वैज्ञानिकों ने रहस्य सुलझाया, शुरू में ही खत्म क्यों नहीं हो गया ब्रह्माण्ड

सिग्मा-8 विसंगति का संबंध ब्रह्माण्ड के घनत्व की गणना से है.
सिग्मा-8 विसंगति का संबंध ब्रह्माण्ड के घनत्व की गणना से है.

ताजा शोध में पता चला है कि किस वजह से ब्रह्माण्ड (Universe) ने मैटर एंटीमैटर (Matter-Antimatter) के मिलने से खुद को खत्म नहीं किया और मैटर अंततः हावी हो गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2020, 4:06 PM IST
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नई दिल्ली: ब्रह्माण्ड (Universe) के रहस्यों को सुलझाना इंसान के लिए एक बहुत ही बड़ी चुनौती रही है. सदियों से एक के बाद एक कई शोधों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इस अनंत कहे जाने वाले ब्रह्माण्ड के बारे में कई सिद्धांत भी जान लिए हैं. फिर भी कई सवाल अब भी पहेली ही बने हुए है. ताजा शोध ने वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति (Origin of Universe) संबंधी कई सवालों के जवाब दिए हैं जिससे वे काफी उत्साहित है.

क्या पता लगा शोध में
ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने मैटर यानि  द्रव्य (Matter) और एंटी मैटर यानि प्रति द्रव्य (Antimatter) के बर्ताव के बारे में खास बातें पता लगाई हैं. इससे कि उन्हें ब्रह्माण्ड के पैदा होने के समय से संबंधित कर सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.

कौन है मैटर के हावी होने के लिए जिम्मेदार
नेचर में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक न्यूट्रीनो इस बात के जिम्मेदार हैं जिससे ब्रह्माण्ड की शुरुआत में मैटर एंटीमैटर पर हावी हो सका था. शोध से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति में अवपरमाणु कणों (Subatomic particles) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है.


अभी तक नहीं हो पा रही थी इस सवाल की व्याख्याब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों सहित एक टीम ने इस मामले में अध्ययन किया है. उनका कहना है कि भौतिकी (Physics) के वर्तमान सिद्धांत यह व्याख्या करने में असमर्थ हैं कि ब्रह्माण्ड की शुरुआत में क्यों मैटर (द्रव्य) एंटी मैटर (प्रतिद्रव्य) पर हावी होने में कामयाब रहा. जबकि उस समय दोनों ही समान मात्रा में बने थे.क्या होते हैं मैटर और एंटीमैटरद्रव्य और प्रतिद्रव्य एक दूसरे के विपरीत होते हैं जिस तरह से इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर हाइड्रोजन बनाते हैं उसी तरह एंटइलेक्ट्रॉन और एंटी प्रोटॉन मिल कर एंटी हाइड्रोजन का निर्माण कर सकते हैं. अभी तक वैज्ञानिकों का मानना था कि दोनों को ही एक दूसरे को खत्म कर देना चाहिए थे. जब एक एंटीप्रोटॉन दूसरे प्रोटॉन से मिलता है तो दोनों ही खत्म होने चाहिए.ऐसे तो शुरू होते ही खुद को खत्म ही लेना था ब्रह्माण्ड कोइस लिहाज से जब ब्रह्माण्ड बन रहा था उसी समय द्रव्य और प्रतिद्रव्य ( मैटर और एंटी मैटर)  को एक दूसरे से मिलकर विनाश कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यही वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत जटिल पहेली बनी हुई थी. वहीं शोध में पता चला है कि ऐसा न हो पाने की एक खास वजह थी.
क्यों नहीं हुआ होगा ऐसा
शोध के मुताबिक मैटर और एंटीमैटर दोनों के बर्ताव में निश्चित ही कोई अंतर होना चाहिए जिसकी वजह से द्रव्य (Matter) कायम रहा और अब ब्रह्माण्ड पर वह हावी हो गया है.

वैज्ञानिकों ने न्यूट्रीनो की तरह एंटीन्यूट्रीनो भी होते हैं. उनकी भी विशेषताएं और बर्ताव एक दूसरे के विपरीत होते हैं और इसी वजह से एक दूसरे के संपर्क में आने पर दोनों को विनाश हो जाता है. इस धारणा के विपरीत वैज्ञानिकों ने पक्के तौर पर यह पाया कि न्यूट्रीनो और एंटीन्यूट्रीनो अलग बर्ताव करते हैं और इसलिए एक दूसरे को खत्म न कर सके हों.

गहरा असर होगा भौतकी पर शोध के नतीजों का
टीम में शामिल शोधकर्ता पैट्रिक ड्यूने का कहना है, “ये नतीजे हमें एक बड़ी सवाल के जवाब के करीब ले जा रहे हैं. यह सवाल है कि वर्तमान ब्रह्माण्ड में मैटर की उपस्थिति क्यों हैं. हम अभी 95 प्रतिशत आश्वस्त हैं, लेकिन इसकी पुष्टि होने पर इसका भौतकी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा. यह बेशक हमें यह समझने में बहुत ज्यादा मदद करेगा कि ब्रह्माण्ड का उद्भव (Evolve) कैसे हुआ.”

पहले नहीं हो पा रही थी इसकी व्याख्या
शोध में यह भी पाया गया कि पूर्व में अवपरमाणु कणों (Subatomic particles)- क्वार्क्स (Quarks) के मैटर और एंटीमैटर रूपों के बर्ताव में अंतर पाया गया था, लेकिन यह अंतर बहुत ज्यादा बड़ा नहीं था जिससे द्रव्य के हावी होने की व्याख्या हो सके.

न्यूट्रीनो और एंटीन्यूट्रीनो ने दिया जवाब
लेकिन वर्तमान शोध में न्यूट्रीनो और एंटीन्यूट्रीनो के व्यवहार में बहुत बड़ा अंतर पता चल रहा है. न्यूट्रीनों  और एंटीन्यूट्रीनों तीन तरह के होते हैं. म्यूऑन(Muon), इलेक्ट्रॉन (Electron) और तउ (Tau) और वे यात्रा के दौरान कंपन (Oscillate) कर खुद अन्य रूपों में बदल भी सकते हैं.

क्या प्रयोग किया गया शोध में
जापान के टोकाई में हुए इस प्रयोगा में वैज्ञानिकों ने म्युऑन न्यूट्रीनो और एंटीन्यूट्रीनों की एक बीम फेंकी और उनके 295 किमी दूर एक डिटेक्टर से उनमें आए बदलाव को परखा. उन्होंने पाया की न्यूट्रिनो एंटीन्यूट्रीनों के मुकाबले खुद में ज्यादा बदलाव कर रहे हैं. यह एक बड़ा अंतर था जैसका के ड्यूने ने कहा.

क्यों उत्साहित हैं वैज्ञानिक इन नतीजों से
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मैटर के ब्रह्माण्ड पर हावी होने की व्याख्या के लिए पर्याप्त होगा. वहीं यह ब्रह्माण्ड में द्रव्य के हावी होने की कई थ्योरी का समर्थन भी करता है. शोधकर्ताओं को पूरी उम्मीद है कि इस दिशा में आगे के अध्ययन  इस मामले में अनिश्चितता को और ज्यादा कम कर सकेगी.

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