चर्च की इस पुरानी परंपरा के चलते बढ़ रहे हैं महिलाओं के प्रति यौन अपराध, जानिए कैसे?

प्रतीकात्मक फोटो

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गिरिजाघरों में पादरी से अपने पापों का कन्फ़ेशन नहीं कर सकेंगे!

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2018, 11:40 AM IST
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कन्फेशन यानी अपनी गलतियों को खुलकर किसी से कहने पर मन से बोझ तो उतरता है, साथ ही कन्फेस ये भी बताता है कि वो गलती दोबारा नहीं होगी. कैथोलिक और ऑर्थोडॉक्स चर्च में कन्फेशन आम है. लोग अक्सर पादरी के सामने अपने सिन यानी पापों को कन्फेस करते हैं लेकिन ये यौन उत्पीड़न का जरिया बनने लगा है. केरल के कोट्टायम में एक महिला ने एक के बाद एक चार पादरियों पर उसे ब्लैकमेल करके यौन शोषण का आरोप लगाया.

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इसी से मिलता-जुलता मामला पंजाब के जालंधर से आया, जहां पीड़िता का आरोप था कि कन्फ़ेशन के दौरान अपने राज बांटने पर पहले एक पादरी ने उसका यौन शोषण किया. इसके बाद से कन्फेशन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है. यहां तक कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने चर्च में कन्फेशन पर रोक लगाने की सिफारिश भी की. अपनी सिफारिश में आयोग ने लिखा कि ये महिलाओं की सुरक्षा में रोड़ा हैं. जानिए, क्या है ये कन्फेशन और कैसे बन गया यौन शौषण का जरिया.




चर्च में कन्फेशन की प्रक्रिया का बाइबिल में जिक्र मिलता है. इसे ऑग्सबर्ग कन्फेशन कहा जाता है, जिसके दो स्टेप हैं. पहला पाप की समझ से पैदा होने वाला डर और दूसरा चरण है जिसमें किसी को अपनी गलती का अहसास हो जाए और साथ ही ये यकीन भी हो जाए कि ईश्वर ने उसे पाप की माफी दे दी है. बाइबिल के दूसरे चैप्टर में माना गया है कि रोजमर्रा के कामों के दौरान सबसे कोई न कोई गलती हो जाती है, जिनका प्रायश्चित्त होना जरूरी है तभी मन शुद्ध होता है. चर्च के पादरी को ईश्वर का प्रतिनिधि मानते हुए उसक सामने पापों का कन्फेशन किया जाता है.

ये है प्रक्रिया
चर्च में कन्फेशन के लिए एक जगह तय होती है. वहां कन्फेस करने वाले व्यक्ति और पादरी के सामने आमतौर पर एक परदा होता है. इन दोनों के अलावा और कोई भी वहां मौजूद नहीं होता है. पादरी के सामने कन्फेशन बॉक्स में खड़ा होकर कोई भी अपनी गलती बता सकता है और यकीन करता है कि पादरी उस राज को अपने और ईश्वर तक ही सीमित रखेगा.



कौन नहीं कर सकता है कन्फेस
10 साल के कमउम्र बच्चों के लिए कन्फेशन की प्रक्रिया नहीं है क्योंकि माना जाता है कि उन्हें सही-गलत का कोई अहसास नहीं होता है और वे जो भी करते हैं, भूल हो सकती है लेकिन अपराध नहीं. इसी तरह से मानसिक रूप से अपेक्षाकृत कमजोर लोगों के लिए इस प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं है, यानी उन्हें भी इसकी इजाजत नहीं.

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पूरी दुनिया में यौन शोषण
कन्फेशन बॉक्स को आजकल डार्क बॉक्स कहा जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही महिलाओं के यौन शोषण का लंबा सिलसिला सुनाई पड़ रहा है. भारत के अलावा यूरोप, अमेरिका और दूसरे देशों में भी कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा यौन शोषण की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में पादरियों द्वारा हजार से भी ज्यादा बच्चों के यौन शोषण की एक खबर ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया. यहां तक कि रोमन कैथोलिक चर्च के पोप को दुनियाभर के पादरियों के इन अपराधों के लिए माफी मांगनी पड़ी है. पादरियों द्वारा यौन शोषण की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए वैटिकन सिटी ने कई सख्त फैसले लिए, जिसमें पादरियों का निलंबन भी शामिल रहा.



महिलाओं के साथ यौन शोषण के अधिकतर मामलों की वजह कन्फेशन रहा, जिसके बूते पादरी उन्हें ब्लैकमेल करने लगे. इसी को देखते हुए महिला आयोग ने कन्फेशन की प्रक्रिया बंद करने की सिफारिश की. आयोग ने कहा कि चर्च में यौन शोषण की पारदर्शी जांच केंद्रीय एजेंसी के जरिए होनी चाहिए. केरल का मामला उछलने के बाद आयोग की ये सिफारिश आई, जिसपर ईसाई समुदाय के अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति भी जताई. त्रिवेंद्रम कैथोलिक चर्च के अधिकारियों के अनुसार ये भारत में रह रहे ईसाई समुदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप है. केरल कैथोलिक बिशप कौंसिल ने भी इसे ईसाई आस्था पर प्रहार बताते हुए कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि कन्फेशन की परंपरा खत्म होनी चाहिए.

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