जानिए मानव विकास के 70 करोड़ साल पुराने रहस्य और सुमुद्री स्पंज का कनेक्शन

डीएनए (DNA) के स्तर पर समुद्री स्पंज (Sea Sponge) और इंसान दोनों के जीनोम (Genome) में समानता चौंकाने वाली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
डीएनए (DNA) के स्तर पर समुद्री स्पंज (Sea Sponge) और इंसान दोनों के जीनोम (Genome) में समानता चौंकाने वाली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मानव विकास क्रम (Human Evolution) के 70 करोड़ साल में पहली बार शोधकर्ताओं ने इंसानी जीनोम (Human Genome) और समुद्री स्पंज (Sea Sponge) के डीएनए (DNA) में खास समान तत्व पाए हैं जो भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 8:10 PM IST
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एक जैली जैसे समुद्री स्पंज (sea sponge) ने इंसान के जीनोम (Human Genome) के एक मुश्किल हिस्से में प्रकाश डालने में मदद की है. एक बायोमेडिकल और हेल्थकेयर संबंधी शोध में यह खुलासा हुआ है.  ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि इंसान (Human) और संभव है कि पूरे पशु जगत (Animal Kingdom) एक जैली जैसे समुद्री स्पंज से एक अहम जेनेटिक प्रक्रिया (Genetic mechanism) साझा करता है जो ग्रेट बैरियर रीफ (Great Barrier Reef) में पाया जाता है.

जीनोम के खास तत्वों की जानकारी
साइंस टुडे में प्रकाशित  इस शोध में इंसानी जीनोम के कुछ तत्वों का खुलासा हुआ है. जीनोम किसी जीव के पूरे डीएनए का रिकॉर्ड होता है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि इंसानी जीनोम के प्रागैतिहासिक समुद्री स्पंज के डीएनए की ही तरह काम करते हैं. यह प्रक्रिया जो जीन की अभिव्यक्ति को संचालित करती है, पशु जगत की प्रजातियों में जाति विविधता में अहम भूमिका निभाती है. इसलिए यह विकासक्रम के 70 करोड़ सालों तक कायम रहा.

इस तरह से कभी नहीं सोचा गया
विक्टर चांग कार्डिएक रिसर्च इंस्टीट्यूट के UNSW की वैज्ञानिक डॉ एमिली वॉन्ग का कहना है किस रहस्य के खुलासा होने की बहुत अधिक अहमियत है. उन्होंने कहा कि विकासक्रम में  यह आधारभूत खोज के साथ ही जेनिटिक बीमारियों के समझने के लिहाज से भी अहम है. इसके बारे में कभी सोचा ही नहीं गया था. यह बहुत ही दूर की कौड़ी जैसा था, लेकिन चूंकि इसमें खोने के लिए कुछ नहीं था इसलिए हम इसने यह अध्ययन किया.“



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DNA की जटिलता को देखते हुए यह एक बड़ी खोज (Discovery) मानी जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay) (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या किया गया शोध में
अपने शोध के बारे में बताते हुए डॉ एमिली वॉन्ग ने बताया, “हमने हेरॉन द्वीप पर ग्रेट बैरियर रीफ से समुद्री स्पंज के कुछ नमूने जमा किए. क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी में हमने डिएनए के नमूने लिए और उन्हें एक जेब्राफिश के भ्रूण की एक कोशिका में डाल दिया. जेब्राफिश को नुकसान पहुंचाए बिना हमने विक्टर चांग कार्डिएक रिसर्च इंस्टीट्यूट के सैकड़ों भ्रूणों में यही प्रक्रिया दोहराई. ऐसा ही हमने कुछ चूहों और इंसानों के डीएनए नमूनों के साथ भी किया.

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नतीजों ने किया हैरान
डॉ वांग का कहना है कि करोड़ों सालों के विकासक्रम में स्पंज और इंसान के बीच कोई समानता न होने के बाद भी टीम ने कुछ जीनोम निर्देशों के कुछ समान हिस्से पाए जो दोनों ही प्राणियों में जीन अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करते हैं. उन्होंने बताया, “इन नतीजों ने तो हमें हैरान कर दिया.”

जीन अभिव्यक्ति के लिए जिम्मेदार
वैज्ञानिकों को अनुसार डिएनए के वे हिस्से जीन की अभिव्यक्ति के लिए जिम्मेदार हैं बहुत मुश्किल से पकड़े, समझे और अध्ययन किए जाने के लिए बदनाम हैं. वे इंसानी जीनोम का बहुत अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने इन जेनेटिक डार्क मैटर को हाल ही में समझना शुरू किया है. डॉ वान्ग ने बताया कि उनकी टीम की दिलचस्पी खास ‘एन्हान्सर्स’ में दिलचस्पी है. ये एक खास इलाके हैं जिन्हें केवल जीनोम सीक्वेंस के जरिए खोज निकालना बहुत मुश्किल था क्योंकि अबतक पशु जगत में एक भी डीएनए स्वीक्वेंस एनहांसर नहीं मिल सका है.

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यह खोज बायोमेडिकल (Biomendical) क्षेत्र में एक अहम भूमिका निभाने वाली मानी जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


लंबे सफर की दिशा में अहम कदम
डॉ वान्ग का मानना है कि अभी यह पता करने में बहुत कुछ किया जाना है कि गैसे डीएनए स्वास्थ्य और बीमारियों को आकार देते हैं, लेकिन उनका शोध इस दिशा में अहम कदम है." डॉ वॉन्ग के पति, सेंटनरी इंस्टीट्यू के एसोसिएट प्रोफेसर और इस शोध के सहलेखक मिथायस फ्रेंकोइस बताते हैं कि यह काम बहुत ही रोचक रहा क्योंकि इससे इंसान के जीनोम को समझने में बहुत मदद मिली जो जीवन की बहुत ही जटिल और हमेशा ही बदलने वाली निर्देश पुस्तिका है.”

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फ्रेंकोइस का कहना है कि टीम ने एक पुरानी जीन पर अपना ध्यान केंद्रित किया जो हमारे नर्वस सिस्टम के लिए अहम हैलेकिन  जिसने हृदय के विकास के लिए प्रमुख जीन का को बनाया है. इस शोध से शोधकर्ताओं को बायोमेडिकल और भविष्य की स्वास्थ्य देखरेक सुविधाएं विकसित करने में सहायता मिलेगी. कुछ अन्य वैज्ञानिक भी इस शोध को भविष्य के लिए बहुत उपयोगी मान रहे हैं.
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