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    क्या कह रही हैं शनि के चंद्रमा टाइटन पर हो रही गतिविधियां

    शनि (Saturn) के चंद्रमा टाइटन (Titan) पर शोधकर्ताओं ने काफी सक्रिय गतिविधियां देखी है जिससे अब आने वाले समय में इस जगह पर अधिक शोध (Research) की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)
    शनि (Saturn) के चंद्रमा टाइटन (Titan) पर शोधकर्ताओं ने काफी सक्रिय गतिविधियां देखी है जिससे अब आने वाले समय में इस जगह पर अधिक शोध (Research) की जरूरत है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA)

    शनि (Saturn) के चंद्रमा टाइटन (Titan) पर शोधकर्ताओं ने काफी सक्रियता देखी गई है जिससे वहां अन्वेषण के लिए एक खास ड्रोन (Drone) भेजने की तैयारी चल रही है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 3, 2020, 4:57 PM IST
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    पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन की खोज पर बहुत से शोध हो रहे हैं. इसमें मंगल ग्रह, शुक्र ग्रह, और यहां तक कि हमारे सौरमंडल (Solar System) के बाहर के ग्रह यानि बाह्यग्रहों पर भी अध्ययन हो रहे हैं. दुनिया भर के स्पेस एजेंसी ऐसे शोधों में बहुत सा पैसा खर्च कर रहे है. अभी लोगों को ध्यान भले ही मंगल (Mars)पर हो, लेकिन एक शोध में शनि (Saturn) के चंद्रमा टाइटन (Titen) पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इसके एक अध्ययन से पता चला है कि यहां जीवन का समर्थन करने वाले घटक (Ingredients) मिले हैं.

    टाइटन पर भेजा जाएगा ड्रोन
    कैथरीन नीश उस अंतरराष्ट्रीय अभियान में एक अहम भूमिका निभा रही है जो साल 2027 में एक रोबोटिक ड्रोन शनि के चंद्रमा टाइटन पर भेजा जा रहा है. पिछल दो दशक से अंतरिक्ष अनुसंधान का ज्यादातर खर्चा मंगल पर हो रहा है वह भी वहां पर जीवन के संकेतों और घटकों की खोज के लिए. लेकिन हकीकत यह है कि शनि के टाइटन जैसे संसार भी हैं जहां मंगल से ज्यादा जैविक (Biological) सक्रियता नजर आती है.

    इस तकनीक से हुआ अन्वेषण
    हाल ही में नीश और उनके साथयों का अध्ययन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित हुआ है. कैथरीन वेस्टर्न इंस्टीट्यूट फॉर अर्थ एंड स्पेस एक्सप्लोरेशन (वेस्टर्न स्पेस) की सदस्य हैं जिन्होंने यूरोपीय स्पेस एजेंसी के साथियों के साथ मिलकर एडवांस इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर टाइटन का अन्वेषण किया है.



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    शनि (Saturn) ग्रह के चंद्रमा (Moon) टाइटन पर जीवन होने की सबसे अधिक संभावना बताई जा रही है. (तस्वीर: Pixabay)


    बहुत कुछ होता है टाइटन पर
    नीश और उनके साथियों ने पाया कि जब शनि के सबसे बड़े चंद्रमा पर क्रेटर बनते हैं. तब उनका टकराव का टाइटन के बर्फीली उपरी परत (Crust) से होता है जिसमें साफ बर्फ होती है. टाइटन पर वायुमंडलीय बाद के कारण बर्फ (Ice) रेत (Sand) के जैसे जैविक पदार्थ (organic material )की परत के नीचे दब जाती है. टाइटन के सूखे भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में यह रेत जमा हो जाती है, लेकिन ऊंचे और गीले इलाकों में सतह की नदियां या धाराएं इस रेत को अपरदन (Erosion) के जरिए हटा देती हैं.

    एक शक्तिशाली उपकरण की जरूरत
    टाइटन के धुंधले वायुमंडल के नीचे क्या है यह जानना मुश्किल काम है, बशर्ते हमारे पास लाखों डॉलर का एक विजिबल एंड इंफ्रारेड मैपिंग स्पैक्ट्रोमीटर न हो जैसे की ESA के पास है, जिसने नासा के कैसिनी मिशन के दौरान प्रकाश और इंफ्रारेड तरंगों का अवलोकन किया.

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    टाइटन की सक्रियता का मतलब
    नीश का कहना है कि यह काफी अजीब है, टाइटन जैसा इलाका हमारे सौरमंडल में कहीं नहीं है. एक क्षेत्र में रेत होने की दर टाइटन में कहीं और के मुकाबले कहीं ज्यादा है. वहां मौसम होते हैं. हां वहां के मौसम पृथ्वी की तरह नहीं होते, लेकिन वहां के घटक ही हैं जिनके साथ समस्या है. नीश ने बताया कि मीथेन की बारिश और नदियां वहां की सतहों में कटाव लाते हैं और जैविक रेत आसपास उड़ती है. यहां पृथ्वी की तरह ही सक्रियता है.

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    नासा (NASA) के कैसिनी (Cassini) सैटेलाइट ने टाइटन (Titan)ग्रह की खास तस्वीरें खींची थी जिनका यह अध्ययन हुआ (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    कितनी उपयोगी है यह पड़ताल
    यह पड़ताल टाइटन के क्रेटर के निचले हिस्सों में पुराने जमे हुए इकोसिस्टम को खोजने में मददगार हो सकती है. यह तब भी बहुत उपयोगी साबित होगा जब हम आने वाले दिनों में ड्रैगनफ्लाई ड्रोन मिशन को टाइटन से आंकड़े जमा करने और अवलोकन करने की तकनीकों को तैयार करेंगे.

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    नीश को लगता है कि टाइटन और अन्य पिंडों में अंतरिक्ष क्षेत्र के लोगों की दिलचस्पी तब और बढ़ेगी जब लोग मंगल से आगे सोचने की कोशिश करेंगे भले ही मंगल नासा और कनाडा की स्पेस एजेंजी का प्रमुख लक्ष्य बना रहे.
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