अब वैज्ञानिकों ने भी माना, तारों की धूल से मिला ब्रह्माण्ड को जीवन का स्रोत

वैज्ञानिकों का कहना है कि तारों मरने केबाद मरे सफेद ड्वार्फ ही जीवन का स्रोत रहे (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वैज्ञानिकों का कहना है कि तारों मरने केबाद मरे सफेद ड्वार्फ ही जीवन का स्रोत रहे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने ताजा अध्ययन से पाया कि जीवन (Life) का प्रमुख स्रोत (Source) कार्बन (Carbon) तारों (Stars) के जीवन चक्र की एक अहम प्रक्रिया से ब्रह्माण्डd (universe) में आया है.

  • Share this:
हमारे वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से ही दो सवालों में हमेशा ही दिलचस्पी रही है. पहला ब्रह्माण्ड (Universe) का जन्म कैसे हुआ और दूसरी जीवन कैसे अस्तित्व (Existence) में आया. यूं तो जीवन के आने को लेकर दुनिया में कई मत और धारणाएं हैं, लेकिन इसमें वैज्ञानिकों के बीच भी अनेक मत प्रचलित हैं. लेकिन हाल ही में एक अध्ययन में पता लगा है कि जीवन की स्रोत (Source) क्या था.

कार्बन की जीवन में अहमियत
इस शोध में खगोलविदों ने माना है कि समस्त जीवन का आधार कार्बन है. इसी को मानकर शोधकर्ताओं ने कार्बन के स्रोत की खोज की बात की है. इस मूल अवधारणा को ध्यान में रख कर हाल ही में नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित एक अध्ययन में खगोलविदों ने दावा किया है कि ब्रह्माण्ड में जीवन के समस्त स्रोत सफेद ड्वार्फ (White Dwarf) हैं.

तारों के जीवन चक्र की भूमिका
सभी तारों की एक उम्र होती है. यानि वे पैदा होते हैं और मरते  हैं. जब वे मरते हैं, तब एक बहुत ही विशाल विस्फोट होता है जिसे सुपरनोवा कहते हैं. लेकिन उससे पहले जब तारों का ईधन खत्म हो जाता है तो वे अपने ही गुरुत्व के कारण सिमट जाते हैं. इसके बाद ही विशाल विस्फोट होता है. लेकिन इनमें से कुछ तारों में विस्फोट नहीं होता और वे ब्लैकहोल बन जाते हैं.



क्या होते हैं सफदे ड्वार्फ
तारों का केंद्र या कोर (Core) जिसे ड्वार्फ कहा जाता है. ज्यादातर तारे जब वे अपना जीवन चक्र पूरा कर लेते हैं तब सफेद ड्वार्फ बन जाते हैं जिन्हें उनके तारे का केंद्र या कोर कहा जाता था. अब खगोलविदों का दावा है कि जीवन के सभी रूपों में प्रमुख तत्व कोर के ही पदार्थ हैं. इस कोर में कार्बन पदार्थ होते हैं ब्रह्माण्ड के 90 प्रतिशत तारे अंततः सफेद ड्वार्फ में बदल जाते हैं.

Black Hole
तारे के मरने के बाद या तो वह ड्वार्फ हो जाता है या फिर ब्लैकहोल (प्रतीकात्मक फोटो: रायटर्स)


कैसे बनता जाता है कार्बन
ड्वार्फ का तापमान बहुत ही ज्यादा होता है. करीब एक लाख डिग्री जितना गर्म. अरबों साल तक तारे ठंडे होते हैं और उनकी चमक कम होती चली जाती है, जब तक कि केवल कोर या केंद्र बचा रह जाता है. इसके अलावा बाकी हिस्सा जो इससे निकल जाता है उसमें कार्बन होता है जो ब्रह्माण्ड में चौथा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला पदार्थ है. कार्बन के बिना कोई जीवन संभव नहीं हैं और ब्रह्माण्ड का समस्त कार्बन तारों से ही निकला है.

अचानक गायब हो गया बहुत बड़ा तारा, वैज्ञानिक हुए परेशान, कैसे हुआ ये 

इन तारों का किया अध्ययन
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के तारों का ड्वार्फ बनने और उसके बाद उनकी अवस्था का अध्ययन किया जितना बड़ा तारा था उतना ही बड़ा उसका ड्वार्फ था. लेकिन वैज्ञिनिकों ने पाया कि कोर यानि कि ड्वार्फ का भार जितना पहले सोचा गया था उससे कहीं ज्यादा था.

Stars
सफेद ड्वार्फ ब्रह्माण्ड के 90 प्रतिशत तारों से बने हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)(प्रतीकात्मक तस्वीर)


सभी तारों का नहीं था योगदान
इस अध्ययन के आधार पर खगोलविदों ने यह पाया कि जो तारे हमारे सूर्य के दोगुने या उससे ज्यादा भार के हैं. उन्होंने ब्रह्माण्ड में कार्बन फैलाने में ज्यादा भूमिका निभाई है जबकि सूर्य से डेढ़ गुना या उससे कम भार वाले तारों ने उतनी नहीं. उनके अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि कार्बन पिछले 4.6 सालों ने ब्रह्माण्ड में जमा हो रहा है जब हमारा सौरमंडल बन रहा था.

हमारे सौरमंडल के ग्रहों पर कितनी देर जिंदा रह पाएगा इंसान और क्यों?

इस शोध से यह तो पता चला कि ब्रह्माण्ड में कार्बन कहां से आया, लेकिन यह शोध इस बारे में वैज्ञानिकों की मदद नहीं कर सकता है कि पृथ्वी पर जीवन कहां से आया. फिलहाल कई वैज्ञानिकों का यही मत है. एक समय पृथ्वी पर बड़ी संख्या में उल्कापिंड गिरे थे. संभव है पृथ्वी पर कार्बन उन्हीं की वजह से इतना ज्यादा बढ़ा हो और जीवन के लिये शुरुआती रसायन भी वहीं से आए हों. लेकिन अभी तक इस मत को प्रमाणित नहीं किया जा सका है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज