कोरोना वायरस वैक्सीन बनने के बाद भी कम नहीं हैं चुनौतियां, समझें कैसे

कोरोना वायरस वैक्सीन बनने के बाद भी कम नहीं हैं चुनौतियां, समझें कैसे
एक कंपनी ने कोरोना वायरस में 99 फीसदी कारगर वैक्सीन बनाने का दावा किया है.

पूरी दुनिया का ध्यान कोरोना वायरस (Corona virus) के इलाज और वैक्सीन (Vaccine) पर है, लेकिन इसके बाद भी चुनौतियां कम कठिन नहीं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2020, 5:58 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) के बढ़ते प्रकोप के बीच दुनिया में सभी की निगाहें इसके इलाज की खोजों पर लगी हैं चीन के वुहान शहर से दुनिया भर में फैली यह बीमारी 210 देशों को खौफजदा कर चुकी है. मलेरिया से लेकर कई बीमारियों में काम आने वाली दवाओं पर ट्रायल चल रहे हैं. इसी बीच कई शोधकर्ताओं को अंदेशा है कि वैक्सीन (Vaccine) की खोज के बाद कई तरह की चुनौतियां होंगी.

वैक्सीन बनने के बाद भी क्या वह सभी को मिल जाएगी
फिलहाल ज्यादातर शोधकर्ता इस बात पर सहमत हैं कि कोरोना वायरस के इलाज और वैक्सीन पता लगाने में 12 से 18 महीने का समय लग सकता है. लेकिन उनका यह भी मानना है कि दुनिया के हर मरीज तक यह दवा या वैक्सीन पहुंचना संभव न हो. नेचर में प्रकाशित लेख के अनुसार इस मामले में कई बाधाएं भी आ सकती है.

कई चुनौतियां होंगी इसके उत्पादन की



इस मामले में उत्पादन क्षमताएं कई बातों पर निर्भर करेंगीं. दवा कैसे बनेगी. इसका उत्पादन कितना आसान या मुश्किल होगा.क्या दवा बनाने वाली कंपनियां दवा बनाने में सक्षम होंगी और उन्हें सक्षम बनने में कितनी परेशानी आ सकती हैं. क्या वे अपनी उत्पादन क्षमता जरूरत के मुताबिक बढ़ा सकेंगी. ऐसे कई सवाल होंगे.



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कोरोना वायरस की वैक्सीन की खोज के लिए कई उपाय अपनाए जा रहे हैं.


सरकारों को भी करना होगा यह काम
कई शोधकर्ताओं का मानना है कि सरकार और निजी धन सहायता देने वालों को पहले से ही वैक्सीन उत्पादकों को उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने  के लिए मदद करना चाहिए. दवा या वैक्सीन उत्पादन के लिए संसाधान जुटाने का अन्य दवाओं या वैक्सीन उत्पादन पर भी असर होना तय है.  दवा उत्पादन कंपनियां दुनिया के लिए लाखों की संक्या में इंफ्लूएंजा वैक्सीन हर साल बना सकती हैं. कंपनियों को मांग बढ़ने पर खास दवा का उत्पादन बढ़ाने की भी आदत है.

बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सकता है चुनौती
डब्ल्यूएचओ को सलाह देने वाले लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन पैनल के प्रमुख डेविड हेमन का कहना है, ”यदि करोड़ों लोगों को कोविड-19 जैसी बीमारी के लिए नई वैक्सीन की जरूरत पड़ी और कंपनियां अपनी आम दवाएं उसी तरह से बनाती रहीं तो उत्पादन की समस्या हो सकती है और दवाओं की कमी हो जाना तय है.”

आसान नहीं है यह मामला
विश्व स्वास्थ्य संगठन वैक्सीन के समान वितरण पर कार्ययोजना बना रहा है लेकिन इसके कैसे लागू किया जाएगा यह अभी तय नहीं है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की इकोनॉमिस्ट मारियाना मैजुकैटो का कहना है कि सभी चाहेंगे कि महामारी में दवा कुछ गिने चुने देशों के लिए नहीं बल्कि सभी को उपलबध हो. वहीं विशेषज्ञों में यह भी चिंता है कि आपूर्ति में राजनैतिक और अन्य व्यवहारिक बाधाएं चिंता का कारण हो सकती हैं.

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कोरोना वायरस की वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन एक चुनौती होगी. (सांकेतिक फोटो)


वैक्सीन कैसे बनती है इस पर बहुत कुछ होगा निर्भर
सबसे बड़ी चुनौती है कि जल्द से जल्द बड़े पैमाने पर वैक्सीन बनाने में उत्पादन बढ़ाने की क्षमता बढ़ाना. इसके लिए जरूरी व्यवस्था वैक्सीन के प्रकार पर बहुत निर्भर करेगी. हो सकता है कि वैक्सीन कमजोर और निष्क्रिय कोरना वायरस के रूप से बने. वह DNA या RNA के सीक्वेंस के हिस्से से बन सकती है या सतही प्रोटीन के किसी भाग से बन सकती है. वह किसी दूसरे वायरस के महीन कण को दूसरे शरीर में दी जाने से बनी हो, जैसा कि मीजल्स बीमारी में हुआ था. यह किसी अन्य जीवों के कोशिकाओं से भी बन सकती है या फिर किसी पौधे में भी पनप सकती है.

हर मामले में उत्पादन तकनीक होगी अलग
ये अलग-अलग तरीके वैक्सीन उत्पादन की अलग तकनीकें और तरीके की मांग करते हैं. कुछ मामलों में हमारे पास बहुत पहले से बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता है. वहीं DNA या RNA में परिवर्तन जैसे उपाय से बनी वैक्सीन बनाना आसान हो सकता है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई वैक्सीन इंसानों के लिए नहीं बनी है. ऐसी कई विभिन्न संभावनाएं भी हैं जो अलग ही उत्पादन तकनीक की मांग कर सकती हैं.

उत्पादन निवेश भी है एक बड़ी चुनौती
एक बड़ा प्रश्न यह भी हैकि दुनिया के देशों की तमाम सरकारें और कंपनियां कैसे वैक्सीन उत्पादन में निवेश करेंगी जिससे कि 2021 तक हमें वैक्सीन मिल सके. कोएलेश्नस ऑफ एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन्स का शोध बताता है कि फिलहाल वैक्सीन विकसित करने और ट्रायल्स के लिए उसके उत्पादन के लिए करीब 2 अरब डॉलर की जरूरत होगी, लेकिन अभी तक सरकारों ने केवल 69 करोड़ डॉलर का वायदा ही किया गया है. इसके अलावा वैक्सीन के उत्पादन और वितरण के लिए एक अरब डॉलर की अलग से जरूरत होगी. वहीं उत्पादन कंपनियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाखों डॉलर की जरूरत होगी.

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कोरोना वायरस की वैक्सीन उत्पादन के लिए निवेश की अहम भूमिका होगी.


कोरोना संकट में केवल वैक्सीन की खोज ही अंतिम समाधान नहीं हैं. इसका इलाज सभी लोगों तक पहुंचे यह भी बहुत जरूरी है.

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