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समुद्र के नीचे गहरी चट्टानों में मिले Bacteria, मंगल पर जीवन की जगी आस

समुद्र के नीचे गहरी चट्टानों में मिले Bacteria, मंगल पर जीवन की जगी आस

मंगल पर यह नया शोध जीवन की संभावना को लेकर निराशा पैदा करता है.

मंगल पर यह नया शोध जीवन की संभावना को लेकर निराशा पैदा करता है.

वैज्ञानिकों को समुद्र के 9 मील नीचे चट्टानों में सूक्ष्मजीवन (Microbial Life) मिला है. इससे मंगल (Mars) पर जीवन होने की संभावनाओं की उम्मीद जाग गई है, जहां पृथ्वी जैसे जीवन के अनुकूल हालात नहीं हैं.

नई दिल्ली: वैज्ञानिक हमेशा से ही पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन की संभावनाओं की तलाश करते रहते हैं. उनका जीवन की उत्पत्ति के बारे में गहन शोध अब भी जारी है. उन्हें विश्वास है कि पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रह भी हैं जिनमें जीवन हो सकता है. इस मामले में उन्हें मंगल ग्रह (Mars) से बहुत उम्मीद है. हाल ही में उन्हें पृथ्वी पर ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनसे मंगल ग्रह पर जीवन होने की उम्मीद बंधी है.

पृथ्वी जैसे हालात चाहिए जीवन के लिए
 वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है पृथ्वी जैसा जीवन के अनुकूल होने का वातावरण जो उन्हें पृथ्वी के अलावा कहीं नहीं मिलता. लेकिन इसके बाद भी उन्हें मंगल पर ऐसे हालात मिलते हैं कि वहां या तो पृथ्वी जैसा वातावरण जिसमें प्रचुर मात्रा में पानी का होना भी शामिल है, रहे होंगे या फिर बन सकते हैं. ताजा खोज इस मंगल पर आज भी जीवन होनी की संभावनाओं को बहुत बल देती है.

पृथ्वी पर समुद्र की गहराइयों में मिला जीवन
हाल ही में नेचर में प्रकाशित शोध के मुताबिक वैज्ञानिकों ने हाल ही  में समुद्र की गहराइयों में चट्टानों के नीचे प्रचुर मात्रा में बैक्टरिया  के होने का प्रमाण पाया है.  ये समुद्र के नीचे स्थित आग्नेय शैल (Volcanic Rocks) की दरारों में पाए गए हैं. कम्यूनिकेशन्स बायोलॉडी जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने अरबों की संख्या में  समुद्री की सतह के 9 मील नीचे तक ये बैक्टीरिया खोजे हैं.

Earth, Life on Earth
पृथ्वी की तरह जीवन के अनुकूल परिस्थितियां किसी दूसरे ग्रह पर नहीं हैं.


यहां सूर्य की रोशनी पहुंचना है नामुमकिन फिर भी जीवन
समुद्रतल में पानी की गहराई करीब 300 फीट तक ही है.  जहां सूर्य की रोशनी पहुंचना नामुमकिन है.  इससे वैज्ञानिकों में इस बात की उम्मद जागी है कि इसी तरह से  मंगल ग्रह पर भी चट्टानों की दरारों में  सतह के नीचे बहुत से सूक्ष्म जीवों का घर हो सकता है

करोड़ों साल पुराने पत्थरों पर किया शोध
.टोक्यो यूनिवर्सिटी के जियोमाइक्रोबायोलॉजिस्ट योहे सुजुकी एक दशक से गहरे समुद्र के वॉल्केनिक पत्थरों का अध्ययन कर रहे हैं. सुजुकी और उनके साथियों ने समुद्री तल पर पाये गए बेसाल्टिक लावा के 300 फीट नीचे तक के नमूनों का अध्ययन किया. ये पत्थर करीब 33 से 104 मिलियन वर्ष पुराने हैं.

कैसे पनप गए यहां बैक्टीरिया
उनकेशोध ने उन्हें चट्टानों की दरारों में  एकल कोशीय सूक्ष्म जीवन (Single Cell Microbial life) मिले हैं. इन चट्टानों में लोहा और मिट्टी की प्रचुर मात्रा है.शोधकर्ताओं का मानना है कि मिट्टी में लोहे के तत्व होने से बैटक्टीरिया समुदाय को पनपने में मदद मिली.

Curiosity Rover Spots Unexplained Oxygen Spike on Mars - NASA
मंगल पर क्यूरियोसिटी रोवर लगातार चक्कर लगा रहा है. (फोटो:NASA)


तो क्या मंगल पर हो सकता है जीवन
सुजुकी ने कहा कि जब उन्हें यहां सूक्ष्म जीवन मिला तब ऐसा लगा कि उनका कोई सपना पूरा हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वे शायद ज्यादा उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इससे मंगल ग्रह पर जीवन मिलने में मदद मिल सकती है.

क्या खास बात है इन बैक्टीरिया की
शोध के अनुसार जो बैक्टीरिया पाए गए हैं वे मानवीय कोशिकाओं की तरह ही उर्जा बनाते हैं. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो ऑक्सीजन वाले ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट्स पर निर्भर करती है. सुजुकी की मंगल ग्रह पर जीवन तलाशने वाली बात उन्होंने मजाक में नहीं कही थी. पाए गए बैक्टीरिया बिना ऑक्सीजन और बिना सूर्य की रोशनी में पनपे हैं. मंगल पर भी यही हालात हैं.

और फिर यह भी तो
मंगल ग्रह पर तापमान और तापांतर काफी ज्यादा होता है. उस ग्रह के लाल रंगके होने के कारण माना जाता है कि ऐसा वहां की लाल मिट्टी  के कारण होगा जिसमें लोहे का मात्रा ज्यादा होती है. सुजुकी को मिले बैक्टीरिया भी ज्यादा मिट्टी और लोहे की प्रचुरता वाली चट्टान में मिले हैं.

Space
नासा मंगल पर इंसान भेजने की तैयारी कर रहा है.


क्यों मंगल से है वैज्ञानिकों को इतनी उम्मीद
वैज्ञानिकों की जीवन की संभावनाओं को लेकर मंगल ग्रह में बहुत ही ज्यादा दिलचस्पी है. हाल ही में एक शोध में पाया गया था कि  प्राचीनतम मंगल ग्रह की जमीन के नीचे पानी के दो अलग अगल बड़े स्रोत रहे होंगे. अभी तक पाए ग्रहों में केवल मंगल ग्रह ही है जो आकार, सूर्य से दूसरी और अन्य कुछ मामलों में पृथ्वी से मिलता जुलता है. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि हो सकता है कि काफी समय पहले मंगल पर जीवन रहा भी हो.

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Tags: Corona, Corona Virus, Coronavirus, Mars, Science, Space

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