कितनी बार भी Recycle कर लीजिए, कमी नहीं आएगी इस प्लास्टिक के गुणों में

कितनी बार भी Recycle कर लीजिए, कमी नहीं आएगी इस प्लास्टिक के गुणों में
अब तक बहुत सा प्लास्टिक पहले उपयोग के बाद दोबार उन्हीं गुणों के साथ उपयोग में नहीं लाया जा सकता था, लेकिन यह प्लास्टिक अपने गुण नहीं खोता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पर्यावरण (Environment) के लिए एक अच्छी खबर के तौर पर वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसा प्लास्टिक (Plastic) बनाया है जिसे बार रीसाइकल (Recycle) करने पर उसके गुण कम नहीं होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 5:01 PM IST
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प्लास्टिक (Plastic) हमारे आधुनिक जीवन (Modern Life) में बहुत उपयोगी वस्तु हो गई है. इसका बड़ा सबसे नुकसान है इसका प्राकृतिक रूप से विखंडन (Degradation) न हो पाना. इसी वजह से इसके टुकड़े पूरी दुनिया में ऐसी जगह जमा हो रहे हैं जिससे जीवन तक को खतरा हो रहा है. प्लास्टिक का एक बड़ा खराब पहलू यह भी है कि इसे दोबारा प्रयोग (Recycling) करने पर इसकी गुणवत्ता (Quality) में कमी आ जाती है, इसीलिए प्लास्टिक इतना ज्यादा फेंका (Waste) जाता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ऐसा प्लास्टिक विकसित किया है जिसे कितनी भी बार फिर से उपयोग (Recycle) किया जाए इसके गुणों में कमी नहीं आएगी

यह था अब तक प्लास्टिक के साथ समस्या
ज्यादातर प्लास्टिक अपने निर्माण के पहले उपयोग के बाद, नए रूप में उपयोग में लाने पर अपने गुण खो देते हैं. उन्हें पिघलाकर दूसरे रूप देने के बाद उनके गुणों में कमी आ जाती है. ताजा शोध में जो प्लास्टिक डिजाइन किया गया है वह अलग तरह का है. इसे PBTL कहते हैं जो बाइसाकलिक थियोलैक्टोन्स नामक रासायनिक मूलभूत अंगों से मिलकर बना है.

यह खास बात है इस नए प्लास्टिक की
हाल ही में साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक PBTL को कितनी बार भी तोड़ कर फिर से बना लिया जाए, वह अपनी एक रूपता नहीं तोड़ता. शोधकर्ताओं का विश्वास है कि इस प्लास्टिक का न केवल सोडा या अन्य बॉटल के लिए उपयोग किया जा सकेगा, बल्कि इससे कारों के पुर्जे और निर्माण सामग्री भी बनाई जा सकती है. इससे लाखों टन प्लास्टिक की बचत हो सकती है. जो हर साल पर्यावरण को प्रदूषित करता है.



क्या प्रयोग किया शोधकर्ताओं ने
प्लास्टिक पॉलीमर्स नाम के बड़े अणुओं से मिलकर बनता है. एक मोनोमर्स नाम के सरल पदार्थ से बने होते हैं. न्यूसाइंसिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक PBTL के टिकाउपन की जांच करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक प्लास्टिक जत्थे को उत्प्ररेक के मौजदूगी में 212 डिग्री फेहरनहाइट पर 24 घंटे के लिए पिघला कर इसका दोबारा उपयोग करने का प्रयास किया.

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इस अध्ययन का फायदा बोतलों के निर्माण ही नही बल्कि ऑटोमोबाइल और निर्माण के क्षेत्र को भी होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या मिला नतीजा
इसके बाद जो मोनोमर बना उससे शोधकर्ताओं ने नया PBTL बनाया. शोधकर्ताओं ने पाया कि नया PBTL उतना ही मजबूत था जितना कि मूल PBTL का प्लास्टिक. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया को कई बार दोहराने से भी वही नतीजा मिलेगा.

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यह समस्या है गंभीर
इस शोध का मानना है कि आज के प्लास्टिक के सीमित जीवन के समस्या गंभीर है और इसका समाधान नहीं निकाला जा सकता है. इसी वजह से प्लास्टिक को फेके जाने का चलन बढ़ गया है और उससे एक कचरे की तरह बर्ताव किया जाता है. इससे प्रदूषण की समस्या तो बढ़ी ही है, लेकिन इसके साथ ही उन सीमित प्राकृतिक संसाधन को दोहन भी तेजी से हुआ है जो प्लास्टिक निर्माण में उपयोगी होते हैं. इससे बहुत सी ऊर्जा और पदार्थ का नुकसान होता है. शोध में इस बात पर जोर दिया गया है कि अब जो अगली पीढ़ी के पॉलीमर की डिजाइन हो रही है उसमें पलास्टिक के जीवन के बाद (After life of Plastics) की समस्याओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

Plastic
नए प्लास्टिक के लिए अलग से ही कचरे के डिब्बे बनाने होंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


एक कमी भी है PBTL में
इसके बाद भी PBTL का एक नुकसान है. वह यह कि इसे दूसरी तरह के प्लास्टिक के साथ रीसाइकल नहीं किया जा सकता है. इस कारण इसे अलग से जमा करना होगा और रीसाइकल करने से पहले सुनिश्चित करने होगा कि इसमें दूसरे तरह के प्लास्टिक नहीं मिले हैं. यानि कि इसके लिए अलग से कचरे के डिब्बे रखने होंगे और इनके परीष्कृत करने के केंद्र भी अलग ही बनाने होंगे.

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दुनिया में सालाना 30 करोड़ टन का प्लास्टिक का उत्पादन होता है. उसमें से केवल 20 प्रतिशत प्लास्टिक ही दोबारा उपोयग में लाया जाता है. अमेरिका जैसे देश में तो यह केवल 10 प्रतिशत है. बाकी प्लास्टिक या तो जला दिया जाता है या फिर फेंक दिया जाता है. पिछले साल ही 80 लाख टन प्लास्टिक समुद्र में फेंक दिया गया था.
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