गर्भपात की दवा पर हुए प्रयोगों से मिली इंसान की उम्र बढ़ाने की उम्मीद

गर्भपात की दवा पर हुए प्रयोगों से मिली इंसान की उम्र बढ़ाने की उम्मीद
जीवन की उम्र बढ़ाने के लिए कई तरह के शोध होते हैं, यह शोध अनोखा लेकिन काफी आशाजनक है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गर्भपात (Abortion) के लिए उपयोग की जाने वाली दवा का मक्खियों (Fruit Flys) और कीड़ों (Roundworms) पर किए प्रयोग ने उम्मीद जताई है कि उससे इंसान की उम्र बढ़ सकती है.

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इंसान की उम्र बढ़ाने (Increasing lifespan) के लिए अलग-अलग तरह के शोध हो रहे हैं. कुछ को ध्यान लंबे समय तक कोई बीमारी न हो इस पर है तो कुछ का ध्यान हमारी त्वचा तक को आखिर तक जवां बनाए रखने पर है. लेकिन एक खास शोध में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा पर प्रयोग कर किए हैं जिसका उपयोग गर्भपात (Abortion) के लिए किया जाता है, मक्खियों और कीड़ों पर किए इस प्रयोग ने उम्मीद जताई है कि यह इंसान की उम्र बढ़ाने में मददगार हो सकती है.

क्या है यह उम्मीद
यूएससी डोर्नसाइफ कॉलेज ऑफ लेटर्स, आर्ट एंड साइंसेस के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाय कि उन्हें ऐसी राह मिल गई है जिससे इंसान की उम्र बढ़ सकती है. यह शोध 10 जुलाई को जर्नल ऑफ जेरेनटोलॉजी: बायोलॉजिकल साइंसेस में प्राकशित हुआ है. इसमें दिखा है कि माइफप्रिस्टोन नाम की दवा, लैब में प्रयोग की गई दो अलग-अलग प्रजातियों के जीवों का जीवन लंबा कर सकती है. इस अध्ययन के नतीजों से उम्मीद की जा रही है कि यह दूसरी प्रजातियों पर भी लागू हो सकता है जिसमें इंसान भी शामिल है.

किस पर किया यह शोध
वैज्ञानिकों ने एक जेनेटिक शोध के लिए बहुत ही आम लैब मॉडल के तौर पर चुनी वाली मक्खी पर प्रयोग किया. यह एक आम मक्खी है जिसे फ्रूट फ्लाई ‘ड्रोसोफिला’ कहा जाता है.इस अध्ययन में बायोलॉजिकल साइंसेस के प्रोफेसर जॉन टॉवर  और उनकी टीम ने हिस्सा लिया. उन्होंने पाया कि माइफप्रिस्टोन दवा ने उन मादा मक्खियों का जीवन लंबा कर दिया जिन्होंने सहवास किया था.



क्या है यह दवा
माइफप्रिस्टोन को RU-486 के नाम से भी जाना जाता है और यह क्लीनिक विशेषज्ञों द्वारा गर्भपात के अलावा कैंसर और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है. सहवास के दौरान मादा मक्खी नर मक्खी से एक अणु प्राप्त करती है जिसे सेक्स पेप्टाइड कहते हैं. पिछले शोधों ने दर्शाया था कि सेक्स पेप्टाइड मादा मक्खियों में जलन पैदा करने के साथ ही स्वास्थ्य को भी कमजोर करता है और उनकी उम्र को भी घटा देता है.

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शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग पहले मक्खियों पर किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर- रायटर्स)


क्या हुआ मक्खियों को यह दवा खिलाने से
टॉवर और उनकी टीम ने अपने प्रमुख शोधकर्ता गैरी लैंडिस के साथ अपने अध्ययन में पाया कि मादा मक्खियों को माइफप्रिस्टोन की खिलाने से सेक्स पेप्टाइड का का असर रुक जाता है, मादा मक्खियों में जलन कम होती है और वे स्वास्थ रहने के साथ ही लंबा जीवन जीती है. इस दवा का असर मक्खियों पर वैसे ही था जैसा कि उन महिलाओं पर देखा गया जिन्होंने यह दवा ली थी.

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इस प्रभाव का अध्ययन
टॉवर का कहना है कि मक्खियों में माइफप्रिस्टोन प्रजनन को घटा देती है, मूल प्रतिरोधक प्रतिक्रिया को बदल देती है और जीवन को लंबा कर देती है. इंसानों के मामले में हम जानते हैं कि यह प्रजनन को कम कर देती है और देती है, मूल प्रतिरोधक प्रतिक्रिया को बदल देती है, इसलिए हम उम्मीद कर सकते हैं कि वह जीवन को भी लंबा करती होगी.

एक खास हार्मोन की भूमिका
इस दवा माइफप्रिस्टोन के असर तो बेहतर तरीके से समझने के लिए टॉवर और उनकी टीम ने दवा देने के बाद मक्खियों के जीन्स, अणुओं और मैटाबॉलिक प्रक्रियाओं में आए बदलाव का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि एक अणु जिसे जूविनाइल हार्मोन (juvenile hormone) कहते हैं की इस मामले में केंद्रीय भूमिका है जो इन मक्खियों के पूरे जीवन चक्र के विकास को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है.

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यह दवा शुरुआती गर्भापात के काम में आती है. (प्रतीकात्मक / फाइल फोटो)


क्या असर करती है यह दवा
शोधकर्ताओं ने पाया कि सेक्स पेप्टाइड जूविनाइल हार्मोन का असर बढ़ा देता है. वह सहवास करने वाली मक्खियों के मैटाबॉलिज्म को ऐसा बना देता है जिसमें ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. इसी वजह से जलन बढ़ती है और इससे उनके माइक्रोबायोम के बैक्टीरिया के पैदा किए टॉक्सिक अणुओं के प्रति भी संवेदनशीलता बढ़ जाती है. माइफप्रिस्टोन यह सब बदल देती है.

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एक अन्य जीव पर भी वही नतीजे
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तरह के मैटॉलिज्म प्रक्रियाएं इंसान में भी होती हैं जिनका हमारे स्वास्थ्य और लंबे जीवन से संबंध है. इसके अलावा शोधकर्ताओं ने सी एलिगन्स (C. elegans) नाम के एक छोटे गोल कीड़े पर भी यही प्रयोग किया और उन्हें वैसे ही नतीजे मिले.

तो फिर इंसान पर भी ऐसा असर कैसे
दरअसल ड्रोसोफिला फ्रूट मक्खी और सी एलिगन्स कीड़े जीवों के विकासक्रम की शाखाओं में बहुत ही दूर-दूर हैं ऐसे में टॉवर को विश्वास है कि इस दवा का असर इंसानों जैसे प्रजातियों में भी वैसा ही असर दिखाएगा. फिर भी उनका कहना है कि निर्णायक नतीजों से पहले ही यह वैज्ञानिकों को इंसानी उम्र बढ़ाने के लिए बहुत सारी जानकारी और एक निश्चित दिशा तो जरूर दिखाएगा
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