वैज्ञानिकों को मंगल पर कभी नदी होने के पुख्ता सबूत, अब आगे है ये उम्मीद

वैज्ञानिकों को मंगल पर कभी नदी होने के पुख्ता सबूत, अब आगे है ये उम्मीद
मंगल ग्रह पानी होने का यह अकेला प्रमाण नहीं है.

वैज्ञानिकों को ताजा तस्वीरों से मंगल ग्रह (Mars) पर लाखों साल पहले नदी के बनाए अवासादी शैल (Sedimentary Rocks) मिले हैं.

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नई दिल्ली: क्या मगंल ग्रह (Mars) पर पानी था? इस सवाल का कई सालों से एक ही जवाब रहा है, हां. लेकिन इसकी पुष्टि के नए-नए प्रमाण वैज्ञानिकों को नई जानकारी के साथ मिलते ही जा रहे हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर एक अरब साल पहले नदी होने के संकेत नए और पुष्ट संकेत मिले हैं.

कैसे मिले वैज्ञानिकों को नए प्रमाण
वैज्ञानिकों को मिले ताजा प्रमाणों की जानकारी नेचर कम्यूनिकेशन जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. शोधकर्ताओं ने  नासा के रेकनॉयसेंस ऑर्बिटर यान के कैमरा HiRISE से उच्च गुणवत्ता तस्वीरें का अध्ययन कर यह पुख्ता जानकारी हासिल की है.  शोधकर्ताओं ने तस्वीरों की मदद से मंगल ग्रह के हेलास बेसिन इलाके का एक टोपोग्राफिकल मैप बनाया. यह मंगल का एक बहुत बड़ा क्रेटर क्षेत्र है.

क्या नजर आ रहा है तस्वीरों में
शोधकर्ताओं ने एक पथरीले पहाड़ की चोटी के पास गहरे अवसादी तलछट पाए जो करीब 656 ऊंचे थे. यह अवासाद तेज बहती नदी की वजह से बने थे. इसकी चौड़ाई करीब एक मील थी. शोधकर्ताओं ने बताया कि हम वहां जाकर विस्तृत जानकारी नहीं ले सकते थे. लेकिन इनकी पृथ्वी के अवसादी शैलों से समानता शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ रही है. करीब 200 मीटर मोटे अवसाद निक्षेप बनने के लिए हमें ऐसा हालात चाहिए जहां बहुत बड़ी मात्रा में तरल पानी बहता हो.



 

Mars
मंगल ग्रह पर शोधकार्य अब बढ़ता ही जा रहा है.


पहले साबित हो चुकी है यह बात
 यह सालों पहले ही साबित हो चुका है कि मंगल ग्रह पर पहले बहुत सी झीलें, नदियां और संभवतः महासागर तक रहे होंगे जो जीवन के शुरुआती स्तर के अनुकूल होंगे. आज मंगल के ध्रुवों पर बर्फ जमा है और उसमें बहुत ज्यादा धूल के तूफान आते हैं. लेकिन वहां सतह पर तरल पानी के होने के कोई संकेत नहीं हैं. लेकिन जब पृथ्वी पर जीवन आज से 3.7 अरब साल पहले शुरू हुआ था. मंगल पर हालात इतने विषम नहीं थे. और हो सकता है कि तब वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां रही हों.

पृथ्वी पर भी ऐसे ही मिली है इतिहास की जानकारी
शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर भी अवसादी शैलों के अध्ययन कर जियोलॉजिस्ट शुरू से ही लाखों-अरबों साल पहले के  स्थितियों के बारे में जानने में सफल हुए हैं.  और अब हम मंगल ग्रह का भी अध्ययन कर पा रहे हैं जहां हमारी धरती से भी पहले के समय के अवसादी शैल पाए गए हैं.

पहले क्या पता लगता रहा मंगल के बारे में
उल्लेखनीय है की धरती के टेली स्कोप और कई अंतरिक्ष यानों की तस्वीरों से भी वैज्ञानिकों को मंगल की धरती पर ऐसी आकृतियां दिखी है जिनसे लगता है कि पहले कभी मंगल पर पानी बहा करता था. धरती पर मंगल से आए कई उल्कापिंडों के अध्ययन ने भी  यह प्रमाणित किया है कि मंगल की सतह के नीचे भी प्रचुर मात्रा में पानी रहा होगा.

जीवन के प्रमाण मिलने की संभावना कायम है अब भी
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि इन तेज बहती नदियों ने इन पत्थरों को करीब हजारों साल पहले बनाया होगा. इन शैलों में जीवन की प्रमाण हो सकते हैं और मंगल ग्रह के इतिहास के बारे में बहुत सी जानकारी हो सकती है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यूरोपीय स्पेस एजेंसी के रोवर जानके बाद 2023 से इस इलाके के बारे में और ज्यादा  जानकारी मिल सकती है.

अब बहुत ज्यादा जानकारी मिलने वाली है
आने वाले मंगल ग्रह के बारे में बहुत सी जानकारी मिलने की उम्मीद है. नासा को एक रोवर क्यूरोसिटी पहले ही मंगल पर अपना काम कर रहा है. इसके अलावा वहां  एक इनसाइट नाम को लैंडर भी भूगर्भीय अध्ययन के लिए काम कर रहा है. वहीं नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी अगले कुछ सालों में मंगल से मिट्टी के नमूने भी लाने की तैयारी कर रहे हैं. इस अभियान के सफल होने पर नासा मंगल पर इंसान के जाने की तैयारी करेगा.

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