एक छोटे तारे से निकलीं superflares, जानिए खगोलविद क्यों कह रहे हैं इन्हें खास

एक छोटे तारे से निकलीं superflares, जानिए खगोलविद क्यों कह रहे हैं इन्हें खास
ये ज्वालाएं एक नए उन्नत टेलीस्कोप के पहले ही अवलोकन में देखी गई हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जापान के खगोलविदों ने पृथ्वी से 12 प्रकाशवर्ष दूर एक छोटे तारे (Red Dwarf) से विशालकाय लपटें (Superflares) निकलते देखीं हैं जो अब तक सूर्य (Sun) में भी कभी नहीं देखी गईं.

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हमारे सूर्य (Sun) की सतह पर कई बार विस्फोट होते रहते हैं और उनके परिणामस्वरूप ज्वालाएं या लपटें (Flare) निकलती रहती हैं. इनके साथ ही बड़ी मात्रा में मेग्नेटिक तरंगें (Magnetic waves) भी निकलती हैं, लेकिन हमारे ग्रह पृथ्वी (Earth) की मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic field) के कारण हमें इनका एहसास तक नहीं होता. हाल ही में खगोलविदों ने 12 प्रकाशवर्षदूर स्थित एक तारे से बड़ी मात्रा में इस तरह की ज्वाला निकलते देखी हैं जिन्हें उन्होंने सुपरफ्लेयर (Superflare) नाम दिया है.

किस तारे से निकलीं ये ज्वालाएं
खगोलविदों ने एडी लियोनिस (AD Leonis) नाम के एक लाल ड्वार्फ तारे में 12 तारे की ज्वाला (Stellar Flare) के निकलने का पता लगाया है. इनमें से एक ज्वाला तो हमारे सूर्य से निकाली जा रही ज्वालाओं से 20 गुना ज्यादा बड़ी थी. सौर ज्वाला (Solar Flare or Stellar Flare) वे विस्फोट हैं जो तारों की सतहों पर होते हैं.

किसने देखीं ये ज्वालाएं
क्योटो यूनिवर्सिटी के ग्रैजुएट स्कूल ऑफ साइंस और नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑबजर्वेटरी के वैज्ञानिकों ने इन परिघटनाओं का अवलोकन किया. डेली साइंस के मुताबिक इसके लिए उन्होंने क्योटोन यूनिवर्सिटी के 3.8 सेइमेइ टेलीस्कोप का उपयोग किया जो केयोटो के पश्चिम में स्थित एक पहाड़ी के ऊपर है.



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इस तरह की ज्वाला सूर्य पर बनने वाली ज्वालाओं से अलग हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या खासियत है इनकी
हाल ही में पब्लिकेशन्स ऑफ द एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ जापान में प्रकाश इस शोधपत्र के प्रथम लेखक कोसुके नामेकाता ने कहा, “बहुत कम मौकों पर इस तरह की विशाल ज्वाला बनती हैं. इससे बहुत विशाल मैग्नेटिक तूफान पैदा होते हैं. यदि इस तरह के मैग्नेटिक तूफान हमारे सूर्य से निकलें तो यह हमारी पृथ्वी के तकनीकी आधोसंरचना को काफी प्रभावित करेंगे.

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क्यों कहा गया इन्हें सुपरफ्लेयर्स
माना जा रहा है कि इस तरह के सुपरफ्लेयर्स का अध्ययन बहुत काम का साबित हो सकता है. इस तरह की परिघटनाएं हमारे सूर्य में होती नहीं देखी गई हैं. एडी लियोनिस तारा एक एम प्रकार का लाल ड्वार्फ है जिसक तापमान हमारे सूर्य से काफी कम है. इसी वजह से इस पर ज्वाला निकलने की घटना ज्यादा होती है. वैज्ञानिक इस नए टेलीस्कोप से बहुत सारी ज्वालाओं को देखने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्होंने शुरुआती अवलोकन में ही इस तरह की सुपरफ्लेयर दिखाई दे गईं.

Sun
इनके अध्ययन से सूर्य की ज्वालाओं के प्रभाव से बचने में मदद मिल सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कितने अलग हैं ये हमारे सूर्य की सौरज्वालाओं से
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस सुपरफ्लेयर में से  उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु से प्रकाश निकला है. इसमें बहुत ही उर्जावान इलेक्ट्रोन थे जो हमारे सूर्य से निकलने वाली ज्वालाओं के अधिक ऊर्जावान थे. टीम ने पाया कि वास्तव में ये ज्वाला उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणुओं से निकले प्रकाश ही हैं. लेकिन स्पैक्ट्रम में इनकी चमक ज्यादा नहीं दिखाई दी. वहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की ज्वालाओं में प्रकाश के स्पैक्ट्रम में सभी तरह की वेवलेंथ में चमक दिखाई देती है, ना कि किन्हीं खास अणु से आने वाला ऊर्जा में. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उनके लिए नई बात है.

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अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इन सुपरप्लेयर्स के बारे में अध्ययन करने से इनके बारे में और ज्यादा सामान्य जानकारी मिलेगी और उनके बारे में पूर्वानुमान लगाने में भी मदद मिलेगी. ससे हो सकता है कि हमें ऐसी जानकारी भी मिल जाए जिससे सूर्य से आने वाले मैग्नेटिक तूफान को रोकने में भी हमें मदद मिल सके.
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