कब से खिसक रही हैं टेक्टोनिक प्लेट, शोधकर्ताओं को मिला इस अहम सवाल का जवाब

पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि के बारे में वैज्ञानिकों को अहम जानकारी  मिली है.
पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधि के बारे में वैज्ञानिकों को अहम जानकारी मिली है.

वैज्ञानिकों के बीच अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि पृथ्वी की सतह (Earth Crust) पर टेक्टोनिक प्लेटें (Tectonic Plates) कब से खिसक रही हैं. इस सवाल का जवाब अब उन्हें मिल गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 23, 2020, 8:17 PM IST
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नई दिल्ली:  सभी जानते हैं कि पृथ्वी की सतह (Earth Crust) कई प्लेटों से मिलकर बनी हैं. ये प्लेटें, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेटें (Tectonic Plates) कहा जाता है. पृथ्वी के अंदर मेंटल (Mantle) की सतह पर हैं और खिसकती भी रहती हैं. लेकिन वे इस तरह की गतिविधि कब से कर रही हैं इस पर वैज्ञानिकों को इस बारे में नई जानाकारी मिली है. शोधकर्ताओं का पता चला है कि इन प्लेटों ने 3.2 अरब सालों से खिसकना शुरू किया था. जबकि वैज्ञानिकों को लगता था कि यह काफी समय बाद में शुरू हुआ था.

क्या होती है टेक्टोनिक प्लेट
टेक्टोनिक प्लेट के बारे में माना जाता है पृथ्वी का स्थलमंडल कई प्लेटों से बना हुआ है. पृथ्वी की सतह पर ये प्लेटें खिसकती रहती हैं और कई तो एक दूसरे के ऊपर भी होती हैं. इनके आपस में टकराने से भूकंप और ज्वालामुखी के फूटने की जैसी गतिविधियां भी होती रहती हैं.

तो अब तक क्या लगता था शोधकर्ताओं को
इस तरह की घटनाएं कब हुईं इस पर वैज्ञानिकों में काफी मतभिन्नता है. आज तक कुछ शोधकर्ताओं को लगता था कि ऐसा चार अरब साल पहले हुआ था. जबकि बहुत से अन्य शोधकर्ताओं को लगता था कि ऐसा करीब एक अरब साल पहले हुआ था. साइंस एडवांस्ड जर्नल में  प्रकाशित शोध के मुताबिक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पुरातन चट्टानों के आंकड़ों का अध्ययन किया.  ये चट्टाने ऑस्ट्रलिया और दक्षिण अफ्रीका की थीं. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने पाया का उन चट्टानों की प्लेट 3.2 अरब साल पहले खिसक रही थीं.



Earth, Life on Earth
पृथ्वी की ऊपरी परत कई प्लेटों से बनी है जिसकी वजह से भूकंप आते हैं.


क्या पाया शोध में
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्रोटन में पृथ्वी की सतह के बहुत पुराने टुकड़ों को वैज्ञानिकों ने हासिल किया. उन्होंने पाया कि ये टुकड़े करीब 2.5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से खिसक रहे थे और उनका खिसकना करीब 3.2 अरब साल पुराना था.

इस क्षेत्र में नई और अहम जानकारी है यह
शोधकर्ताओं को लगता है कि यह इस बात का प्रमाण है कि इन प्लेटों का सरकना करीब 2 से 4 अरब साल पहले हुआ था. इससे टेक्टोनिक गतिविधि जैसे शोध को नई गति मिलेगी. इन प्लेट्स को टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है.

क्यों अहम माने जा रहे हैं ये प्रमाण
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एलेक ब्रेनर ने कहा, “हमें जो प्रमाण मिले हैं, उसके आधार पर लगता है कि प्लेट टैक्टोनिक की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो गई हो गई होगी.“ शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में स्थित पिलबारा क्रेटन तक गए. क्रेटन एक पारामिड के आकार का बहुत ही मोटा, लकिन स्थिर चट्टानी हिस्सा होता है. इसे पृथ्वी की सतह का हिस्सा भी कह सकते हैं. यह टेक्टोनिक प्लेट का बीच का हिस्सा होता है और ये पृथ्वी के पुरातन महाद्वीपों के दिल की तरह होते हैं. इसलिए इनकी बारे में जानकारी बहुत ही ठोस होगी यह तय था.

टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों के समय को लकर वैज्ञानिकों में मतभिन्न्ता थी.


किस तकनीक से पता चला
शोधकर्ताओं ने 2017 में इसके नमूने लिए और उनका अध्ययन कैंब्रिज लैब में मोग्नोमीटर्स और अन्य उपकरणों से किया. इससे उन्हें चट्टान के चुंबकीय इतिहास का पता चला. इससे पता चला कि ये 3.2 अरब साल पहले बने होंगे. जब टीम ने आसपास की चट्टानों पर शोध करने वाले दूसरे शोधकर्ताओं के आंकड़ों से अपने आंकड़ों की तुलना की तो पाया कि ये चट्टाने हर साल 2.5 सेंटीमीटर खिसक रहीं थीं.

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