केवल 4 Genes डालकर बना दिया रोशनी वाला पौधा, जानिए कैसे हुआ यह कमाल

एक चमकने वाला पौधा बनाना आसान काम नहीं होता, लेकिन इस तकनीक ने उम्मीद जगाई है.
एक चमकने वाला पौधा बनाना आसान काम नहीं होता, लेकिन इस तकनीक ने उम्मीद जगाई है.

वैज्ञानिकों ने एक पौधे में चमकीली रोशनी पैदा करने वाली जीन (Gene) डाल कर पौधों को रोशनी देने वाला (luminescent) बनाने में सफलता पाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2020, 10:10 PM IST
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नई दिल्ली: चमकते पौधे (Glowing) एक अलग ही रुचि पैदा करते हैं, कई लोगों की ख्वाहिश होती है कि उनके बगीचे के पौधे भी रोशनी फैलाने वाले हों. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस ख्वाब को हकीकत में बदल दिया है.

कया है यह शोध
कई प्रयोगों के बाद वैज्ञानिकों ने यह अभूतपूर्व सफलता पाई है. नेचर बयोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार अब पौधों में जेनिक परिवर्तन कर उनमें एक स्वयं की चमक डाली जा सकेगी. इसके लिए वैज्ञानिकों ने बायल्यूमिनेसेंट मशरूम (bioluminescent mushrooms) का डीएनए निकाला और एक तम्बाखू के पौधे में डाल दिया. इस तकनीसे से वे चमकते हुए पौधे उगाने में  सफल हुए.

कैसे किया यह काम. अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों नें नियोनोथोपानस नाम्बी (Neonothopanus nambi) नाम के इस खास मशरूम से चार जीन्स अलग किए और तम्बाखू के पौधे के DNA में डाल दिए. ये जीन कैफेइक एसिड को ल्यूसिफेरिन में बदलने में मदद करते हैं जो प्रकाश ऊर्जा को उत्सर्जित करते हैं.
वैज्ञानिकों ने पौथों के DNA में चार जीन डाले.




तम्बाखू के पौधे ही क्यों
यह शोध रशियन ऐकेडमी ऑफ साइंस के करेन सर्किसयान और इलिया यामपोलोस्की ने किया है. उन्होंने तम्बाखू के पौधों का चयन इसलिए किया क्योंकि ये पौधे जनेटिक रूप से सरस हैं और जल्दी ऊग आते हैं. यह खोज वनस्पतिशास्त्रियों के लिए क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है. वे पौधों की कार्यप्रणाली को समझने में इस शोध का उपयोग कर सकते हैं

भविष्य में उपयोगी हो सकती है यह तकनीक
इस तकनीक के बारे में बात करते हुए करेन ने कहा, “भविष्य में इस तकनीक का उपयोग पौधे के ऊतकों में अलग अलग हारमोन की गतिविधियों को समझने के लिए किया जा सकता है. इससे पौधों की विभिन्न वातावरणों में तनाव और बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया को भी समझने में मदद मिल सकती है.

बहुत से जीवों में होती है चमकने की क्षमता
बहुत से पशु, सूक्ष्मजीव, और मशरूम ऐसे हैं जो चमकते हैं. इसमें जुगनू से लेकर हनी फफूंद भी शामिल हैं. इस तकनीक को बायोल्यूमिनिसेंस (bioluminescence) कहा जाता है. ऐसा तब होता है जब एंजाइम लूसीफेरिन पर क्रिया करते हैं. यह प्रक्रिया पौधों में स्वाभाविक नहीं होती है.

पहली बार नहीं हुई है ऐसी कोशिश
इस तरह का प्रयास पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भी अंधेरे में रोशनी फैलाने वाले पौधे बनाने की कोशिश की गई थी. इसके लिए उन्होंने बैक्टीरिया DNA पर प्रयोग किया था. इस बार वैज्ञानिकों ने 10 गुना ज्यादा चमकीला पौधा पैदा करने में सफलता पाई है. अब तक शोध कर्ता लूसिफेरिन और एंजाइम दोनों को पैदा करने कि कोशिश करते थे. जिससे पौधे चमक पैदा कर सकें. इसके अलावा बैक्टीरिया जीन्स का उपयोग कर भी पौधे को चमक पैदा करने वाला बनाने की कोशिश हुई थी.

क्या अलग है पुरानी और नई तकनीक में
इन तरीकों में एक परेशानी थी. जहां छोटे कणों में ल्यूसिफेरिन डालना बहुत महंगा होता था वहीं बैक्टीरीया से चमक पैदा करने वाले जीन्स डालना एक जटिल प्रक्रिया थी और उससे बहुत ही कम चमक आती थी. बैक्टरिया से जीन्स डालने पौधों के लिए जहरीला भी हो सकता है. लेकिन इस बार कुछ अलग ही हुआ है. इस बार शोधकर्ताओं ने ल्यूसिफिरेन ऐसे रसायन से पैदा किया है जो पौधों में पहले से ही होता है और वह है कोफेइक ऐसिड.

बाजार में दिख सकते हैं चमकते हुए पौधे
शोधकर्ताओं के मुताबिक वे इस खोज को कुछ सालों में बाजार में लाने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी कोशिश है कि इस तकनीक से वे ज्यादा रोशनी वाले, एक खास सजावट वाले पौधे बना लें. इसके साथ ही वे उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी तकनीक सुरक्षा नियामक नियमों पर खरा उतर सकेगी.

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