100 अरब सूर्यों वाले Black holes से वैज्ञानिकों को क्यों हैं बहुत उम्मीदें

वैज्ञानिकों को लगता है कि डार्क मैटर (Dark Matter) की गुत्थी खास तरह के ब्लैकहोल (Black Hole) सुलझा सकते हैं.  (तस्वीर:  NASA_JPL-Caltec)
वैज्ञानिकों को लगता है कि डार्क मैटर (Dark Matter) की गुत्थी खास तरह के ब्लैकहोल (Black Hole) सुलझा सकते हैं. (तस्वीर: NASA_JPL-Caltec)

डार्कमैटर (Dark Matter) के बारे में जानकारी हासिल करने के मामले में शोधकर्ताओं को लगता है कि इस मामले में अतिविशालकाय ब्लैकहोल (stupendously large black holes) मददगार हो सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 6:50 AM IST
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डार्कमैटर (Dark Matter) ब्रह्माण्ड (Universe) के ज्यादातर पदार्थ की भागीदारी रखते हैं, फिर भी वैज्ञानिक उनके बारे में नहीं जानते हैं. वे इसके लिए केवल उसके सामान्य पदार्थ पर पड़ने वाले गुरुत्व प्रभाव पर निर्भर हैं. अभी तक डार्कमैटर के अस्तित्व (Existance) को साबित करने के लिये कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है. वहीं खगोलविदों की एक टीम ने अति विशालकाया ब्लैक होल या (stupendously large black holes) पर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि वे डार्कमैटर का रहस्य सुलझाने में मददगार साबित हो सकते हैं.

क्या होते हैं SLAB
हाल ही में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नए तरह के ब्लैकहोल पर सबका ध्यान दिलाया है. इसे वे आश्चर्यजन रूप से अति विशालकाया ब्लैक होल या (stupendously large black holes, SLAB) कहते हैं. इस तरह के एक ब्लैक होल में 100 अरब सूर्य या उससे ज्यादा समा सकते हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तरह के ब्लैक होल डार्क मैटर के बारे में और ज्यादा जानकारी दे सकते हैं.

बहुत कम ध्यान दिया गया है अब तक SLABs पर
आज की तारीख में जो सबसे बड़ा ब्लैक होल हमारे वैज्ञानिकों की जानकारी में है वह टॉन 618 (TON 618) है जिसका भार करीब 66 अरब सूर्यों के बराबर है. लुडविग मैक्सीमिलियन यूनिवर्सिटी के थ्योरिटिकल कॉस्मोलॉजिस्ट और इस अध्ययन के सहलेखक फ्लोरियन कुनेल का कहना है कि यह हैरान करने वाली बात है कि इस तरह के ब्लैक होल्स के अस्तित्व पर बहुत कम ध्यान दिया गया है क्योंकि सैद्धांतिक रूप से इस तर के ब्लैकहोल मौजूद हो सकते हैं.



कैसे बने होंगे SLABs
अभी तक SLAB की मौजूदगी का किसी भी तरह का प्रमाण नहीं मिल सका है और ना ही इस बारे में कोई सिद्धांत बनाया गया है गया है कि उन्हें कैसे पकड़ा जा सकता है.  परंपरागत अवधारणा के अनुसार वे छोटे ब्लैकहोल के रूप में पैदा होते हैं और फिर आपस में मिल जाते हैं. लेकिन यह अवधारणा गलत साबित होती दिखती है क्यों कि ब्रह्माण्ड की उम्र को देखते हुए वे इतना विशाल आकार इस तरह से हासिल नहीं कर सकते हैं.



बिग बैंग के बाद ही
इससे वैज्ञानिकों को यह मत बनाना पड़ा कि ब्लैकहोल का प्राइमोर्डियल (primordial) उत्पत्ति हुई होगी. इसके अनुसार बिगबैंग के ठीक बाद, जब ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई थी तब घनत्व में असमान उतार चढाव कारण कई जगह अधिक पदार्थ जमा होने के कारण ब्लैक होल्स का निर्माण हो गया होगा. जो भविष्य में विशाल ब्लैकहोल के लिए बीज का काम कर गए होंगे.

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डार्कमैटर की समस्या
प्राइमोर्डियल ब्लैकहोल्स (PBH) का अस्तित्व डार्कमैटर के रहस्य को सुलझा सकता है जिससे ब्रह्माण्ड का 80 प्रतिशत हिस्सा बना है. लेकिन वास्तव में डार्कमैटर है क्या इस बारे में वैज्ञानिक अनजान हैं. यह प्रकाश या ऊर्जा उत्सर्जित नहीं करता और शोधकर्ताओं ने इसे कभी नहीं देखा है.

Dark Matter, mystery
डार्क मैटर (Dark Matter) इतना व्यापक होने के बाद भी रहस्य (Mystery) ही है. (तस्वीर: Pixabay)


ग्रैविटेशनल लेंसिंग
प्राइमोर्डियल ब्लैक होल्स ग्रैविटेशनल लेंसिंग (Gravitational lensing) के जरिए पकड़े जा सकते हैं या फिर उन्हें उनके द्वारा वातावरण में पैदा किए गए प्रभाव के जहिए जाना जा सकता है. उनके बारे में कहा जाता है कि वे ऊष्मा, प्रकाश और अन्य तरह के विकिरण पैदा कर सकते हैं.

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और फिर WIMP भी
इसके अलावा उन्हें वीकली इंटरेक्टिंग मासिव पार्टिकल्स weakly interacting massive particles, WIMP) के जरिए भी पहचाना जा सकता है. अगर WIMP का अस्तित्व है जो अभी साबित नहीं हो सका है , तो SLAB इनके आसपास ही होते होंगे. क्योंकि WIMP के खत्म होने पर उच्च ऊर्जा वाली गमा विकरणों का उत्सर्जन को पकड़ कर वैज्ञानिक इनकी पहचान कर सकते हैं.
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