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जानिए कैसे पता लगा कि हमारे सूरज में होती है एक और Fusion प्रक्रिया

सूर्य (Sun) में एक ही नाभकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रक्रिया नहीं होती, वैज्ञानिकों ने छोटे कणों से दूसरी प्रक्रिया का पता लगाया. (तस्वीर: Pixabay)
सूर्य (Sun) में एक ही नाभकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रक्रिया नहीं होती, वैज्ञानिकों ने छोटे कणों से दूसरी प्रक्रिया का पता लगाया. (तस्वीर: Pixabay)

सूर्य (Sun) में नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की दो तरह प्रक्रियाएं (Process) चल रही है. इस नई पड़ताल से वैज्ञानिकों को सूर्य और तारों के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 7:37 PM IST
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अभी तक वैज्ञानिकों को यही पता था कि हमारे सूर्य (Sun) में नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया होती है. लेकिन शायद ही किसी को उम्मीद होगी कि यह जानकारी अधूरी होने के साथ कुछ चौंकाने वाली भी होगी. सूर्य के ताजा अध्ययन से पता चला है कि उसमें एक दूसरी संयलन प्रक्रिया (Secondary Fusion Process) भी चल रही है. शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि इस दूसरी प्रक्रिया की सूर्य के ऊर्जा उत्पादन (Energy Production) में कितनी भागीदारी है.

इस कण की मौजूदगी से पता चला
इटली के बोरेक्सीनो पार्टिकल डिटेक्टर में काम कर रहे है खगोलविदों ने घोषणा की है कि उन्होंने सूर्य पर न्यूट्रिनोस (Neutrinos) नाम का कणों की उपस्थिति पाई है जो उसके द्वितीयक संयलयन प्रक्रिया (Secondary fusion process) में दिखाई दिया है. इस प्रक्रिया को CNO चक्र कहते हैं. सूर्य इस तरीके से भी हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है, लेकिन यह सूर्य का प्रमुख संलयन प्रक्रिया नहीं है.

क्या होते हैं न्यूट्रीनो
न्यूट्रीनो एक आधारभूत कणों के समूह होते हैं जिनका कोई आवेश नहीं होता, बहुत ही कम द्रव्यमान या भार होता है, लेकिन बहुत सारी ऊर्जा होती है. इससे पहले सूर्य में के प्राथमिक संलयन प्रक्रिया में इन्हें पाया गया था. इस प्रक्रिया को प्रोटोन-प्रोटोन (P-P) चेन रिएक्शन कहते हैं. लेकिन द्वितीयक प्रक्रिया में पहली बार उनकी उपस्थिति पाई गई है.



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सूर्य (Sun) से मिली जानकारी से वैज्ञानिकों को दूसरे तारों (Stars) के बारे में काफी जानकारी मिलती है. (फाइल फोटो)


कहां हुआ ये प्रयोग
यह नई पड़ताल सूर्य से भारी तारों में होने वाली संलयन प्रक्रिया के बारे में और ज्यादा जानकारी दे सकती है जिनमें CNO चक्र प्रमुख तौर पर काम करता है. बोरेक्सीनो कोलेबोरेशन टीम की यह पड़ताल नेचर जर्नल में हाल ही में प्रकाशित हुई है. बोरेक्सीनो साइंटिफिक कोलेबेरेशन इटैलियन नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूक्लियर फिजिक्स के ग्रान सासो नेशनल लैबोरेटरी में किया गया प्रयोग है. यह लैब दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड लैब है जो न्यूट्रीनों और एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स के अन्य पहलुओं का अध्ययन करती है.

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सूर्य पर संलयन कैसे होता है
सूर्य के बराबर या उससे 1.3 गुना वजनी किसी तारे में P_P चेन रिएक्शन होती है.  तारों की न्यूक्लोसिंथेसिस (Stellar Necleosynthesis) प्रक्रिया से उनमें तत्वों का निर्माण होता है. यह प्रक्रिया दो हाइड्रोजन परमाणुओं के मिलने सेहोती है जो ड्यूटेरियम के रूप में होते हैं जो कि हाइड्रोजन का एक आइसोटोप होता है. इसके बाद स्थायी हीलियम-4 का निर्माण होता है.

एक अन्य प्रक्रिया
P_P चेन रिएक्शन में केवल हाइड्रोजन और हीलीयम की भागीदारी होती है.लेकिन उच्चतर तापमानों में लीथियम, बेरीलियम और बोरोन भी शामिल हो जाते हैं. इसके अलावा दूसरी तरह की संलयन प्रक्रिया में कार्बन-नाइट्रोजन-ऑक्सीजन (CNO) चक्र (Cycle) होता है जिसमें पीरियोडिक टेबल के अगले तीन तत्व शामिल होते हैं. ये तीन तत्व और हाइड्रोन आपस में प्रतिक्रिया करते हैं जिसके नतीजे में स्थायी हीलियम-4 बनता है.

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अब तक माना जाता था की सूर्य (Sun) में केवल P-P चेनरिएक्शन वाली संलयन प्रक्रिया (Fusion Process) ही होती है.


तापमान की भूमिका
कम तापमान में  P-P चेन रिएक्शन हावी रहता है. लेकिन उच्च तापमान में, जैसा कि बहुत ही गर्म केंद्र (Core) वाले विशालकाय तारों में होता है, तापमान 2 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है. यहां सीएनओ चक्र प्राथमिक संलयन प्रक्रिया हो जाती है. हमारे सूर्य के केंद्र में 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान होता है.

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यह अनोखी बात
इस मामले में द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार तारे के भार से तय होता है कि उसके केंद्र में तापमान कितना ज्यादा होता है. इस तापमान से पता चलता है कि तारे में P-P चेन रिएक्शन प्रमुख है या CNO चक्र. यह माना गया था कि सूर्य के केंद्र का तापमान CNO चक्र के लिए पर्याप्त नहीं है और सूर्य में P-P चेन ही प्रमुख संलयन प्रक्रिया होगी. लेकिन ये नतीजे पहली बार इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि सूर्य की संपूर्ण ऊर्जा उत्पादन में CNO चक्र की कितनी भूमिका होती है जो कि हमारे सूर्य के मामले में केवल एक प्रतिशत है.
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