खगोलविदों को टेलीस्कोप से दिखी अजीब चीजें, इन्हें समझने में हो रही है परेशानी

खगोलविदों को टेलीस्कोप से दिखी अजीब चीजें, इन्हें समझने में हो रही है परेशानी
वैज्ञानिकों को चार वृत्ताकार पिंड दिखे हैं जो पहले कभी नहीं देख गए. (प्रतीकात्मक फोटो: रायटर्स)

खगोलविदों ने एक उन्नत टेलीस्कोप (Telescope) से चार वृत्ताकार (Circular) पिंड देखे हैं जो अब तक देखे गए सभी खगोलीय पिंडों (Astronomical Objects) से अलग हैं.

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खगोलविदों ने टेलीस्कोप (Telescope)  की मदद से अंतरीक्ष में कुछ अजीब से वृत्ताकार पिंड (Circular Objects) देखै हैं. इन पिडों को देखने वाले खगोलविदों को का कहना है कि ये पिंड अब तक के ज्ञात किसी भी तरह के पिंड से मेल नहीं खा रहे हैं. इस बारे में वैज्ञानिकों का यही कहना है कि उनके पास इस बात की कोई निश्चित व्याख्या नहीं है कि ये पिंड कैसे बने.

इनकी उत्पत्ति को लेकर लगे कयास
अभी तक इस तरह के चार पिंड पाए गए हैं और सभी गोलाकार हैं इनमें से तीन के किनारे चमकीले हैं. शोधकर्ताओं का  अनुमान है कि यह अप्रत्याशित खगोलीय पिंड एक गैलेक्सी में कहीं और हुई किसी घटना से पैदा हुई गोलाकार शॉक वेव (Shock Wave) हो सकती हैं. इसमें तीव्र रडियो प्रस्फोट, गामा विकिरण प्रस्फोट, या न्यूट्रॉन तारों के विलय जैसी शक्तिशाली घटनाओं में से किसी एक का योगदान भी हो सकता है. यह सभी घटनाएं अपने आप में अब भी रहस्य बनी हुई हैं जो बहुत पहले घटित हुई थीं.

किसी ज्ञात परिघटना के नए दृश्य?
अपने शोधपत्र में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये पिंड किसी ज्ञात परिघटना के नए दृश्य भी हो सकते हैं. हो सकता है कि ये रैडियों गैलेक्सी की जेट को ऊपर से नीचे देखने पर भी दिखाई देने का नतीजा हो हों. जैसे हो सकता है कि ये वृत्ताकार दिख रहे हों क्योंकि यह उस बेलनाकार जेट का सिरा हो. शोधकर्ताओं का कहना है कि हो सकता है कि अब हमारी अलोकन करने की नई क्षमताओं के कारण कुछ अलग अलग चीजों से मिलकर एक पिंड की तरह एक ही समय पर दिखाई दे रही हों



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वैज्ञानिक इन पिंडों के स्रोत के बारे में कोई निश्चित अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


किस टेलीस्कोप से दिखे ये पिंड?
इन पिंडों का बिलकुल नए तरह के टेलीस्कोप से देखा गया है. ये पिंड ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर ऐरे पाथफाइंडर (ASKAP) के जरिए देखे गए हैं. इस अध्ययन को नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्राकशिन के लिए दिया गया है. जबकि इसकी रिपोर्ड एर्जिव (ArXiv) में प्रकाशित हो चुकी है.

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कैसे दिखे ये पिंड?
इन पिंडों की खोज तब हुई जब शोधकर्ता अंतरिक्ष को स्कैन करने करने के लिए एक इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स का सर्वे कर रहे हैं. खगोलविदों में इन पिंडों को ऑड रेडियो सर्किल्स (Odd Radio Circles, ORC) नाम दिया है. उनका कहना है कि उन्होंने यह नाम इसलिए दिया क्योंकि उन्हें इनकी उत्पत्ति के बारे में कोई जानकारी या व्याख्या नहीं मिली.

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इन पिंडों में तीन की जानकारी टेलीस्कोप के जरिए मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहली बार नहीं दिखे हैं वृत्ताकार पिंड
वृत्त या सर्किल प्रायः खगोलीय तस्वीरों में मिल ही जाती है और यह आमतौर पर बहुत सारे अलग-अलग पिंडों का समूह यह घर होने का संकेत होते हैं.  ये सुपरनोवा प्रस्फोट के बाद बची हुई चीजें हो सकती हैं , कोई नेब्यूला हो सकती हैं, या फिर किसी ग्रह के बनने से पहले की कोई डिस्क हो सकती है. यह भी हो सकता है कि एक खास कोण से दिख रही तारों से बनती कोई गैलोक्सी हो. यह अवलोकन में हुई गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है.

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अब तक दिखी वस्तुओं से व्याख्या नहीं की जा सकती इनकी
शोधकर्ताओं ने पाया कि इन पिंडों की व्याख्या अब तक के खोजे गए पिंडो के जरिए नहीं की जा सकती. उनका मानना है कि ये नए ही तरहे के खगोलीय पिंड लगते हैं. इन पिंडों में से तीन के बारे में सर्वे के दौरान ली गई इमेज को देखने से पता चला. जबकि चौथे के बारे में, जो थोड़ा अलग है वह मार्च 2013 में जमा किए गए आंकड़ों से पता चला. इससे पता चलता है कि सर्वे में या फिर टेलीस्कोप में कोई गड़बड़ी की संभावना नहीं है. फिर भी शोधकर्ताओं का सर्वे जारी है और वे उम्मीद कर रहे हैं उन्हें इन अजीब से वृत्तों के स्रोत का पता चल सकेगा.
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