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जापान में स्कूल जाने वाले बच्चे क्यों कर रहे हैं इतनी ज्यादा आत्महत्याएं

शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए शासन को बेसिक शिक्षा परिषद ने एक रिपोर्ट भेजी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए शासन को बेसिक शिक्षा परिषद ने एक रिपोर्ट भेजी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

जापान (Japan) के स्कूली बच्चों (School Children) में साल 2020 में आत्महत्या (Suicide) करने वालों की संख्या में तेजी आई है. विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इसमें कोविड-19 महामारी (Covid -19 Pandemic) की कितनी भूमिका है.

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    जापान (Japan) न केवल एक संपन्न देश है बल्कि वह स्वस्थ्य देश भी है. जापान के लोगों को औसत उम्र दूसरे देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. जब साल 2020 में कोविड-19 (Covid-19) से दुनिया जूझ रही थी. उसी समय जापान के स्कूली बच्चों (School Children) की आत्महत्या (Suicide) के आंकड़ों ने वहां के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया. जापान के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर विद्यालयों के बच्चों में आत्महत्या की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई. विशेषज्ञ यह जानने में लगे हैं कि इन आत्महत्याओं में कोविड-19 की क्या और कितनी भूमिका है.

    एक चिंता का विषय है ये
    जापान में आत्महत्या एक अहम मुद्दा है. यहां कई सालों से स्कूली बच्चों की आत्महत्या चिंता का विषय बनी हुई है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक साल 2019 में 339 स्कूली बच्चों ने अपनी जान ली थी और उसके बाद साल 2020 में यह आंकड़ा 479 तक पहुंच गया जिससे अब यह जांच का विषय हो गया है कि कहीं इन बढ़ती आत्महत्याओं का कोविड-19 महामारी से संबंध तो नहीं था.

    लड़कियों की संख्या ज्यादा बढ़ी
    हैरानी की बात यह है कि इन आत्महत्याओं में लड़कियों की संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो कर 138 हो गई है. इन हालातों में मंत्रालय विस्तार से विश्लेषण करवा रहा है जिससे यह पता चल सके कि छात्र छात्राओं में आत्महत्या के बढ़ने का महामारी से कोई संबंध था या नहीं. ये आंकड़े हाल ही में एक विशेषज्ञों के एक पैनल ने एक मीटिंग में दिए हैं जो छात्रों में आत्महत्या रोकने पर ध्यान देता है.

    ऊंची कक्षाओं में ज्यादा बुरा हाल
    इन आंकड़ों से पता चला है कि प्राथमिक स्कूल के छात्रों में आत्महत्या करने वालों की संख्या 2020 में 14 हो गई जो उसके पिछले साल केवल 6 थी. लेकिन ऊंची कक्षाओं में यह आंकड़े बहुत चिंताजनक होते गए हैं. जूनियर हाई स्कूल में जहां यह संख्या 96 से 136 हो गई है, वहीं हाई स्कूल के छात्रों में यह 237 से 329 तक पहुंच गई.

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    कोविड महामारी (Covid-19 Pandemic) से पहले भी जापान में बच्चों की आत्महत्या चिंता का विषय रहा है. (तस्वीर: shutterstock)

    अगस्त में सबसे ज्यादा मामले
    इस मीटिंग में यह भी बताया गया कि सबसे ज्यादा आत्महत्या अगस्त के महीने में हुई जहां 64 बच्चों ने मौत को गले लगाया था. इनमें लड़कियों की संख्या इसमहीने के पिछले आंकड़े से 7 गुना बढ़ कर 23 तक पहुंच गई थी. पिछले साल 2020 में स्कूल ने दूसरी तिमाही को गर्मी की छुट्टियों के फौरन बाद सितंबर के बजाए पहले ही अगस्त में आगे कर दिया था जिससे अप्रैल और मई में हुए आपाताकाल की वजह से स्कूल बंद होने की वजह से हुए नुकासान की भरपाई हो सके.

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    इन कारणों पर चर्चा
    हैरान की बात यह है कि मीटिंग में आत्महत्याओं के जो प्रमुख कारण बताए गए वे वही थे जो इससे पहले के सालों में बताए गए थे. इनमें भविष्य को लेकर चिंताएं, पढ़ाई में खराब प्रदर्शन और अभिभावकों से खराब संबंध शामिल हैं. लेकिन यह भी पाया गया कि अवसाद और मानसिक व्याधियों की वजह से हो आत्महत्या के मामलों में इजाफा हुआ है.

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    आत्महत्या (Suicide) करने वालों में जापान (Japan) के स्कूल की लड़कियों (Girls) की संख्या ज्यादा है. (तस्वीर: shutterstock)

    कोरोना का भी असर
    अब एक विशेषज्ञों का पैनल इस बात की परिचर्चा हो की कि आखिर छात्रों में इन आत्महत्याओं के बढ़ने के कारण क्या हैं और किस तरह के उपायों के जरिए इन्हें रोका जा सकता है. इसी बीच पिछले साल नवंबर दिसंबर में हुए सर्वे से पता चला है कि 30 प्रतिशत बच्चों में कोरोना वायरस के कारण अवसाद के लक्षण पाए गए थे.

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    इस सर्वे में शामिल बच्चों ने अपने विचारों को लिख कर बताए तो पाया गया कि बच्चों में महामारी को लेकर बहुत आशंकाएं और तनावपूर्ण भाव थे.ऐसे में अविभावकों को बच्चों से उनकी भावनाएं साझा करने पर जोर देने की सलाह दी गई.

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