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अब परछाई से भी पैदा होगी बिजली, जानिए कैसे होगा यह कमाल

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 9:02 PM IST
अब परछाई से भी पैदा होगी बिजली, जानिए कैसे होगा यह कमाल
बिजली का परछाई से उत्पादन का यह पहला प्रयोग है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने परछाई (Shadow) का कारण होने वाले प्रदीप्ति विषम (illumination contrast) प्रभाव का उपयोग कर बिजली (Electricity) बनाई है.

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नई दिल्ली:  इस तकनीकी युग में अगर हमें किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है तो वह है ऊर्जा (Energy). ऊर्जा उत्पादन मानव विकास की धुरी बन चुका है. आज उर्जा उपयोग विकास का एक प्रमुख पैमाना हो चुका है, लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपने लिए एक सुरक्षित, प्रदूषण रहित, आसान और असीम ऊर्जा स्रोत का निर्माण करना. इस खोज में वैज्ञानिकों ने परछाई (Shadow) का उपयोग करते हुए ऊर्जा निकालने का तरीका ढूंढ लिया है.

ऊर्जा पैदा करने के लिए प्रयोग
वैसे तो हमारे पास जीवाश्म ईंधन के विकल्प के तौर पर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, नाभकीय आदि कई प्राकृतिक स्रोत है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इनका आसान, सुरक्षित और प्रभावी दोहन है. ऊर्जा उत्पादन के वैज्ञानिक तरह तरह के प्रयोग करते रहते हैं. इसी कड़ी में उन्होंने परछाई पर एक सफल प्रयोग किया है और बिजली बनाई है.

परछाई का प्रभाव इस्तेमाल करने की कोशिश



परछाई वह काला क्षेत्र होता है जो किसी अपारदर्शी वस्तु के प्रकाश का रास्ता रोकने से बन जाता है. वैज्ञानिकों ने इसी प्रभाव का उपयोग कर बिजली पैदा करने का उपाय खोजा है. NUS मटेरियल साइंस एंड इंजिनियारिंग के वैज्ञानिकों ने एक उपकरण विकसित किया है जिसमें उन्होंने परछाई के कारण उत्पन्न हुए प्रभाव का उपयोग किया है.



Electricity
बिजली उत्पादन के कई उपाय अपनाए जाते हैं, लेकिन यह प्रयोग अनूठा है. (सांकेतिक फोटो)


क्या है यह उपकरण
इस उपकरण को वैज्ञानिकों ने शैडो-इफेक्ट एनर्जी जनरेटर (Shadow-effect energy generator,SEG) कहा है.  एसईजी चमकदार और परछाई की सीमा पर हुए प्रदीप्ति विषमता (illumination contrast) का उपयोग करता है.

परछाई को हम हलके में ले लेते हैं
शोध की अगुआई करने वाले NUS मटेरियल साइंस एंड इंजिनियारिंग के एसिसटेंट प्रोफेसर तान स्वी चिंग ने कहा, “परछाई हर जगह होती हैं और हम उन्हें बहुत हलके में लेते हैं. परंपरागत फोटोवोल्टिक या ऑप्टोइलेक्टॉनिक एप्लीकेशन में उपकरणों को शक्ति देने के लिए प्रकाश के एक स्थिर स्रोत का उपयोग किया जाता है. इनमें परछाई अनपेक्षित होती है. क्योंकि यह उपकरणों का उत्पादन कम कर देती है.“

कैसे बनी बिजली
चिंग ने कहा, “इस शोध में हमने परछाई के कारण बनी प्रदीप्ति विषमता (illumination contrast) का फायदा उठाया और उसका अप्रत्यक्ष ऊर्जा स्रोत की तरह उपयोग किया. प्रदीप्ति में विषमता से परछाई और प्रकाशित हिस्से के बीच वोल्टेज में अंतर पैदा हुआ जिससे बिजली का करंट बन गया. इससे पहले इस तरह का प्रयोग कभी नहीं हुआ.“

दो काम करता है यह SEG
यह एसईजी उपकरण दो काम करता है. पहला, आधी परछाई से बनने वाले प्रदीप्ति विषमता को बिजली में बदलता है, दूसरा, यह खुद की शक्ति से चलने वाले सेंसर की तरह काम करता है जो पास से गुजरने वाली वस्तुओं पर नजर रखता है. इसकी सेल में पारदर्शी प्लास्टिक फिल्म का उपयोग होता है. हर हिस्से में सोने की एक पतली फिल्म होती है जो सिलिकॉन वेफर पर लगी होती है. अगर इस अच्छे से डिजाइन किया गया तो यह व्यवसायिक सोलर सेल्स के मुकाबले सस्ती हो सकती है.

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से एसईजी एक डिजिटल घड़ी को पर्याप्त पॉवर (12 वोल्ट) दे सकता है


क्या फायदे हैं इसके
शोधकर्ताओं ने पाया है कि एसईजी वर्तमान सिलिकॉन सोलर सेल से दोगुना प्रभावकारी है. घर के अंदर होने वाले प्रकाश में बनी परछाई से एसईजी एक डिजिटल घड़ी को पर्याप्त पॉवर (12 वोल्ट) दे सकता है. इसके अलावा यह चलती हुई वस्तुओं की पहचान करने वाले सेंसर की तरह भी काम करता है. जब कोई चीज एसईजी के पास से गुजरती है तो उसकी परछाई उपकरण पर पड़ती है और एसईजी उस वस्तु की गतिविधि को पकड़ लेता है.

भविष्य में वैज्ञानिक सोने के अलावा दूसरे पदार्थों के साथ भी यह प्रयोग करेंगे जिससे इसकी कीमत कम की जा सके.

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First published: May 22, 2020, 9:02 PM IST
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