धरती पर महाविनाश लाने वाले Climate change की वजह ने वैज्ञानिकों को किया चिंतित

धरती पर महाविनाश लाने वाले Climate change की वजह ने वैज्ञानिकों को किया चिंतित
जलवायु परिवर्तन के इंसान पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेंगे.

नए शोध से पता चला है कि 20 करोड़ साल पहले जब जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से दुनिया की आधी से ज्यादा प्रजातियां खत्म हो गई थीं. उसकी वजह ज्वालामुखी (Volcanos) थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2020, 10:18 AM IST
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नई दिल्ली: अभी तक हम केवल यह जानते थे कि आज से 20 करोड़ साल पहले ट्रियासिक युग (Triassic Era) में  जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से  दुनिया की आधी से ज्यादा प्रजातियां (Speicies) नष्ट हो गई थीं. लेकिन इस जलवायु परिवर्तन की वजह हमें पता नहीं थी. लेकिन ताजा शोध से वैज्ञानिकों को इसकी वजह पता चली है और उसने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है.

क्या हुआ था तब
अब तक वैज्ञानिकों का मानना था की आज से 20 करोड़ साल पहले दुनिया में जलवायु परिवर्तन की वजह से कई प्रजातियां खत्म हो गई थी. इस जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर भी बहुत ज्यादा बढ़ गया था.  उस समय बड़े  पैमाने पर ज्वालामुखी गतिविधियां हुई थीं जिसे सेंट्रल एटलांटिक मैगमिक प्रोविंस इरपशन्स कहा जाता है. इन्हीं ज्वालामुखियों ने इतने बड़े स्तर पर जलवायु परिवर्तन में सीधी भूमिका निभाई थी.

कैसे पता चली इसकी वजह
नेचर कम्यूनिकेशन्स के लिए किए गए शोध में शामिल अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने उस युग के पत्थरों में कार्बन डाइऑक्साइड के कण पाए हैं कार्बन डेटिंग से पता चला है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड उसी  समय की है जब इतने बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन हुआ था.



Lock down has benefited environment
कार्बन डाइ ऑक्साइड के बढने से दुनिया का तापमान बढ रहा है.


तो फिर क्या है चिंता का कारण
उन्हें पता लगा है कि एक ज्वालामुखी की इस जलवायु परिवर्तन में अहम भूमिका थी. इससे उन्हें इस सिद्धांत को समर्थन मिला है जिसके मुताबिक उस युग में दुनिया की लगभग आधी प्रजातियां नष्ट हो गई थीं.  उन ज्वालामुखियों की वजह से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की इतनी ज्यादा मात्रा निकली थी जो इक्कीसवीं सदी में इंसान और उसके कार्यकलापों से निकलेगी.

कितनी निकली थी तब कार्बन डाइऑक्साइड
 शोधकर्ताओं ने चट्टानों में कैद हुए कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुलों का अध्ययन किया और पाया कि एक ज्वालामुखी से इतना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड निकला था, जितना कि एक लाख क्यूबिक किलोमीटर मात्रा का लावा 500 साल तक फैलता रहा हो. यह मात्रा लगभग उतनी ही है जितनी कि 21वीं सदी में मानवीय गतिविधियों ने से यह गैस निकलेगी.

खतरे की घंटी
इस शोध में शामिल डॉ डॉन बेकर का कहना है कि हम कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का सटीक अनुमान तो नहीं लगा सकते, लेकिन उस समय के विनाश का और कार्बन डाइऑक्साइड का इतनी मात्रा में निकलने से संबंध हमारे लिए एक खतरे की घंटी जरूर है. इस बात की जरा सी भी संभावना हमें चिंता में डालने के लिए काफी है.

 Volcano
ज्वालामुखी बहुत मात्रा में कार्बन डाइ ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करता है.


जल्दी ही हो सकता है हमारा भी वह हाल
गौरतलब है कि काफी समय से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हमारी धरती के लिए खतरा बना हुआ है. जलवायु परिवर्तन के खतरे हमारे सामने अलग अलग रूपों में सामने आने लगे हैं और अगर इसे रोका नहीं गया तो बेकर की आशंका बेवजह नहीं है कि हमें भी जल्दी ही इस तरह के एक और महाविनाश का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकी हम भी तेजी से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर वहीं तक पहुंचा देंगे जो ट्रियासिक युग में पहुंच गया था.

उस दौर में डायनासोर इस जलवायु परिवर्तन के दौर को झेल गए थे और पूरी तरह से खत्म नहीं हुए थे, उनका पूरा खात्मा 6 करोड़ साल पहले हुआ था.

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