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क्या गर्म इलाकों में भी उगाया जा सकेगा गेहूं, वैज्ञानिकों को मिली आशा कि किरण

क्या गर्म इलाकों में भी उगाया जा सकेगा गेहूं, वैज्ञानिकों को मिली आशा कि किरण

गेहूं की फसल अब अधिक तापमान वाले क्षेत्र में भी पैदा की जा सकेगी.

गेहूं की फसल अब अधिक तापमान वाले क्षेत्र में भी पैदा की जा सकेगी.

गेहूं (Wheat) की दो प्रजातियों में केवल दोअमीनो एसिड (Amino Acid) के आदान प्रदान से गेहूं की फसल अधिक तापमान को सहने में सक्षम हो गई.

नई दिल्ली:  दुनिया में खाने की समस्या को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) का सहारा लिया है. इससे काफी मदद भी मिली है, लेकिन शोधकर्ता अभी कृषि के क्षेत्र में तरह-तरह के अनुसंधान जारी रखें हैं. एक शोध में उन्होंने ऐसा गेहूं (Wheat) बनाने की दिशा में अहम सफलता पाई है जो गर्मी सह सकता है.

अधिक तापमान में उपयुक्त नहीं है गेहूं की फसल
आमतौर पर गेहूं ज्यादा गर्म इलाकों में पैदा नहीं हो सकता. इसी वजह से भारत जैसे देशों में यह सर्दियों में उगाया जाता है और यह खरीफ के नहीं, रबी की फसल होती है. लेकिन गेहूं जैसी अहम फसल अगर गर्म इलाकों और गर्म मौसम में भी होने लगते तो दुनिया में बढ़ती खाद्य समस्या के समाधान कि दिशा में एक बड़ी सफलता मिल सकती है.

तापमान के मुताबिक काम करने वाला एंजाइम
इस दिशा में शोधकर्ता अणुओं के स्तर पर काम कर रहे हैं. वे यह देख रहे हैं कोई फसल अणुओं के स्तर पर कैसी प्रतिक्रिया करती है. शोधकर्ताओं के मुताबिक पौधों में एक रूबिस्को एक्टिवेज (Rca) नाम का खास प्रोटीन होता है जो उर्जा पैदा करने वाले एंजाम रूबिस्को को तब सक्रिय करता है जब सूर्य चमकता है. वहीं जब पत्तियों के पास रोशनी नहीं आती तो ऊर्जा, बचाने के लिए यह प्रोटीन रूबिस्को को रोकता है.

एक छोटे से बदलाव ने दिया बड़ा नतीजा
इसी बात को ध्यान में रख कर लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी की एक टीम ने बताया कि गेहूं में Rca बनाने वाले  380 मॉलिक्यूलर बिल्डिंग ब्लॉक्स में से केवल एक में ही बदलाव करने से रूबिस्को गर्म तापमान में तेजी से सक्रिय हो जाएगा. इससे संभव है कि गेहूं की फसल ज्यादा तापमान में बच सकती है.

भारत में गेहूं रबी की फसल के रूप में उगाई जाती है.


दो प्रजातियों में किया यह बदलाव
शोधकर्ताओं ने Rca 2 बीटा प्रजाति के गेहूं का चयन किया जिसमें पहले से ही कम तापमान में रूबिस्को सक्रिय हो जाता है इसमें उन्होंने केवल एक ही अमीनो एसिड को बदला जो कि Rca 1बीटा प्रजाति का गेहूं हैं जिसमें रूबिस्को अधिक तापमान में सक्रिय हो जाता है.  इससे उन्हें 2बीटा Rca का बेहतर रूप मिला जो दोनों ही हालातों में बढ़िया काम करता है.

क्या था शोध का मुख्य उद्देश्य
लैंकेस्टर एनवायर्नमेंट सेंटर की  सीनियर लैक्चरर एलिजाबेथ कार्मो सिल्वा इस शोध की प्रमुख सदस्य हैं. इस शोद का नाम रियलाइजिंग इंक्रीजड फोटोसिंथेटिक एफिशिएंसी (RIPE) है. शोध का मुख्य उद्देश्य फसल में फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया को बेहतर करना है जिससे कि फसल की उत्पादकता बढ़ाई जा सके.
दो अमीनो एसिड की अदला बदली
शोधकर्ताओं ने बताया कि Rca 1 बीटा में आइसोलेयूसिन अमीनो एसिड होता है जो 39 डिग्री सेल्सियस तक काम करता है, लेकिन वह रूबिस्को को सक्रिय करने में बहुत अच्छा नहीं हैं. वहैं Rca 2 बीटा में मीथेओनाइन अमीनो एसिड होता है जो 30 डिग्री  तक काम करता है, लेकिन रूबिस्को को सक्रिया करने में बढ़िया है.  इसी लिए इस नए रूप में आइसोलेयूसिन अमीनो एसिड है जो 35 डिग्री तक काम करता है और रूबिस्को को सक्रिय करने में भी बढ़िया है.

क्या निकला नतीजा
 यह Rca 2 बीटा का नया रूप तापमान के दबाव में भी बेहतर उत्पादन दे सकता है. अफ्रीका जैसे महाद्वीप में इस शोध के नतीजे बहुत काम आ सकते हैं जहां ज्यादातर इलाकों में तापमान बहुत ज्यादा होता है और किसान अपने जीवन यापन के लिए गेहूं या उसके जैसी दूसरी फसलों पर निर्भर हैं. यह खोज भारत में भी कई क्षेत्रों में किसानों को गेहूं उगाने के लिए प्रेरित कर सकती है जो तापमान ज्यादा होने के कारण दूसरी फसल उगाते हैं.

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Tags: Research, Science

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