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सेंटिनल द्वीप मामला 2: जब सेंटिनल आदिवासियों ने किया था नेशनल ज्यॉग्राफिक टीम पर हमला

News18Hindi
Updated: November 23, 2018, 6:49 PM IST
सेंटिनल द्वीप मामला 2: जब सेंटिनल आदिवासियों ने किया था नेशनल ज्यॉग्राफिक टीम पर हमला
सांकेतिक तस्वीर

1974 में नेशनल ज्यॉग्राफिक टीम इस द्वीप के आदिवासियों पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के सिलसिले में वहां गई थी. उनका स्वागत तीरों की बौछार से हुआ था. 1981 में एक सामान ढोने वाला जहाज़ इस द्वीप के पास कोरल रीफ में फंस गया था. जिस दौरान जहाज चालक की आंख लग गई. जब वह जागा तो आदिवासी उसके जहाज की ओर धनुष-बाण ताने खड़े थे.

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  • Last Updated: November 23, 2018, 6:49 PM IST
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पिछले 150 सालों में कम से कम छह बार ऐसा हुआ है जब लोगों ने सेंटीनल द्वीप में घुसने की कोशिश की और हर बार इसके नतीजे काफी खतरनाक रहे. हम आपको ये सभी घटनाएं तीन किश्तों की सीरीज में दे रहे हैं. पढ़िए तीसरी और चौथी घटनाएं.

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अंडमान के करीब सेंटिनल द्वीप इन दिनों चर्चाओं में है. वजह है एक अमेरिकी नागरिक की द्वीप के आदिवासियों द्वारा हत्या. ये आदिवासी उसी तरह रह रहे हैं जिस तरह हजारों साल पहले लोग जंगलों में रहते थे.


1974: जब इन आदिवासियों ने किया नेशनल ज्यॉग्राफिक की टीम पर अटैक
यहां के लोग दूसरे किसी नागरिक को अपने इलाके में घुसने नहीं देना चाहते. कई लोगों ने सेंटिनल्स आदिवासियों से मिलने, उनके बारे में लिखने की कोशिश की. लेकिन कोई भी पूरी तरह से सफल नहीं रहा. जब भी किसी बाहरी व्यक्ति ने इस जनजाति के लोगों से कांटैक्ट करने की कोशिश की और या तो मुसीबत आई या फिर मौतें हुईं.

जब इस जनजाति की ख्याति दूर-दूर तक फैली तो नेशनल ज्यॉग्राफिक ने एक टीम इन पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए भेजी. जैसी ही नेशनल ज्यॉग्राफिक टीम ने द्वीप के पास मौजूद कोरल रीफ की पट्टी पार की, उनका स्वागत तीरों की बौछार से हुआ.
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लेकिन वे इससे बच गए और फिर भी तट तक गए. बाद में डॉक्यूमेंट्री टीम के साथ जो पुलिस वाले थे, वे तट पर उतरे और उन्होंने इन लोगों के लिए कुछ गिफ्ट छोड़ दिए. ये इसलिए थे ताकि अगली बार जब दोनों का सामना हो तो इतना आक्रामक माहौल न बने. ये गिफ्ट बहुत ही रोचक थे. इनमें एल्यूमिनियम के बर्तन, एक खिलौना कार, नारियल, एक गुड़िया और जिंदा लेकिन बंधा हुआ सुअर शामिल था.

जब पुलिस वाले ऐसा कर रहे थे, पेड़ों की पंक्तियों के पीछे से एक बार फिर तीरों की बौछार हुई. इस बार डॉक्यूमेंट्री के डायरेक्टर की जांघ में एक तीर आकर लगा. इसके बाद सारे तेजी से नावों की ओर भागे. क्रू के लोग बताते हैं कि जिस आदमी का तीर डायरेक्टर को लगा था, वह तीर लगने के बाद जोर से हंसा और बाकि के आदिवासियों ने तबतक तीर चलाने जारी रखे जब तक सारे लोग वहां से भाग नहीं गए.

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1981: प्रिमरोज जहाज की दुर्घटना
इस साल भारत में मानसून के मौसम में प्रिमरोज नाम का एक समान ढोने वाला जहाज इस द्वीप के पास की एक कोरल रीफ में जा फंसा. इसपर 28 नाविक भी सवार थे. वे यहां फंसे हुए केवल इंतजार ही कर सके थे, इसलिए जहाज चालक सो गया.

जब चालक जागा तो उनसे देखा कई सारे आदिवासी उसके जहाज की ओर धनुष-बाण ताने खड़े हुए थे. तुरंत उसने पास के हांग-कांग के तटीय इलाके में मैसेज ब्रॉडकास्ट किया. वो चाहता था कि तुरंत बमों की बारिश की जाए ताकि जहाज पर मौजूद लोगों को बचाया जा सके. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और एक दिन गुजर गया. अगले दिन हालत और खराब हो चुकी थी क्योंकि सेंटिनल लोग जहां कोरल रीफ में यह जहाज फंसा हुआ था, वहां आने के लिए जहाज तैयार कर रहे थे.

वहीं तेज चक्रवात के चलते बमवर्षा के लिए प्लेन भेजना भी आसान नहीं था. हालांकि ऐसे मौसम में सेंटिनल आदिवासी भी वहां तक पहुंचने में नाकाम रहे थे. एक हफ्ते तक जहाज पर लोग वैसे ही फंसे रहे जब तक हेलिकॉप्टर ने आकर उन्हें बचाया नहीं. यहां तक कि जब हेलिकॉप्टर फंसे लोगों को निकालने के लिए चक्कर लगा रहा था, तब भी ये लोग उसपर तीर चला रहे थे ताकि उसे गिराया जा सके.

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First published: November 23, 2018, 6:37 PM IST
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