भूकंपीय तरंगों से ‘दिखे’ जमीन के नीचे के रासायनिक बदलाव, जानिए क्या होगा फायदा

भूकंपीय तरंगों से ‘दिखे’ जमीन के नीचे के रासायनिक बदलाव, जानिए क्या होगा फायदा
भूकंपीय तरंगों से पहली बार पानी और उससे संबंधित रासायनिक क्रियाओं की जानकारी हासिल की गई है. (कॉन्सेप्ट इमेज)

वैज्ञानिकों ने अध्ययन से पाया कि भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) से वे जमीन के नीचे जमे पानी पर होने वाले रासायनिक परिवर्तन (Chemical Changes) देख सकते हैं.

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अभी तक भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) का उपयोग केवल भूकंप (Earthquake) और भूकंपीय गतिविधियों (Seismic Activities) का मापने तक ही सीमित माना जाता था. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पाया कि ये तरंगे पृथ्वी के अंदर के रासायनिक प्रतिक्रियाओं (Chemical Reactions) के बारे में जानकारी तो दे ही सकती हैं, यह पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) को बनाए रखने में भी मददगार होती हैं.

इन तरंगों का प्रभाव
पेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने यह अध्ययन किया है. उन्होंने पाया है कि भूकंपीय तरंगें केवल जमीन के नीचे देखने का ही काम नहीं करती हैं. चूंकि जमीन के अंदर पाए जाने वाली पानी की गुणवत्ता को कई तरह के रासायनिक प्रतिक्रियाओं का प्रभाव पड़ता है. इसलिए इन तरंगों के जरिए इस पानी की सुरक्षा भी की जा सकती है. पेन यूनिवर्सिटी की अर्थ एंड एनवायर्नमेंटल सिस्टम इंस्टीट्यूट (EESI) की निदेशक और जियोसाइंस की प्रोफेसर सूजन ब्रैंटली ने इस अध्ययन के बारे में बताया.

जमीन के नीचे पानी की मौजूदगी
पेन स्टेट न्यूज में प्रकाशित लेख के अनुसार, सूजन ने बताया, “फिलहाल हम नहीं जानते कि पृथ्वी की सतह के नीचे पानी कहां कहां मौजूद है और वह कैसे यहां वहां होता है. लेकिन इस शोध में हमने जमीन के नीचे का अध्ययन करने के लिए  इंसान के द्वारा पैदा की भूकंपीय तरंगों का उपयोग किया है जो भूकंप के दौरान पैदा होने वाली तरंगों जैसी ही हैं.“



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अब तक ये तरंगे केवल भूकंप के बारे में ही जानकारी देती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या होती हैं ये तरंगें
भूकंपीय तरंगे वे ऊर्जा की तरंगे होती हैं जो पृथ्वी से होकर गुजरती हैं और विशेतः भूंकप के समय या भूकंपीय गतिविधियों से पैदा होती हैं. वैज्ञानिक उनका अध्ययन यह जानने के लिए करते हैं पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना कैसी है. वे इस आधार पर ये जानकारी हासिल करते हैं कि ये तरंगें कैसे आगे बढ़ती है, परावर्तित, और प्रतिबिंबित होती हैं. आमतौर पर दो तरह की भूकंपीय तरंगे होती है, काय तरंगे (Body waves) और सतह तरंगे (Surface waves). जहां काय तरंगें  पृथ्वी के अंदर तक चली जाती हैं सतह तरंगे केवल सतह पर ही चलती हैं.

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क्या किया प्रयोग
प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अपने उपकरण ससक्वेहाना सेल हिल्स क्रिटिकल जोन ऑबजर्वेटरी की रिसर्च साइट पर 115 फीट गहरे गड्ढे में उतारे. इस उपकरण ने भूकंपीय तरंगे पैदा की और हर दिशा में भेजी. शोधकर्ताओं ने तरंगों की गति मापी  और देखा कि उसकी गति में क्या बदलाव आता है.

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इन तरंगों से पृथ्वी की सतह के नीचे पानी पर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं भी देखी जा सकती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे किया अध्ययन
यदि तरंगों की गति तेज है तो इसका मतलब हुआ कि वे ठोस एचट्टानों और छिद्रों में भरे पानी के जरिए तेजी से गतिमान हैं. वहीं दूसरी तरफ अगर गति कम मिलती है तो इसका मतलब यह होता है कि तरंगें अवसादी शैलों से होकर जा रही हैं जहां चट्टानों या मिट्टी के छिद्रों में हवा भरी है.  टीम ने पाया कि तरंगे यह तक देख सकती हैं कि क्या पानी ने मिट्टी से प्रतिक्रिया कर छोटेमोटे बदलाव किए हैं या नहीं.

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शोधकर्ताओं ने अपने आंकड़ों का मिलान साल 2016 और 2013 के आंकड़ों से किया.  ब्रैन्टले ने कहा, “ताजा आंकड़ों और हमारी जियोकैमिकल और जियोफिजिकल अवलोकनों के आधार पर हमने पाया कि इस इलाके में चट्टानों के अंदर पानी मौजूद है.
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