झींगुर के पीठ पर लगाया कैमरा, सीधे मोबाइल को भेजता है तस्वीर

झींगुर के पीठ पर लगाया कैमरा, सीधे मोबाइल को भेजता है तस्वीर
पहली बार इतना छोटा कैमरा बना है जिसे झींगुर की पीठ पर लगाया जा सकात है और उसे कोई परेशानी भी नहीं होगी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने पहली बार इतना छोटा कैमरा (Camera) बनाने में सफलता हासिल की है जो झींगुर (Beetles) जैसे कीड़ों की पीठ पर लगाया जा सकता है.

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कीट पतंगों (Insects) का हमारे पर्यावरण (Environment) को बचाए रखने में बड़ा योगदान होता है. लेकिन उनके जीवन के बारे में जानना बहुत मुश्किल होता है. ये छोटे से जीवों का संसार इतना छिपा होता है कि हम उनके बारे में ज्यादा नहीं जान सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस समस्या का हल निकाल लिया है. उन्होंने झींगुरों (Beetles) की पीठ पर एक बहुत छोटा सा कैमरा (Camera) लगा कर बड़ी सफलता हासिल की है.

कीड़ों का बैगपैक
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी  के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा कैमरा विकसित किया है जो इन कीट पतंगों की पीठ पर बैकपैक की तरह लगाया जा सकता है. यह कैमरा बहुत ही हलका और छोटा है. इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैमरे की क्षमता और कारगता के साथ इस बात का भी पीरक्षण किया कि क्या इस कैमरे को झींगुर जैसे छोटे कीड़े ‘पहन’ सकते हैं.इस शोध का नतीजा यह हुआ कि एक छोटा सा कैमरा जो तस्वीरों लेने के साथ ही वीडियो बनाने में सक्षम है, झींगुर जैसे कीड़े में लगाया जा सकता. इसकी खास बात यह है कि यह मोबाइल फोन में सीधे तस्वीरें भेज सकता है.

क्या खास है इस कैमरे में
साइंस रोबोटिक्स जर्नल में प्रकाशित शोध में इस कैमरे के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. इस कैमरे में बहुत ही छोटा लेंस है  जो एक मैकेनिकल भुजा पर सेट है. इसका 60 डिग्री का घुमाव है और विशालदर्शी कैमरे  (Panoramic Camera) की श्रेणी में आता है. यह झींगुर के देखने के दायरे में ही हिलती हुई वस्तुओं की तस्वीरें ले सकता है.



Camera
आमतौर पर कैमरे इतने छोटे नहीं होते है जिससे कीड़ों का अध्ययन संभव हो सके. (प्रतीकात्मक तस्वीर)(Photo-pixabay)


ताश के पत्ते से भी हलका है यह
इस कैमरे की वजन 250 मिली ग्राम है और शोधकर्ताओं के मुताबिक यह एक ताश के पत्ते के वजन से भी कम है. उनका मानना है कि इतना कम वजन होने के कारण इस कैमरा सिस्टम को पहनने में कीड़ों को कोई परेशानी नहीं होगी और इसे पहन कर भी वे अपनी सारी गतिविधियों का निर्वाह कर सकेंगे.

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कीड़ों के संसार को जानने में मिलेगी मदद
इस अध्ययन के वरिष्ट लेखक श्याम गोलाकोटा ने एक  बयान में कहा, “हमने एक कम शक्ति वाला, कम वजन वाला वायरलैस कैमरा सिस्टम बनाया है जो पहली बार कीड़ों की दुनिया में हमें जानकारी देगा. यह बहुत छोटे रोबोट बनाने में भी मददगार होगा. संचार और एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने जाने के लिहाज से देखने की अहम भूमिका होती है. लेकिन यह इतने छोटे स्तर पर कर पाना बहुत ही ज्याद चुनौतीपूर्ण हैं. इससे पहले छोटे रोबोट्स में या फिर कीड़ों के स्तर पर वायरसलैस पद्धति से देखने की क्षमता कभी नहीं संभव नहीं थी.

कितनी रिकॉर्डिंग हो सकती है इसमें
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम में एक छोट एक्सलरोमीटर भी लगाया है जो यह पहचान कर सकेगा कि झींगुर कब हिलता है और तभी वह तस्वीरें लेगा जब झींगुर गतिविधि करेगा. बिना इसके कैमरा केवल दो ही घंटे में बैटरी खत्म कर देता, लेकिन एक्सलरोमीटर यह छह घंटे या उससे ज्यादा की भी रिकॉर्डिंग कर सकता है.

Robot
बड़े आकार के रोबोड तो पहले भी बन रहे हैं , लेकिन शोधकर्ताओं ने बहुत छोटा रोबोट बनाया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


अब तो बिना बैटरी का कैमरा भी बना सकते हैं शोधकर्ता
इस कैमरे को बनाने में सबसे अहम बात थी उसका बहुत हल्का होना जिससे की कीड़े इसे पहन सके. इसके अलावा एक चुनौती इसकी बैटरी को भी बहुत छोटा करना एक चैलेंज था. इसमें शोधकर्ताओं को आकार और वजन दोनो का ख्याल रखना पड़ा.

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इतना ही नहीं अब तो शोधकर्ताओं को विश्वास है कि वे इतना छोटा ऐसा बैगपैक कैमरा बना सकते हैं जिसको बैटरी की जरूरत ही नहीं होगी जिससे इसकी उपयोगिता और ज्यादा बढ़ जाएगी. इस शोध के बाद अब शोधकर्ताओं ने एक छोटा जमीन पर घूमने वाला स्वयं की ऊर्जा से संचालित वायरलैट रोबोट भी बनाया है.
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