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सेंटिनल द्वीप मामला 3: जब आदिवासियों ने तीरों से किया हेलिकॉप्टर का स्वागत

News18Hindi
Updated: November 23, 2018, 7:38 PM IST
सेंटिनल द्वीप मामला 3: जब आदिवासियों ने तीरों से किया हेलिकॉप्टर का स्वागत
सांकेतिक तस्वीर

त्रिलोकीनाथ पंडित ने कई बार इस द्वीप के लोगों से संपर्क साधने का प्रयास किया. 1991 में उन्हें कुछ सफलता भी मिली. 2006 में केकड़ों का शिकार कर रहे दो चोर शिकारी इस द्वीप के करीब आ फंसे थे. सेंटिनल आदिवासियों ने उन्हें अगली ही सुबह मार दिया था.

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  • Last Updated: November 23, 2018, 7:38 PM IST
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पिछले 150 सालों में कम से कम छह बार ऐसा हुआ है जब लोगों ने सेंटीनल द्वीप में घुसने की कोशिश  की और हर बार इसके नतीजे काफी खतरनाक रहे. हम आपको ये सभी घटनाएं तीन किश्तों की सीरीज में दे रहे हैं. पढ़िए पांचवी और छठी घटनाएं.

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देशों और महाद्वीपों के बीच कम्युनिकेशन दिनोंदिन आसान के होने के चलते कभी-कभी कहा जाता है कि दुनिया सिकुड़ती जा रही है. लेकिन इस छोटी होती दुनिया में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने हिस्से की जमीन को केवल अपने लिए बचाए रखना चाहते हैं. ऐसे ही हैं, नॉर्थ सेंटिनल द्वीप के निवासी.

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1991: टीएन पंडित सफल हुए
23 वर्गमील के द्वीप में बसी इस जनजाति के कितने लोग बचे हैं, कोई भी सही से नहीं बता सकता. लेकिन फिर भी 40 से 500 के बीच इनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है.

मानव विज्ञानी त्रिलोकीनाथ पंडित ने 1970 के बाद कई बार इस द्वीप के लोगों से संपर्क साधने का प्रयास किया. अंतत: उन्हें 1991 में कुछ हद तक सफलता मिली. पंडित अपने दल के साथ तट पर उतरे और करीब 28 आदिवासियों के एक दल से मिले. इस दल में आदमी, औरत और बच्चे सभी शामिल थे.इसके बावजूद, सेंटिनल आदिवासियों ने यह साफ कर दिया कि बाहरी वहां आकर क्या करेंगे, क्या नहीं, इस पर बहुत से प्रतिबंध हैं. जिसके चलते उनके दल के कई सदस्य एक डोंगी में चढ़े और वापस जाने लगे. जबकि पंडित वहीं रुक गये. इसके बाद एक आदिवासी ने चाकू निकाल लिया और उससे पंडित को वापस जाने के लिए डराया. सेंटिनल नहीं चाहते थे कि पंडित वहां रुकें, जबकि उनके साथी वापस जा रहे हैं. इसलिए उनके साथी वापस आए और पंडित को भी साथ लेकर गए.

वहां पर कुछ देर ठहरने और इतनी प्रगति के बावजूद यह तय किया गया कि इन आदिवासियों के साथ आगे संपर्क किया जाना सही नहीं होगा.

एक ऐसा समूह जो बाहरी दुनिया के लिए इतना ज्यादा प्रतिरोध रखता हो. उनके अध्ययन से जो बीमारियां हो सकती थी, उन्हें उनके बारे में भी पता चला जैसा कि उनके अंग्रेजों के साथ 1880 में पहली बार संपर्क में आने के बाद हुआ था.

2006: नशे में एक चोर शिकारी इनके काफी करीब पहुंच गया था
पंडित से इनके संपर्क के बाद ही भारत सरकार ने इस द्वीप को नियम बनाकर एक अलग जोन घोषित कर दिया. इन नियमों को तोड़ने पर भारी  जुर्माना भरना पड़ता और जेल जाना पड़ता. इसके बावजूद दो चोर शिकारी इसमें 2006 में घुस आए. वे केकड़ों का शिकार कर रहे थे. जैसे ही रात हुई, वे इस द्वीप से कुछ दूर अपना लंगर डालकर शराब पीने लगे.

कुछ देर में समुद्र में डाला उनका लंगर खुल गया. वे लोग सोए हुए थे तो धीरे-धीरे नाव तैरते हुए कोरल रीफ के पास तक आ गई. अगली ही सुबह उन्हें सेंटिनल आदिवासियों ने मार दिया. आदिवासियों ने तट पर ही उनकी शवों को दफना दिया. जब एक हेलिकॉप्टर उनके शवों को लेने आया तो आदिवासियों ने उसका स्वागत भी तीरों के हमले से किया.

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भारत सरकार मानती है कि इस द्वीप पर रहने वाले लोगों की इस द्वीप पर संप्रभुता है और उनके पास इसकी सीमाओं की रक्षा का अधिकार भी है. किसी भी आदिवासी पर शिकारी चोरों की हत्या के लिए कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा. वैसे भी किसी तरह से आदिवासी के ऊपर हत्या का मुकदमा चलाना गले के नीचे न उतरने वाली चीज है.

इस घटना के बाद से इस जनजाति से कोई भी बाहरी संपर्क नहीं साधा गया था. एअरक्राफ्ट और सैटेलाइट वैसे इस द्वीप पर नज़र रखते हैं ताकि यह पता चल सके कि किसी बड़े तूफान या बाढ़ से लोगों को बहुत नुकसान तो नहीं हुआ है. लेकिन यह तय है कि ये लोग किसी बाहरी का अपने मामलों में हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं.

इस किश्त की बाकी चार घटनाएं-

सेंटिनल द्वीप मामला 1: जब अंग्रेजों के रुख ने सेंटिनल आदिवासियों को आक्रामक बना दिया

सेंटिनल द्वीप मामला 2: जब सेंटिनल आदिवासियों ने किया था नेशनल ज्यॉग्राफिक टीम पर हमला

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First published: November 23, 2018, 7:38 PM IST
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