वैज्ञानिकों को दिखा एक गैलेक्सी में X आकार, जानिए क्या है उस आकार की सच्चाई

वैज्ञानिकों को दिखा एक गैलेक्सी में X आकार, जानिए क्या है उस आकार की सच्चाई
एक्स आकार की तरह दिखने वाली यह गैल्क्सी 800 प्रकाशवर्ष दूर है.

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक गैलेक्सी (Galaxy) का आकर अंग्रेजी अक्षर X के आकार का पाया और उन्होंने इसकी वजह भी पता कर ली.

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नई दिल्ली: जब भी आकाशगंगा यानि कि गैलेक्सी (Galaxy) के आकार की बात होती है तो गोलाकार (Round) या सर्पिल (spiral) आकार ही ध्यान में आता है. लेकिन गैलेक्सी किसी भी आकार की हो सकती है और गोल या सर्पिल दोनों ही आकार बहुत ज्यादा मिलते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को एक विचित्र आकार की गैलेक्सी मिली है. यह अंग्रेजी के एक्स  अक्षर (X shape)  की तरह है.

कैसे दिखी इस आकार में यह गैलेक्सी
वैसे तो PKS 2014-55 नाम की यह गैलेक्सी साल 2014 में ही देखी जा चुकी थी. आम टेलीस्कोप से देखने पर यह गैलेक्सी एक चमकीली रोशनी का सामान्य सा धब्बा नजर आती है, लेकिन अगर जब इस रेडियो टेलीस्कोप से देखा गया तो यह अंग्रेजी भाषा के एक्स अक्षर की भांति दिखाई दी.

इसके आकार का ब्लैकहोल से है संबंध
यह गैलेक्सी हमारी धरती से लगभग 8 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है. लाइव साइंस में प्रकाशित खबर के अनुसार इस गैलेक्सीकी हर भुजा हमारी मिल्की वे ग्रैलेक्सी से 100 गुना ज्यादा लंबी है. वास्तव में ये भुजाएं बहुत से कणों और मैग्नेटिक फील्ड से बनी हुई है जो गैलेक्सी के केंद्र में स्थित ब्लैक होल से निकल रही है.



गैलेक्सी के केंद्र में ब्लैक होल की वजह से उसका आकार बदल गया.


कम होती हैं इस तरह की गैलेक्सी
इस तरह के विशाल रोडियो ऊर्जा का निकलना उन गैलेक्सी में आम बात है जिनके केंद्र में ब्लैक होल है. हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में भी दो इस तरह के स्थान हैं. रोडियो ऊर्जा के इस तरह के स्रोत जोड़ो में होते हैं. जो दूर से दिखने पर या तो सीधी रेखा में आते दिखते हैं या फिर गोल आकार में. अमेरिका में वर्जीनिया के नेशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑबजर्वेटरी के खगोलविद विलियम कॉटन का कहना है कि इस तरह का आकार लेने वाली केवल 10 प्रतिशत गैलेक्सी ही होती हैं.

क्यों एक्स के आकर की दिखती है यह गैलेक्सी
नए शोध से इस सवाल का जवाब मिलता दिख रहा है कि गैलेक्सी के केंद्र से चार भुजाएं निकल कर एक्स आकार क्यों देती दिख रही हैं. दक्षिण अफ्रीका में स्थित मीरकैट (MeerKAT) रेडियो टेलीस्कोप से हुए अध्ययन से पता चला है कि इस गैलेक्सी का आकार एक्स की तरह दिखता है, लेकिन है नहीं.

तो क्या है इसका वास्तविक आकार
वास्तव में यह गैलेक्सी दो बूमरैंग के आकार की तरह दिख रही है.  इसका मतलब है कि गैलेक्सी में कुछ हैं जो इसमें हो रहे बहाव को यह रूप दे रहा है. कॉटम और अन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे हाइड्रोडायनामिकल बैकफ्लो मॉडल से समझा जा सकता है. पहले गैलेक्सी के केंद्र में स्थित ब्लैक होल लाखों सालों तक बहुत सारा पदार्थ अपने अंदर समेट लेता है, लेकिन इसके बाद इतना पदार्थ अपने अंदर बनाए नहीं रख पाता या पचा नहीं पाता. इसके बाद ब्लैक होल पदार्थ को दो जेट के रूप में अंतरिक्ष में उगलता है. कह सकते हैं यह एक तरह की डकार ले रहा है. यह पदार्थ विपरीत दिशा में बहुत ही अधिक गति से निकलता है.

गैलेक्स को इस रूप में आने में लाखों साल लगे.


तो फिर कैसे बन गया एक्स का आकार
धीरे धीरे ( करीब हजारों साल बाद) यह जेट ब्लास्ट पदार्थ को ऊर्जा के रूप में निकालता रहता है. इसके बाद कुछ पदार्थ पर दबाव बढ़ता है और वे ब्लैकहोल के केंद्र की ओर जाने लगते हैं.  इसे बैकफ्लो कहते हैं. लेकिन इस गैलेक्सी में बैकफ्लो ने रास्ता बदल दिया और एक बूमरैंग की तरह दिखने लगा. दोनों ही तरफ से बूमरैंग के आकार ने इस गैलेक्सी को एक्स का आकार दे दिया.

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