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समुद्री जीवाश्म में दिखी क्रूर शिकार की घटना, जानिए वैज्ञानिक क्यों हुए हैरान

यह जीवाश्म समुद्र के तट के पास पाया गया जो करीब  20 करोड़ साल पुराना है.

यह जीवाश्म समुद्र के तट के पास पाया गया जो करीब 20 करोड़ साल पुराना है.

वैज्ञानिकों को एक स्क्विड (Squid) जैसा समुद्री जीव और उसके पंजों में एक मरी हुई मछली एक ही जीवाश्म (fossil) में मिले जिसने एक क्रूर कहानी बयां की.

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नई दिल्ली: वैज्ञानिकों को आमतौर पर जो जीवाश्म मिलते हैं उससे पुराने  समय  में रहने वाले जीवों के बारे में बहुत कुछ पता चलता है. इन जीवों के अंगों से लेकर उनका खान पान की आदतों तक का अंदेशा वैज्ञानिकों को जाता है, लेकिन इस बार एक ऐसा जीवाश्म (Fossil) मिला है जिसमें समुद्र में एक जीव का दूसरे जीव के शिकार करने की घटना कैद है.

डायनासोर के जमाने का है यह जीवाश्म
जीवाश्म विज्ञानियों को करीब 20 करोड़ साल पुराना यह जीवाश्म मिला है. डायनासोर के जमाने का यह जीवाश्म इंग्लैंड के पास मिला है. इंग्लैंड के प्लेमाउथ यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार यह जीवाश्म 19वीं शताब्दी में इंग्लैंड के दक्षिणी समुद्रतट पर मिला था. इसमें एक ऑक्टोपस (Octopus) या स्क्विड (Squid) जैसा सेफलपॉड (cephalopod) क्लास का जीव मिला है.

किसका है जीवाश्म
माना जा रहा है कि यह इस तरह का सबसे पुराना जीवाश्म हो सकता है जो अब तक मिला है. इस जीवाश्म में एक जीव की क्विड जैसी संरचना है जिसमें 10 भुजाएं हैं जो कांटे जैसे हुक की तरह दिख रहे हैं. इस जीव ने एक मछली का शिकार मरने से ठीक पहले ही किया था. यानि शिकार करते समय ही दोनों शिकारी और शिकार का जीवाश्म बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

क्रूर शिकार की घटना
 इस जीवाश्म में इस सेफलपॉड जीव के साथ उस मछली के अवशेष भी मिले हैं जिसका यह शिकार कर रहा था. इसमें मछली का सिर टूटा मिला है. प्लेमाउथ यूनिवर्सिटी के माइक्रोपेलेयंटोलॉजी के प्रोफेसर और शोधकर्ता मेलकम हार्ट का कहना है कि यह बहुत ही क्रूर हमला था.

कैसे पता चला कि हमला हुआ था
 हार्ट का कहना है कि उस इलाके में बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीवाश्म मिले हैं जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी.  इस मछली का सिर खाने के लिए काटा गया था हड्डियों में कहीं कहीं तीखापन था जहां से वे टूट गई थीं.  इसका मतलब यह है कि इस मछली पर बहुत जोरदार हमला हुआ था. शोधकर्ताओं को नहीं लगता कि दोनों जीवों का अलग अलग समय जीवश्म बनना शुरू हुआ था.

एक अनुमान के मुताबिक यह जीवाश्म गहरे समुद्र में बना था.


क्या है यह शिकारी जीव
शोधकर्ताओं ने इस जीवाश्म की बड़ी तस्वीर का अध्ययन किया जिससे शिकारी जीव का पता चलता है. यह जीव विलुप्त हो चुके स्क्विड का संबंधी है  जिसे बेलेम्नॉइड कहा जाता है. शोधकर्ताओं को स्क्विड और बेलेम्नॉयड में काफी अंतर दिखा, खास तौर से दोनों की भुजाओं के हुकों का विकास अलग ही तरह से हुआ था. आज के स्क्विड में 8 नियमित भुजाएं होती है और बड़ी भुजाएं होती है जिसमें हुक होता है. जबकि इस जीव में 10 हुक वाली भुजाएं पाई गई हैं.

इस तरह का सबसे पुराना जीवाश्म
इससे पुराना इस तरह का जीवाश्म कभी नहीं पाया गया है. यह जीवाश्म 19 करोड़ से लेकर 19.9 करोड़ साल पुराना है. इसके अलावा इसी तरह का जीवाश्म इसके 1 करोड़ साल के बाद जर्मनी के बवारिया में मिला है.

लेकिन इस बात का पता लगना बाकी
शोधकर्ताओं ने इस बात का अनुमान लगाने की कोशिश की कि यह जीवाश्म कैसे बना. एक अनुमान के अनुसार हो सकता है कि इतनी बड़ी मछली का शिकार करते ही स्क्विड संबंधी यह जीव मर गया हो और गहरे समुद्र में उतर कर जीवाश्म बनने लगा हो. लेकिन यह तर्क सही नहीं सिद्ध हो पा रहा है. क्योंकि स्क्विड जैसे जीव अपने से बड़े जीवों का शिकार करते हैं और उन्हें धीरे-धीरे खाते हैं. इसके अलावा यदि ऐसा हुआ भी तो समुद्र तल पर उन्हें खाया क्यों नहीं गया. उनका जीवाश्म क्यों बनने लगा.  फिर भी यह अभी तक रहस्य ही है कि इस मौके पर जीवाश्म बनने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई.

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