लोग क्यों भूल जाते हैं जान-पहचान के नाम, वैज्ञानिकों ने पता की इसकी वजह

लोग क्यों भूल जाते हैं जान-पहचान के नाम, वैज्ञानिकों ने पता की इसकी वजह
जरूरत पड़ने पर चीजों को फिर से याद करने के लिए हमारे दिमाग के खास न्यूरॉन काम करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

न्यूरोसाइंस्ट्स (Neuroscientists) ने इस बात का पता लगाया है कि हमारे दिमाग (Brain) के कौन सा तंत्रिकाएं (Neurons) हमें चीजों को याद दिलाने में मदद करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 28, 2020, 12:41 PM IST
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हम में से बहुत से लोगों को कई बार कोशिश करने के बाद भी नाम जल्दी याद नहीं आते. अब तंत्रिका विज्ञानियों (Neuroscientists) ने ऐसा होने का कारण ढूंढ लिया है. उन्होंने उन तंत्रिकाओं (Neurons) की पहचान कर ली है जो हमें यादों को ताजा करने में मदद करते हैं. यह तंत्रिकाएं हमारे दिमाग में लचीलापन लाती हैं.

जरूरत होने पर याद आने की क्रिया
हमारे दिमाग के संज्ञानात्मक (cognitive) लचीलेपन का एक पहलू क्षमता भी है जिससे हमें जब जरूरत होती है तो हम अपनी याद्दाश्त में चुनिंदा जानकारी को ढूंढ लें. कैलटेक में बायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी के विजिटिंग एसोसिएट और इस शोध के वरिष्ठ लेखक यूली रूतिशॉसेर ने बताया, “यह पहली बार है कि इंसानी दिमाग में याद्दाश्त संबंधी फैसले लेने वाले न्यूरोन्स की व्याख्या की गई है. इसके अलावा इस अध्ययन  यह भी दर्शाया है कि कैसे यादें आगे के लोब से में चुनिंदा तौर पर भेजी जाती हैं और वह भी जब जरूरत होती है.

इन बीमारियों के इलाज मे होगा फायदा
यह शोध साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसका अल्जाइमर, मिर्गी, स्कीजोफ्रीनिया जैसी बीमारियों से संबंधित समस्याओं के इलाज पर असर दिखाई दिया है. यह अध्ययन उन मरीजों पर किया गया जिन्हें दौरे के लिए दिमाग की सर्जरी के जरिए इलाज किया जा रहा था.



कैसे किया गया अध्ययन
लोगों को कुछ तस्वीरें दिखाई गईं और उनसे तस्वीरों के आधार पर कई तरह के सवालों के जवाब देने को कहा गया. इसी दौरान कैलटेक और लॉस एंजेलिस में सीडार्स-सिनाई मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने हर न्यूरोन्स की एक एक गतिविधि  को इलेक्ट्रोड के जरिए रिकॉर्ड किया. मिसाल के तौर पर एक व्यक्ति को किसी की तस्वीर दिखाई गई जिसे उसने कभी नहीं देखा था. उससे पूछा गया कि क्या आपने यह चेहरा पहले देखा है? या क्या यह एक चेहरा है?

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दिमाग के अलग अलग न्यूरोन अलग तरह याद वापस लाने के लिए अलग तरह से काम करते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


दिमाग ने इस सवालों में किया अंतर
इन दो सवालों से शोधकर्ताओं को याद्दाश्त आधारित फैसले और श्रेणी आधारित फैसलों में अंतर करने में मदद मिली. शोध के प्रमुख लेखक जूरी मिन्क्सा ने कहा, “हम हमेशा फिर से लौटने वाली यादों के आधार पर निर्णय लेते हैं. इस अध्ययन में हमने हां या ना वाले सवाल ही पूछे थे, जिनसे जवाब देने वाले को या तो अपनी हाल की याद्दाश्त को टटोलना था या फिर श्रेणीबद्ध जानकारी को.“

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दिमाग के ये हिस्से होते हैं इन क्रियाओं के जिम्मेदार
यादों की एनकोडिंग और रिट्रीवल (याद आना या याद लौटना) हमारे दिमाग के निचले मध्य क्षेत्र  में होती हैं जिसे मीडियल टेम्पोरल लोब कहते हैं. इसमें हिप्पोकैम्पस भी शामिल होता है.  वहीं फैसले लेने की प्रक्रिया का संबंध दिमागे आगे के हिस्से से होता है जिसे मीडियल फ्रंटल कोर्टेक्स कहा जाता है. हमारी यादों के लचीलेपन के साथ व्यस्त रखना और फैसले लेने के लिए उनका उपयोग करन फ्रंटल और टेम्पोरल लोब के बीच के अंतरक्रिया पर निर्भर करता है.

इन हिस्सों के न्यूरोन पर रखी निगरानी
इस अध्ययन  में शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल 13 लोगों के दोनों ही टेम्पोरल और फ्रंटल लोब के एक-एक न्यूरोन पर नजर रखी. अध्ययन के नतीजों से पता चला जो न्यूरोन यादों को टेम्पोरल लोब में एनकोड करते हैं  और जो फ्रंटल लोब में “यादों के चुनाव वाले न्यूरोन्स” होते हैं, वे यादों को जमा करके नहीं रखते बल्कि रिट्रीव (Retieve) करने में मदद करते हैं यानि कि याद दिलाने या याद आने की प्रक्रिया में मदद में करते हैं.

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अलग सवाल पूछे जाने पर दिमाग के अलग हिस्सों ने अलग प्रतिक्रिया की (Photo-pixabay)


कैसे किया हिस्सों ने काम
जब लोगों से पूछा गया कि क्या उन्होंने यह चेहरा देखा है तो दोनों क्षेत्र सक्रिय हो गए , लेकिन जब उनसे तस्वीर दिखाकर पूछा गया कि क्या यह चेहरा है, तो यादें चुनने वाले न्यूरोन्स शांत रहे. इसके बजाए फ्रंटल लोब के कुछ अलग न्यूरोन सक्रिय हो गए जिनका काम तस्वीर का श्रेणीकरण करना था.

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मजेदार बात यह रही की शोधकर्ताओं ने पाया कि यादों के चुनाव वाले न्यूरॉन में से एक अलग अलग संदर्भों में एक एक जानकारी के संकेत भेज रहे थे. इससे हमारे दिमाग के उम्मीद से ज्यादा लचीला होने का संकेत मिलता है.
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