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Science: अरबों साल पहले आग का गोला थी धरती तो फिर कहां से आयी ऑक्सीजन

Science: अरबों साल पहले आग का गोला थी धरती तो फिर कहां से आयी ऑक्सीजन

धरती के वायुमंडल में ऑक्सीजन कहां से आया. नासा के इस रिपोर्ट से हुए अहम खुलासे.

धरती के वायुमंडल में ऑक्सीजन कहां से आया. नासा के इस रिपोर्ट से हुए अहम खुलासे.

Science: क्या Asteroids और Comets की बारिश की वजह से धरती पर ऑक्सीजन की उत्पति हुई? नासा के इस शोध के नतीजे से काफी कुछ साफ हो रहा है. इसका पता हाल में पहाड़ों के छोटे छोटे कणों पर हुए रिसर्च से चला. इसने धरती की उत्पति के साथ उस पर जीवन के विकासक्रम के बारे में भी काफी कुछ बताया. इसने ये भी बताया कि धरती कैसे रहने लायक हुई और लोग यहां पर सांस ले सकते थे.

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धरती पर जीवन कैसे पनपा? यहां आक्सीजन कैसे आयी? क्या ब्रह्मांड में अन्य ग्रहों पर जीवन है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिस पर सदियों से शोध चल रहा है. अब तक के शोध से यह स्पष्ट हो चुका है कि करीब 4.6 अरब साल पहले एक भीषण विस्फोट के नतीजे के रूप में धरती और अन्य ग्रहों का जन्म हुआ. उस वक्त धरती आग के एक गोले के समान थी, जो धीरे-धीरे ठंडी होती गई और फिर यहां पर जीवन की उत्पति हुई.

लेकिन यही सबसे बड़ा सवाल है कि धरती के ठंडा होने के बाद यहां पर जीवन के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन और पानी कहां से आया? अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने हालिया शोध में इस सवाल का जवाब दिया है.

क्षुद्रग्रहों की हुई थी बारिश
स्पेस डॉट काम वेबसाइट के मुताबिक अरबों साल पहले धरती से बड़ी संख्या में और लगातार अंतरिक्ष के चट्टान टकराते थे. ये चट्टान कुछ और नहीं बल्कि क्षुद्रग्रह (Asteroids) और पुच्छल तारे (comets) थे. इन्हीं क्षुद्रग्रहों और पुच्छल तारों ने धरती पर वायुमंडल का निर्माण किया और उसमें ऑक्सीजन भरा.

रिपोर्ट के मुताबिक जब करीब 4.6 अरब साल पहले धरती का निर्माण हुआ तो उसके पास कोई वायुमंडल नहीं था. जैसे-जैसे धरती ठंड़ी होती गई वैसे-वैसे वायुमंडल का निर्माण होते गया. लेकिन शुरुआत में इस वायुमंडल में मुख्यरूप से कार्बनडाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन गैस था.

जीवन की कल्पना असंभव थी
ऐसे इन गैसों के रहते जीवन की कल्पना असंभव थी. लेकिन अचानक से धरती के सतह की केमिस्ट्री बदल गई और यहां ऑक्सीजन की मात्रा काफी बढ़ गई. इस पूरी प्रक्रिया को हम Great Oxidation Event (GOE) कहते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक 2.5 से चार अरब साल पहले धरती पर एक तरह से क्षुद्रग्रहों और पुच्छल तारों की बारिश होती थी. इनमें से कुछ चट्टानों का आकार करीब 10 किमी तक का था. इन्हीं चट्टानों ने शुरुआत में धरती के सतह की कमिस्ट्री को प्रभावित किया और ऑक्सीजन की उत्पति शुरू हुई.

नहीं था धरती का कोई वायुमंडल
इस ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले हम जितना सोचते थे उससे कहीं ज्यादा तेज गति से इन क्षुद्रग्रहों और पुच्छल तारों की बारिश हुई. यह शोध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थ एंड प्लानेट्री साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर नदजा द्राबोन (Nadja Drabon) के नेतृत्व में किया गया. वह इस अध्ययन के सह-लेखक हैं. उनका कहा है कि किसी भी जीव के लिए ऑक्सीजन जरूरी है. वायुमंडल में ऑक्सीजन न होने पर पूरी सृष्टि खत्म हो जाएगी.

रिपोर्ट के मुताबिक क्षुद्रग्रह या पुच्छल तारे धरती से टकराए तो इससे भाप का गुब्बारा पैदा हुआ. इसके बाद इसमें से कुछ भाप से भरे पहाड़ संकुचित होने लगे और वे फिर से धरती पर गिर गए. इस कारण उसने रेत जैसे कणों के निर्माण किए.

दरअसल, अभी तक वैज्ञानिक पहाड़ों के इन छोटे-छोटे कणों की उत्पति के बारे में अध्ययन नहीं कर पाए थे. शोधकर्ताओं ने पहाड़ों के इन छोटे-छोटे कणों का अध्ययन किया. इसी से धरती की उत्पति के रहस्य के बारे में काफी कुछ पता चला.

Tags: Earth, Nasa, Nasa study, Oxygen

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