रमा के वैश्विग महासागरों को ढकने वाली बर्फ की परत के नए विश्लेषण के तहत इसकी जलधाराएं पृथ्वी की धाराओं की तरह बह रही हैं. यदि वाकई ऐसा है तो एन्सेलेडस महासागर समरूप नहीं हो सकते है.

ऐसे मिली है जानकारी
एन्सेलेडस के रहस्य के बारे में पता करना आसान नहीं हैं इसके बारे में सबसे पहली बार 1981 जानकारी मिली जब वॉयजर-2 हमारे सौरमंडल के बाहर जाते समय इसके पास से गुजरा. यान की तस्वीरों से पता चला कि बहुत ही चमकीली बर्फ की 500 किलोमीटर चौड़ी छोटी सी गेंद क्रेटर से फूला और उसे लंबी दरारें बना दीं जिससे स्पष्ट हुआ कि कोई भूगर्भीय गतिविधि हुई है. इसके बाद साल 2010 में शनि के लिए भेजे गए कैसिनी अभियान ने एन्सेलेडस के बर्फीले खोल की दरारों से तरल पानी के गीजर खोजे. यह इस बात का प्रमाण था शनि के इस चंद्रमा सतह के नीचे गहराई तक बर्फ नहीं बल्कि तरल नमकीन महासागर हैं.

तनाव और खिंचाव

एन्सेलेडस 1.37 दिन में शनि का अंडाकार चक्कर लगाता है. इससे शनि के गुरुत्वाकर्षण में बदलाव आता है और एन्सेलेडस पर अलग अलग खिंचाव और तनाव लगते हैं. इन दबावों से इसमें गर्मी पैदा होकर भूगर्भीय गतिविधि होती है जो बर्फीली सतह पर दरारें पैदा करती हैं. आंतरिक गर्मी ही आंतरिक महासागर को गर्म रखती है और दरारों में गीजर बनाते हैं.



, Earth, Saturn, moon, Enceladus, Ocean, Ocean Currents
एन्सेलेडस (Enceladus) की सतह पर बर्फ की 20 किलोमीटर तक गहरी परत जमी हुई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


लंबवत धाराएं

यही आंतरिक गर्मी ऊपर की ओर संवहनीय धाराएं पैदा करती है जैसे कि पृथ्वी के महासागरों में होता है, जहां गर्म पानी ऊपर आता है जहां ठंडा होकर वह वापस नीचे चला जाता है. लेकिन एन्सेलेडस पृथ्वी से बहुत ही अलग है. पृथ्वी के महासागर औसतन 3.7 किलोमीटर ही गहरे हैं, जबकि एन्सेलेडस के महासागर 30 किलोमीटर गहरे हैं और उनके ऊपर 20 किलोमीटर की बर्फ की परत है.

चंद्रमा की लावा गुफाओं में घूमेंगे ESA के बनाए हुए गोलाकर रोबोट, जानिए क्यों

बर्फ की सतह के साक्ष्य

कैल्टेक की जियोफिजिसेस्ट ऐना लोबो की अगुआई में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि हम सीधे इन महासागरों को नहीं देख सकते, लेकिन बर्फ साक्ष्य मिलते हैं. अब हम जानते हैं एन्सेलेडस के ध्रुवों पर बर्फ भूमध्य रेखा की तुलना बहुत पतली है वहीं यह दक्षिणी ध्रुव पर ज्यादा पतली है जहां गीजर निकलते रहते हैं.

Space, Earth, Saturn, moon, Enceladus, Ocean, Ocean Currents
एन्सेलेडस (Enceladus) में महासागरीय जलधारा के सिस्टम का होना वहां जीवन के होने की उम्मीद जगाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


जटिल प्रक्रिया

इससे यह पता चलता है कि महासागरों की प्रक्रिया सरल लंबवत संवहन ही नहीं बल्कि थोड़ी जटिल है पतली बर्फ का संबंध ज्यादा बर्फ पिघलने से है और मोटी बर्फ का संबंध ज्यादा बर्फ के जमने से है. यानी मोटी बर्फ में महासागर ज्यादा लवणीय है क्यों केवल पानी जमता है और ज्यादातर लवण पानी में वापस घुल जाता है. इससे बर्फ के नीचे का पानी घना होता जाता है और नीचे बैठने लगता है. जहां बर्फ पतली होती है उल्टी प्रक्रिया होती है. पानी ताजा होता है और कम घना होता है इसलिए वह ऊपर ही रहता है.

नासा के हबल टेलीस्कोप ने शनि के विशाल वायुमंडल में देखे बड़े बदलाव

फिलहाल शोधकर्ताओं का एन्सेलेडस के और ज्यादा आंकड़ों की जरूरत है. अभी तक यह भी पता चल सका है कि वहां जीवन है भी या नहीं. इसके अलावा दुनिया की कोई भी स्पेस एजेंसी एन्सेलेडस कि ओर अपना कोई प्रोब भेजने की योजना नहीं बना रही है, लेकिन शनि के टाइटन, गुरू के यूरोपा जैसे कुछ मिशन से वैज्ञानिकों को काफी जानकारी मिलने की उम्मीद है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज