जानिए किस घड़ी के आधार पर चलता है हमारा Universe

जानिए किस घड़ी के आधार पर चलता है हमारा Universe
ब्रह्माण्ड में समय की ईकाई सेकेंड से काफी छोटी होती है और वैज्ञानिकों ने इसी का मापने की कोशिश की है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने समय के अलग अवधारणाओं और मतों का अध्ययन कर ब्रह्माण्ड (Universe) के लिए समय (Time) की सबसे छोटी ईकाई (unit) निकाली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 15, 2020, 11:12 AM IST
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नॉलसमय (Time) के बारे में जो हमारी धारणा सीमित है. वह पृथ्वी पर हमारे जीवन के लिए सटीक है, लेकिन क्या वह धारणा ब्रह्माण्ड (Universe) के लिए भी सही है. इस बात को वैज्ञानिक भी मानते हैं समय का बर्ताव ब्रह्माण्ड में कई स्तरों पर अलग हो जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि ब्रह्माण्ड के लिए समय कुछ है भी या नहीं. अगर है तो क्या है. इन सवालों पर ताजा शोध ने प्रकाश डालने की कोशिश की है जिसमें उन्होंने समय को सेकेंड (Second) के बहुत ही छोटे स्तर तक ले जाने की कोशिश की है.

समय की सबसे छोटी ईकाई का झगड़ा
हमारी समय सबसे छोटी ईकाई तो सेकेंड है, लेकिन इस शोध में वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड की ईकाई जानने की कोशिश की है. इस अध्ययन के मुताबिक वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्माण्ड की समय की ईकाई उससे कहीं अधिक छोटी है. उनका कहना है कि यह ब्रह्माण्ड के समय की सबसे छोटी ईकाई एक सेकेंड के अरबवें के, अरबवें के, अरबवें के दस लाखवें हिस्से के बाराबर है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जितनी हम उम्मीद कर रहे हैं ब्रह्माण्ड की यह मूल घड़ी उससे ज्यादा तेजी से चल रही है.

क्या है समय
पिछले महीने ही भौतिकविदों की टीम ने फिजिक्स रीव्यू लैटर्स में अपना यह शोध प्रकाशित किया है. पेनसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के भौतिकविद मार्टिन बोजोवाल्ड से जब समय की सटीक परिभाषा के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, “वास्तव में हम नहीं जानते. हम इतना जानते हैं की चीजें बदलती हैं और हम इस बदलाव को समय के तौर पर देखते हैं.



क्या कहती है क्वांटम मैकेनिक्स
भौतिकविज्ञान में भी समय को लेकर दो विरोधी सिद्धांत हैं. कनाडा में वाटरलू के पेरीमीटर इंस्टूट्यूट की भौतिकविद फ्लैमिनिया गियाकोमिनी के अनुसार क्वांटम मैकेनिक्स कहती है कि समय बस है, यह निश्चित है और यह एक परिपेक्ष्य  यानि कि एक बैकग्राउंड (Background) है.  यानि समय वह पैमाना जो कभी नहीं रुकता और एक निश्चित गति से चलता है.

Black Hole
ब्लैकहोल के मामले में समय की व्याख्याएं क्वांटम मैकेनिक्स और सापेक्षता भी ठीक से नहीे कर पाते. (NASA/JPL-Caltec)


सापेक्षता का नजरिया
वहीं सापेक्षता का सामान्य सिद्धांत समय को अलग तरीके से परिभाषित करता है. यह नजरिया वैज्ञानिकों को बता है कि समय अलग गतियों से यात्रा कर रहे उन दो अवलोकनकर्ताओं के बीच फैल और सिकुड़ भी सकता है, जो दो घटनाओं के बीच अंतर पर असहमत होंगे

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फिर एक धारणा यह भी
ज्यादातर मामलों में समय को लेकर इन दो अलग नजरियों में टकराव नहीं होता है. लेकिन ब्लैकहोल, जो बहुत कम जगह में बहुत ही ज्यादा पदार्थ समेटे होते हैं, जैसी वस्तुओं में समय को लेकर समस्या होती है. यहां पर थ्योरी ऑफ एवरीथिंग (Theory of Everthing) यानि क्वांटम ग्रैविटी (Quantum Gravity) के बिना व्याख्या नहीं हो सकती है. इस क्वांटम ग्रैविटि के कई मामलों में समय अलग अलग ईकाई बना सकता है. यह एक तरह से ऐसा जैसे हर चीज की अपनी एक घड़ी होती है.

Space
ब्रह्माण्ड की एक सार्वभौमिक घड़ी बनाने की कोशिश की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


सेकेंड के कितने हिस्से
वैज्ञानिकों का मानना है कि मूलभूत घड़ी (Fundamental Clocks) सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं का अध्ययन कर और उन्हें मिलाकर हमें समय के बारे में नई अवधारणा मिल सकती है. अपने अध्ययन के मुताबिक जहां अब तक बनी आणविक घड़ियों की ईकाई, सेकेंड के अरबवें- अरबवें के हजारवें हिस्से (10^-19) के बराबर होती है. जबकि इस शोध में बात सेंकेंड के 10^-33) तक के स्तर की बात हो रही है.

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समय का मूल स्वाभाव
बोजोवाल्ड का कहना है कि दो समान रूप से बनाई गईं आणविक घड़ियां (Atomic Clock) भी पूरी तरह से कभी एक सी नहीं चलती है. इससे शोधकर्ताओं का यह धारणा बनाने में मदद मिली की समय का भी एक मूल स्वभाव होता है.

इस पूरी प्रक्रिया में शोध का मूल समय की सबसे छोटी यानि ईकाई के बारे में पता लगाना है, लेकिन जिस ईकाई की शोधकर्ता बात कर रहे हैं. वर्तमान तकनीक भले ही इसकी पुष्टि करने में सक्षम न हो. यह शोध ब्रह्माण्ड में समय को लेकर एक अलग नजरिए ज्यादा एक आयाम लेकर आया है.
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