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क्या था रूस के सीक्रेट शहरों में, जो उन्हें देश के नक्शे से ही गायब कर दिया गया

रूस के न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन ने चिंता जताई है कि देश के न्यूक्लियर शहर भी संक्रमण के घेरे में हैं
रूस के न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन ने चिंता जताई है कि देश के न्यूक्लियर शहर भी संक्रमण के घेरे में हैं

रूस के 3 खुफिया शहर (secret cities in Russia) भी कोरोना की चपेट (corona infection) में आ चुके हैं. ये वे शहर हैं, जो लंबे वक्त तक देश के नक्शे में भी नहीं जोड़े गए थे ताकि इनके बारे में किसी को पता न लगे. ऐसा क्या सीक्रेट है इन शहरों?

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हाल ही में रूस के न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (nuclear corporation of Russia) ने चिंता जताई है कि देश के न्यूक्लियर शहर (nuclear cities) भी संक्रमण के घेरे में हैं. इनमें से एक शहर वो हैं, जहां की सीक्रेट लैब में सोवियत एटॉमिक बम तैयार हुआ . बड़े-बड़े मिलिट्री कॉम्प्लैक्स की शक्ल में बसे इन खुफिया परमाणु शहरों में अब अस्पतालों और personal protective equipment (PPE) की कमी महसूस की जा रही है. इसके साथ ही ये खुफिया शहर एक बार फिर चर्चा में हैं.

बता दें कि कोरोना संक्रमण के मामले में रूस दूसरे यूरोपीय देशों से आगे निकल चुका है. यहां कुल आंकड़े 2 लाख 62 हजार से ऊपर जा चुके हैं. जबकि अप्रैल के पहले हफ्ते तक भी रूस का कहना था कि उसके यहां हालात काबू में हैं.  वहीं लगातार बिगड़ते हालात के दौरान भी प्रेसिडेंट ने कहा कि चूंकि वायरस की रफ्तार धीमी करने के लिए दिए गए 6 हफ्ते खत्म हो चुके हैं, लिहाजा लॉकडाउन धीरे-धीरे खोलने की शुरुआत की जाएगी. इस एलान के साथ ही 12 मई से लॉकडाउन पर से प्रतिबंध हटाना शुरू भी हो गया.

सरोव के साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सपेरिमेंटल फिजिक्स में रूस का पहला न्यूक्लियर बम तैयार किया गया




हालांकि रूस की चिंता की नई वजह उसके परमाणु शहरों का भी बीमारी की चपेट में आना है. देश की रोजाटॉम कॉर्पोरेशन (Rosatom corporation) इन शहरों की व्यवस्था देखती है. उसके मुख्य एलेक्जाई लिखाचेव (Alexei Likhachev) ने बताया कि ऐसे ही एक शहर सरोव (Sarov) में कोरोना के मामले बढ़े हैं. साथ ही साथ Elektrostal और Desnogorsk शहर भी कोरोना की चपेट में हैं.
ये तीनों ही शहर एक वक्त पर सोवियत के खुफिया लैब्स का काम करते रहे, जब वो परमाणु हथियार के लिए अमेरिका से होड़ में था. सरोव के साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सपेरिमेंटल फिजिक्स में रूस का पहला न्यूक्लियर बम तैयार किया गया था. तब किसी को खबर न हो, इसके लिए तीनों ही शहरों को नक्शे में भी नहीं दिखाया गया था. साल 1990 में सोवियन यूनियन के बंटने के दौरान पहली बार दुनिया को इन खुफिया शहरों के बारे में पता चला कि ऐसे भी कोई शहर हैं. तब वहां तक ट्रेन या बसें भी नहीं जाती थीं, बल्कि पास के साथ बेहद खास लोग ही वहां पहुंच सकते थे. ये लोग परमाणु हथियारों पर काम कर रहे वैज्ञानिक, उनका परिवार और रूस में बड़े ओहदों पर बैठे लोग थे.

चिट्ठियां पहुंच सकें, इसके लिए यहां का खास पोस्टल कोड हुआ करता था, जैसे सरोव का पोस्टल कोड था- Arzamas-16. कोई नहीं जानता था कि वहां कौन रहते हैं और क्या करते हैं.

सीक्रेट शहरों में न्यूक्लियर वेपन पर काम कर रहे टॉप साइंटिस्ट और उनके परिवार होते हैं


वैसे इन सीक्रेट शहरों में न्यूक्लियर वेपन पर काम कर रहे टॉप साइंटिस्ट और उनके परिवार होते हैं. साथ में उनकी मदद जैसे घरेलू कामों और खरीदारी के लिए स्टाफ रखा जाता. शहरों के भीतर ही स्कूल और मनोरंजन की चीजें मिलतीं. सब कुछ ऐसे बना हुआ है कि किसी को बाहर जाने की जरूरत न पड़े. न्यूक्लियर हथियारों पर काम लेने से पहले वैज्ञानिकों से कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया जाता, जिसमें अपनी पहचान जाहिर न करने की शपथ होती. गोपनीयता का ये अनुबंध एक बार दस्तखत के बाद पूरी जिंदगी लागू रहता है, चाहे वैज्ञानिक रिटायर ही हो जाएं. यहां तक कि उन्हें वोट करने का भी अधिकार नहीं रहता है. बदले में सरकार उन्हें और उनके परिवार को काफी सुविधाएं देती.

Sarov, Elektostal और Desnogorsk नामक इन तीन शहरों में अब भी जिंदगी प्रतिबंधित है. यहां रूस के टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट हैं, जहां किसी न किसी खुफिया अभियान की तैयारी चलती रहती है. सरोव शहर खासतौर पर पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बाड़े से घिरा हुआ है और पुलिस की पेट्रोलिंग चलती रहती है. यहां कोई भी बिना पास के भीतर नहीं जा सकता. पिछले ही साल 2019 में यहां की लैब में काम करने वाले 5 वैज्ञानिक मारे गए. किसी को नहीं पता कि असल में क्या हुआ था, हालांकि रूस की सरकार का कहना है कि वे एक रॉकेट इंजन टेस्ट के दौरान मारे गए.

नब्बे के वक्त में सोवियत संघ के टूटने के बाद ये खुफिया शहर खाली होने लगे लेकिन प्रेसिडेंट व्लादीमिर पुतिन ने सत्ता संभालते ही इन शहरों पर ध्यान देना शुरू कर दिया. अब यहां पर परमाणु हथियारों के निवेश के लिए दोबारा खूब पैसा लगाया जा रहा है.

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