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कोरोनावायरस की ही तरह प्लेग के दौरान घर बैठकर न्यूटन ने कर डाली थी ये बड़ी खोज

News18Hindi
Updated: March 21, 2020, 5:23 PM IST
कोरोनावायरस की ही तरह प्लेग के दौरान घर बैठकर न्यूटन ने कर डाली थी ये बड़ी खोज
घर लौटे हुए न्यूटन ने होम क्वेरेंटाइन के इसी दौर में कई अहम खोजें कीं

आइजैक न्यूटन (Isaac Newton) के वक्त उस महामारी (pandemic) ने 1 लाख से ज्यादा जानें ली थीं, जो लंदन (London) की आबादी का एक चौथाई हिस्सा थी.

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  • Last Updated: March 21, 2020, 5:23 PM IST
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फिलहाल ट्रिनिटी कॉलेज (Trinity College), जहां न्यूटन ने पढ़ाई की थी, बंद हो चुका है और सारे स्टूडेंट्स घर लौट चुके हैं.

कोविड-19 (Covid-19) का आंकड़ा अब 2 लाख 80 हजार पार कर चुका है. चीन से होकर फैली ये महामारी सारी दुनिया में कोहराम मचा रही है, जिसकी चपेट में ब्रिटेन भी आ चुका है. ऐसे में यहां भी सीमाबंदी और यूनिवर्सिटीज अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं, इनमें कैंब्रिज की ट्रिनिटी यूनिवर्सिटी भी शामिल है. ये वही यूनिवर्सिटी है जहां महान गणितज्ञ आइजैक न्यूटन (Isaac Newton) ने पढ़ाई की थी. न्यूटन के दौर में भी भी कोरोना की ही तरह एक महामारी फैली थी, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. उस बीमारी का नाम था ग्रेट प्लेग (Great Plague). साल 1665 से पूरे साल चली इस महामारी ने 1 लाख से ज्यादा जानें ली थीं. उस वक्त ये आबादी पूरे लंदन की आबादी का एक चौथाई हिस्सा थी.

जिस दौरान लंदन प्लेग की महामारी से जूझ रहा था, तभी यूनिवर्सिटी ने भी अपने स्टूडेंट्स को घर भेज दिया ताकि वे इसके संक्रमण से सुरक्षित रह सकें. तब न्यूटन की उम्र महज 20 साल थी. घर लौटे हुए न्यूटन ने होम क्वेरेंटाइन के इसी दौर में कई अहम खोजें कीं, जिसने विज्ञान की दुनिया को अहम दिशा दी.

इस महामारी ने 1 लाख से ज्यादा जानें ली थीं




वॉशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर बताती है कि ब्रिटेन में प्लेग महामारी फैलने पर जो उपाय अपनाए गए, वे उन तरीकों से बहुत मिलते-जुलते हैं जो आज कोविड-19 के मामले में अपनाए जा रहे हैं. इन्हीं में से एक तरीका था सोशल डिस्टेंसिंग या आइसोलेशन. इसी वक्त न्यूटन भी दूसरे बच्चों की तरह अपने घर Woolsthorpe Manor में थे. उस पूरे साल के दौरान, जब न्यूटन कॉलेज की बजाए अपने घर पर रहे, लगातार कई शोध करते थे. माना जाता है कि उसी दौर में इस महान गणितज्ञ और भौतकिशास्त्री ने कई ऐसे पेपर लिखे जो प्रकाश (optics) के संबंध में एक नई दिशा देते थे.

यह वो समय था जब उन्होंने गुरुत्वाकर्षण और गति के सिद्धांतों पर काम किया. रिपोर्ट के अनुसार, न्यूटन के सहायक John Conduitt ने बताया था कि इसी समय में उन्होंने अपने गार्डन में टहलते हुए गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचा था कि इसकी ताकत धरती से एक निश्चित दूरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि काफी ऊपर तक चंद्रमा तक जानी चाहिए. अप्रैल 1667 में न्यूटन कैंब्रिज लौटे और छह महीने बाद ही वे ट्रिनिटी कॉलेज के फैलो चुने गए.

उन्होंने अपने गार्डन में टहलते हुए गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचा था


कितनी भयावह थी बीमारी
16वीं सदी में ब्रिटेन में फैली इस बीमारी को Great Plague of London के नाम से जाना जाता है. Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली इस बीमारी का वाहक पिस्सू होता था. संक्रमित चूहे को काटने पर ये बैक्टीरिया पिस्सुओं में चला जाता था और वहां से इंसानों तक पहुंचता था.

हालांकि उस वक्त आबादी को आंकने के लिए कोई प्रामाणिक सेंसस नहीं थी लेकिन माना जाता है कि इस बीमारी ने एक चौथाई आबादी को लील लिया. वैसे माना जाता है कि लंदन में प्लेग की शुरुआत 13वीं सदी से ही हो गई थी जब चीन और दूसरे हिस्सों में Black Death का प्रकोप हुआ था. बाद में 15वीं सदी के आखिर-आखिर तक यहां भी इसके प्रमाण दिखने लगे. साल 1563 में में हर हफ्ते लगभग 1 हजार लोग मारे गए. धीरे-धीरे संख्या बढ़ने लगी और यहां तक कि लाशों का निस्तारण मुश्किल हो गया. लाशें गिनने और उनकी अंतिम क्रिया के लिए ऐसे लोगों को चुना गया, जो अनस्किल्ड लेबर श्रेणी से थे और कई बार मौत की वजह नहीं समझ पाते थे. ऐसी कई वजहें हैं जिनके कारण अब भी यहां प्लेग से हुई मौतों के असल आंकड़े under-report माने जाते हैं.

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First published: March 21, 2020, 5:22 PM IST
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