खगोलविदों ने निकाला Exoplanet खोजने का नया तरीका, अब ये होगा फायदा

खगोलविदों ने निकाला Exoplanet खोजने का नया तरीका, अब ये होगा फायदा
नए तरीके से खगोलविद अब बहुत सारे बाह्यग्रहों की पहचान कर सकेंगे. (फाइल फोटो)

खगोलविदों ने अब बाह्यग्रहों (Explanet) के खोजने का नया तरीका निकाला है. इससे उन्होंने एक नया ग्रह (Planet) खोज भी लिया है.

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खगोलविदों ने निकाला Exoplanet खोजने का नया तरीका, अब ये होगा फायदाबाह्यग्रह यानि (Exoplanets)  वे रहस्मय ग्रह हैं जो हमारे सौरमंडल (Solar System) के बाहर पाए जाते हैं. जिस तरह हमारे सौरमंडल के चारों ओर ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं बाह्यग्रह भी अपने तारे के चक्कर लगाते हैं. बाह्यग्रहों को खोजना अब तक बहुत ही मुश्किल काम हुआ करता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने उन्हें को खोजने का नया तरीका निकाला है जिससे अब और ज्यादा बाह्यग्रहों की खोज संभव हो गई है.

वैज्ञानिकों की ज्यादा रुचि क्यों
वैज्ञानिकों की बाह्यग्रह में उनमें ज्यादा रुचि होती है जो अपने तारे की हैबिटेबल जोन (Habitable Zone) में पाए जाते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्माण्ड (Universe) में पृथ्वी के बाहर अगर कहीं जीवन मौजूद हो सकता है तो वह इन बाह्यग्रहों में ही हो सकता है जिनमें पृथ्वी जैसी परिस्थितियां हों और वहीं पानी और ठोस सतह होने की सबसे ज्यादा संभावना भी होती है.

वैज्ञानिकों ने नया ग्रह खोज भी लिया
वैज्ञानिकों ने इस नई तकनीक से खगोलविदों ने एक नया बाह्यग्रह भी ढूंढ लिया है. NGTS-11b नाका का यह ग्रह यूके की वार्विक यूनिवर्सिटी के सैमुअल गिल की अगुआई वाली शोधकर्ताओं की टीम ने खोजा है. इस खोज के लिए शोधकर्ताओं ने नासा के TESS टेलीस्कोप के आंकड़ों का अध्ययन किया जिसे खास तौर पर सुदूर ग्रहों की खोज के लिए ही उपयोग में लाया जाता है.



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सौरमंडल के बाहर के ग्रह की खोज आसान नहीं होती (प्रतीकात्मक तस्वरीर)


कैसे होती थी अब तक बाह्यग्रहों की पहचान
सबसे पहले TESS  ग्रह की तब पहचान करता है जब वह अपने तारे के सामने गुजरता है जिससे उस तारे के एक हिस्से की चमक कम हो जाती है. लेकिन TESS केवल उस हिस्से को कम समय के लिए देख पाता है जो आमतौर पर 27 दिन का समय का होता है. वैज्ञानिक इस चमक में दो बार कम होने पर ही उस बाह्यग्रह के होने की पुष्टि करते हैं, लेकिन कुछ ग्रह 27 दिन से ज्यादा का समय लगाते हैं.

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अब क्या हुआ नया
यहीं पर चिली स्थित नेक्ट जनरेशन ट्रांजिट सर्वे (NGTS) टेलीस्कोप की भूमिका आती है. NGTS ने उसी तारे का अवलोकन किया जो हमसे 620 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है और उसने उस तारे को 79 रातों तक अवलोकन किया. इस तरह शोधकर्ता एक ग्रह के तारे की चमक में दो बार कमी की पहचान क सके और उन्होंने NGTS-11b को दोबारा देखा जो अपने तारे का 35 दिन में एक चक्कर लगाता है.

Exoplanet
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अब वे बाह्यग्रह खोजे जा सकेंगे जहां जीवन संभव है. ((प्रतीकात्मक तस्वीर))


ऐसे ग्रहों पर जीवन की संभावना  ज्यादा
वार्विक यूनिवर्सिटी के बयान में गिल ने कहा, “इस तरह की खोजें काफी कम होती हैं लेकिन अहम होती हैं क्योंकि ये हमें लंबे समय वाले ग्रहों की खोज करने में मदद करती है. लंबे समय वाले ग्रह ठंडे होते हैं जैसे की हमारे खुद के सौरमंडल के ग्रह हैं. NGTS-11b हमारे बुद्ध और शुक्र ग्रह से ठंडा ग्रह है फिर भी यह इतना ग्रम है कि जीवन के अनुकूल हो सकता है. NGTS का का काम हमें और ज्यादा ग्रहों की खोज करने का तरीका बताता है.

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इस तरह से खोजे गए दूसरे ग्रहों में जीवन की ज्यादा अनुकूलता हो सकती है. अब गिल का लक्ष्य TESS के चिह्नित किए गए सौ अन्य ट्रांजिट हैं जिनसे वे हैबिटेबल जोन वाले पथरीले ग्रहों की खोज कर सकते हैं. गिल को उम्मीद है कि इनमें से कुछ इतने ठंडे हो सकते हैं कि उनमें पानी के सागर हों और उसने में जीवन हो.
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