जितना सोचा था उसके करोड़ों साल बाद पैदा हुआ था चंद्रमा

जितना सोचा था उसके करोड़ों साल बाद पैदा हुआ था चंद्रमा
अब तक माना जा रहा था कि चंद्रमा की उम्र 4.5 करोड़ साल है, लेकिन ताजा शोध ने इसमें संशोधन किया है.

नए शोध से पता चला है कि चंद्रमा (Moon) के निर्माण के समय का संबंध पृथ्वी के क्रोड़ (Earth core) से है उसकी उम्र पिछले गणना से 8.5 करोड़ साल कम है.

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नए शोध और बेहतर तकनीक कई बार वैज्ञानिकों को अपने पुराने मतों में बदलाव करने को मजबूर कर देते हैं. हाल ही में हुए एक शोध ने भी वैज्ञानिकों को चंद्रमा की उम्र (Age of Moon) में बदलाव करने का संकेत दिया है. इसके मुताबिक चंद्रमा जितना कि अब तक समझा जा रहा है उससे कम उम्र का है. लेकिन इस शोध से चंद्रमा (Moon) और पृथ्वी (Earth) के इतिहास काल की घटनाक्रम में भी एक तालमेल पाया गया है. यह शोध चंद्रमा के अध्ययन और वहां के अभियानों के लिए मददगार हो सकता है.

क्या है अब चंद्रमा की नई उम्र
एक नए उन्नत मॉडल की मदद से वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की उम्र की फिर से गणना की और पाया कि जितना सोचा गया था वह उससे 8.5 करोड़ साल बाद आया है. साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की उम्र पहले से 4.51 अरब साल से बदल कर 4.425 अरब साल कर दी है. इसमें उन्होंने 2.5 करोड़ साल ऊपर नीचे होने की संभावना भी बताई है. ऐसे में सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस नई जानकारी से चंद्रमा के बारे में कोई और बात पता चली है या नहीं.

कैसे हुआ था चंद्रमा का निर्माण
चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में वैज्ञानिकों में सबसे प्रचलित मत यही है कि पृथ्वी से मंगल के आकार की चट्टान के टकराने से ही चंद्रमा की उत्पत्ति हुई थी उस समय पृथ्वी भी अपना आकार ले ही रही थी और तब पृथ्वी पर चारों ओर मैग्मा का सागर व्याप्त था. नए शोध के मुताबिक चंद्रमा पर भी एक हजार किलोमीटर की गहराई तक मैग्मा का सागर था.



कैसे किया गया अध्ययन
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एक गणितीय मॉडल का प्रयोग कर समय के अनुसार चंद्रमा के रासायनिक संरचना की गणना की. उन्होंने अपना शोध इस आधार पर शुरू किया कि चंद्रमा पर शुरू में एक विशाल मैग्मा का सागर था . उन्होंने इस बात की गणना की कि कैसे समय के साथ मैग्मा के ठंडे होने पर चंद्रमा पर खनिजों का निर्माण हुआ. इस टाइमलाइन का अनुसरण कर उन्होंने चंद्रमा के पिछले इतिहास का अनुमान लगाते हुए उसकी उम्र की फिर से गणना की.

Moon
शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की चट्टानों की रासायनिक संरचना का अध्ययन किया.


कैसे हुआ उम्र में अंतर
वैज्ञानिकों में इस बात पर असहमति है कि मैग्मा के इस सागर को ठंडा होने में कितना समय लगा. अभी तक के मत कह रहे थे कि इसमें 3.5 करोड़ साल लगे. इस शोध के प्रमुख लेखक और जर्मन एरोस्पेस सेंटर के प्लैनेटरी जियोफिजिसिस्ट मैक्जिमे मॉरिस का कहना है कि उनके मॉडल के नतीजे बता रहे हैं कि चंद्रमा के मैग्मा को ठंडे होने में काफी समय लगा था और वहां मैंटल चट्टान बनने में 20 करोड़ साल लग गए थे.

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पृथ्वी से संबंध
चंद्रमा की चट्टानों की रासायनिक संरचना में हुए बदलाव की मॉडलिंग करने पर जब टीम ने चंद्रमा की उम्र की फिर से गणना की तो उन्होंने पाया कि चंद्रमा की में हुए बदलाव का पृथ्वी के इतिहास से भी संबंध है, जिसका मतलब यह हुआ कि चंद्रमा का निर्माण उसी समय हुआ होगा जब पृथ्वी की क्रोड़ (Core) बनी थी.

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चंद्रमा और पृथ्वी की क्रोड़ का निर्माण एक ही समय पर हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहली बार हुआ ये कनेक्शन
वहीं जर्मनी में म्यून्सटर यूनिविर्सटी के प्लैनेटोलॉजी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर थोर्स्टन क्लाइन का कहना है कि यह पहली बार है कि चंद्रमा की उम्र का पृथ्वी के निर्माण के अंत समय की की एक प्रक्रिया के साथ संबंध जोड़ा गया है और यह प्रक्रिया पृथ्वी के क्रोड़ के निर्माण की है.

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इस शोध से वैज्ञानिकों को चंद्रमा के बारे में अपनी जानकारी के आंकड़े अपडेट करने में मदद मिलेगी. यह शोध उन तमाम शोधों की ही तरह एक है जो चंद्रमा के अध्ययन के लिए हो रहे हैं. दुनिया के कई देश चंद्रमा पर अपने अभियान भेजने में लगे हैं और वहां से खनिज उत्खनन की योजना के अलावा नासा चंद्रमा पर इंसान को लंबे समय तक रहने लायक स्थितियां बनाने की तैयारी भी कर रहा है.
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