वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे चमकीला सुपरनोवा, जानिए क्यों खास है यह

मुक्त गिरावट का सौर्वभौमिक सिद्धांत का अंतरिक्ष में उदाहरण पहली बार देखने को मिला.
मुक्त गिरावट का सौर्वभौमिक सिद्धांत का अंतरिक्ष में उदाहरण पहली बार देखने को मिला.

वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे चमकदार सुपरनोवा (supernova) को देखा है. उनका मानना है कि यह सुपरनोवा उन्हें तारे (Stars) की जीवन प्रक्रियाओं को समझने और उनके बारे में विस्तार से जानने में बहुत ज्यादा मददगार हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2020, 2:44 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली:  अंतरिक्ष (Space) की घटनाओं पर आजकल वैज्ञानिकों की पैनी नजरें रहती हैं. हर नई घटना को वैज्ञानिकगण खास मौके की तरह देखते हैं जिससे वे ब्रह्माण्ड (Universe) की उत्पत्ति सहित अनेक रहस्यों की जानने की संभावना होती है. ऐसी ही एक घटना के तौर पर वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे चमकीले सुपरनोवा (Supernova) को देखा है.

क्या होता है सुपरनोवा
तारे के नष्ट होने की प्रक्रिया के अंतिम समय में हुए शक्तिशाली विस्फोट को कहा जाता है. इनकी अथाह चमक इन्हें खास बनाती है. बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की अगुआई में एस्ट्रोनॉर्म्स की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने  हाल ही में अब तक के देख गए सबसे चमकदार सुपरनोवा से भी दोगुना चमकदार और ऊर्जावान सुपरनोवा देखा है.

क्या खास है इस सुपरनोवा में
इस अनूठी खोज के बारे में जानकारी नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुई है. इस नए सुपरनोवा को SN2016aps नाम दिया गया है. बताया जा रहा है कि यह बहुत ही कम पल्सेश्नल पेयर इस्टेबिलिटी सुपरनोवा का उदाहरण हैं. माना जाता है कियह विस्फोट से पहले दो बहुत बड़े तारों के टकराकर मिलने से बनता है. इस तरह की घटनाओं की अभी तक अंतरीक्षीय अवलोकन से पुष्टि नहीं हो सकी है.



Universe
सुपरनोवा आमतौर पर गैलेक्सी के बीच नजर आते हैं, लेकिन यह नया अति चमकीला सुपरनोवा अलग है.


किस तरह से अलग है यह दूसरे सुपरनोवा से
इसअध्ययन केप्रमुख शोधकर्ता डॉ मैट निकोल ने कहा, “ दो तरह से सुपरनोवा को मापा जा सकता है. एक तो विस्फोट की पूर्ण ऊर्जा से और दूसरे उससे निकले प्रकाश या विकिरण की ऊर्जा को नाप कर. आमतौर पर सुपरनोवा में विकिरण कुल ऊर्जा का एकप्रतिशत से भी कम होता है.लेकिन इस सुपरनावा का विकिरण आम सुपरनोवा से पांच गुना ज्यादा था. यह अब तक के देखे गए सुपरनोवा में सबसे चमकदार है.

हो सका इस सुपरनोवा में ऐसा
ज्यादा चमकदार होने के लिए विस्फोट में बहुत ज्यादा ऊर्जा होनी चाहिए. लाइट स्पैक्ट्रम का मुआयना करने के बाद यह पाया कि विस्फोट सुपरनोवा और बरसों पहले एक अन्य तारे से छूटे एक बहुत विशालकाय गैस के गोले के बीच हुई टकराहट से हुआ था. और इसी वजह से यह इतना ज्यादा शक्तिशाली हो पाया होगा.

क्या अहमियत है इसकी
इस अध्ययन में शामिल डॉ पीटर ब्लैंचर्ड ने कहा, “आमतौर पर रोज रात को बहुत से सुपरनोवा खोजे जाते हैं और इनमें से बहुते से बहुत विशाल गैलेक्सी में होते हैं. यह वाकई अन्य सुपरनोवा से बहुत अलग है. अमूमन हम उस गैलेक्सी को नहीं देखा पाते जिसमें सुपरनोवा का प्रकाश क्षीण होने के बाद नए तारे का जन्म होता है. इसका मतलब है इस सुपरनोवा को हम बहुत अच्छे से अवलोकन कर सकते हैं "

Space Telescope
अंतरिक्ष में स्थित टेली स्कोप भी वैज्ञानिकों की शोध में मदद कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पिछले 50 साल से इस प्रक्रिया के शोध में लगे हैं वैज्ञानिक
डॉ निकोल ने समझाया, ” अति विशालकाय तारों में समाप्त होने से पहले प्रचंड स्पंदन (pulsation) होता है, यानि वे तेजी से फैलते और सिकुड़ते हैं. यह पेयर इंस्टेबिलिटी नाम की प्रक्रिया  के कारण होता है. यही प्रक्रिया वैज्ञानिकों के लिए पिछले 50 सालों से शोध का विषय है.”

एक बहुत अच्छा मौका मिला है अध्ययन का
डॉ निकोल का कहना है कि यदि सुपरनोवा का समय ठीक रहा तो वे (गैसीय) शेल (गोले) को पकड़ सकते हैं और टकराहट से बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा छोड़ते हैं. हमें लगता है कि हमारे पास इस प्रक्रिया का अध्ययन करने का सबसे अच्छा मौका है.“

तो क्या नया है इसमें
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक अहम खोज है. अब हम जानते हैं कि इस तरह के अतिविशालकाय विस्फोट अंतरिक्ष में हो सकते हैं. इससे हमें तारें की जीवन प्रक्रिया को समझने में बहुत ज्यादा मिल सकते हैं और हमें एक अभूतपर्व घटना या प्रक्रिया भी तो देखने को मिली है.

खगोलीय घटनाओं का अध्ययन पृथ्वी से ही करना आसान काम नहीं है.


वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि अब जब अंतरिक्ष में ही हमारे पास शक्तिशाली टेली स्कोप हैं तो इस तरह की और घटनाएं भी अध्ययन की जा सकेंगी.

यह भी पढ़ें:

Universe की शुरुआत में एक छोटी से हलचल से पैदा हुए थे बहुत से Black holes: शोध

भविष्य में बहुत तेजी से तैयार हो जाएंगी वैक्सीन, सुपर कम्प्यूटर करेंगें मदद

मंगल से मिट्टी के नमूने लाने की योजना, कोरोना वायरस का इस पर भी हो रहा है असर
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज