पहली बार मिले क्षुद्रग्रह की सतह पर पानी और जैविक पदार्थ के प्रमाण

इटोकावा नाम के क्षुद्रग्रह (Asteroid) से साल 2010 में नमूने लिए गए थे. (तस्वीर: JAXA)

इटोकावा नाम के क्षुद्रग्रह (Asteroid) से साल 2010 में नमूने लिए गए थे. (तस्वीर: JAXA)

साल 2010 में जापानी यान हायाबुसा के लाए क्षुद्रग्रह (Asteroid) के नमूने के ताजा अध्ययन से उसकी सतह पर पानी (Water) और जैविक पदार्थ (Organic Matter) की मौजूदगी के प्रत्यक्ष प्रमाण मिले हैं.

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क्या पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) और जीवन किसी क्षुद्रग्रह (Asteroid) से आया था. वैज्ञानिक अभी तक इस सवाल के जवाब के लिए पुष्ट प्रमाण खोज रहे हैं. यही वजह है कि पृथ्वी के पास से गुजरने वाले ही नहीं बल्कि सुदूर क्षुद्रग्रहों के अध्ययन को भी वे बहुत अहमियत दे रहे हैं. ऐसे ही एक क्षुद्रग्रह अध्ययन से वैज्ञानिकों ने अभूतपूर्व खोज करते हुए पहली बार किसी क्षुद्रग्रह पर पानी और जैविक पदार्थ (Organic Matter) के होने के प्रत्यक्ष प्रमाण हासिल किए हैं. जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा (JAXA) ने इटोकावा नाम के क्षुद्रग्रह की सतह पर ये प्रमाण पाए हैं.

दस साल पहले लाए गए थे नमूने
साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने साल 2010 में जाक्सा के हायाबुसा अभियान से इटोकावा से लाए गए नमूनों का गहराई से शोध किया. इस अध्ययन में पहली बार क्षुद्रग्रह की सतह पर जीवन के अवयव पाए जाने के प्रमाण मिले हैं. यह पड़ताल पृथ्वी के इतिहास के अध्ययन के लिहाज बहुत अहम मानी जा रही है.

हैरानी की बात
अभी तक वैज्ञानिकों का ध्यान कार्बन सम्पन्न C टाइप के क्षुद्रग्रह पर ज्यादा रहता था. लेकिन S टाइप के क्षुद्रग्रह की सतह पर ऐसे प्रमाण पाया जाना हैरानी की बात है. अब यह बात साफ होती दिख रही है कि शायद पानी और जैविक पदार्थ पृथ्वी पर किसी क्षुद्रग्रह से ही आए होंगे. पृथ्वी पर ज्यादातर उल्कापिंड इटोकावा जैसे S टाइप क्षुद्रग्रह से ही आए हैं.



पृथ्वी के निर्माण के समय बना होगा ये
यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के रॉयल होलोवे के शोधकर्ताओं ने किया है. उन्होंने पाया कि इटोकावा क्षुद्रग्रह का निर्माण भी उस तरह से हुआ होगा जैसे अरबों साल पहले पृथ्वी का हुआ था. ऐसे इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें पानी और जैविक पदार्थ मौजूद है. विज्ञप्ति में रॉयल होलोवे के अर्थ साइंस विभाग की वैज्ञानिक क्वीने चान ने यह जानकारी दी.

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क्षुद्रग्रह (Asteroid) की यह नई पड़ताल पृथ्वी के इतिहास के रहस्य खोलेगी. (तस्वीर: NASA)


पृथ्वी से समानता
टीम ने यह भी पाया कि जैविक पदार्थ जो क्षुद्रग्रह के नमूनों में पाया गया है वह भी बहुत चरम अवस्थाओं में दूसरे स्रोतों से आए पानी और जैविक पदार्थों के रूप में विकसित हुआ है. यह बिलकुल वैसी ही प्रक्रिया है जैसी पृथ्वी पर हुई होगी. इससे हमें हमारे सौरमंडल के जैवरसायन विज्ञान को समझने में मदद मिलेगी.

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अमेजन नाम के दाने पर हुआ शोध
रिलीज में चान ने बताया कि हायासुबा एक रोबोटिक अंतरिक्ष यान था जो जाक्सा ने इटोकावा नाम के नियर अर्थ क्षुद्रग्रह से नमूने लाने के लिए भेजा गया था. इस नमूने के एक दाने का विस्तृत अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की इस टीम ने किया है. इस दाने को ‘अमेजन’ नाम दिया गया था.

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यह अध्ययन दूसरे क्षुद्रग्रह (Asteroid) से आए नमूनों के अध्ययन में भी मददगार होगा.


उत्साहित करने वाली है पड़ताल
इस दाने में पुरातन और प्रसंस्कृत जैविक पदार्थ दोनों मौजूद हैं. चान का कहना है कि यह पड़ताल बहुत उत्साहित करने वाली है, क्योंकि यह क्षुद्रग्रह के इतिहास की जटिल जानकारी दे रही है. इसके अलावा इससे यह भी पता चल रहा है कि इसके जीवन का विकास पुरातन पृथ्वी के विकास की तरह है जब यहां जीवन की शुरुआत नहीं हुई थी.

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यह अध्ययन और इसका खोज दूसरे क्षुद्रग्रहों से लाए गए नमूनों के अध्ययन में भी मददगार साबित हो सकते हैं. यह पिछले साल ड्यूगू क्षुद्रग्रह से आई मिट्टी का अध्ययन और बेनू क्षुद्रग्रह से लाए जा रहे नमूनों के अध्ययन लिए बहुत काम का साबित हो सकता है.
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