पाकिस्तान ही नहीं, बांग्लादेश, श्रीलंका और तिब्बत में भी हैं शक्तिपीठ, मुस्लिम भी रखते हैं आस्था

भगवान शिव की पत्नी सती के मृत शरीर के हिस्से या आभूषण गिरे, उन जगहों पर शक्तिपीठ बना
भगवान शिव की पत्नी सती के मृत शरीर के हिस्से या आभूषण गिरे, उन जगहों पर शक्तिपीठ बना

देवी पुराण (Devi-Bhagavata Purana) में जिन 51 शक्तिपीठों का जिक्र है, उनमें से 9 सती मंदिर विदेशों में हैं. एक शक्तिपीठ पाकिस्तान में है, जबकि देवी के बाकी 8 शक्तिपीठ बांग्लादेश, श्रीलंका और तिब्बत (Shakti peeth in Pakistan, Nepal, Bangladesh, Sri Lanka and Tibet ) में हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 9:45 AM IST
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पाकिस्तान का हिंग्लाज माता मंदिर देवी का सिद्ध मंदिर हैं, जिसपर हिंदुओं के अलावा स्थानीय मुस्लिमों की भी आस्था बताई जाती है. इसी तरह से मुस्लिम बहुल देश बांग्लादेश में भी देवी के शक्तिपीठ हैं. पड़ोसी देश नेपाल, तिब्बत और श्रीलंका तक माता के मंदिरों के अलावा सिद्ध पीठ भी हैं, जहां हर साल नवरात्र पर आस्तिकों का हुजूम उमड़ता है.

क्या है शक्तिपीठ
हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक जहां-जहां भी भगवान शिव की पत्नी सती के मृत शरीर के हिस्से या आभूषण गिरे, उन जगहों पर शक्तिपीठ बना. ये शक्तिपीठ केवल देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में भी हैं. देवी पुराण में जिन 51 शक्तिपीठों का जिक्र है, उनमें से एक या दो नहीं, बल्कि 8 पीठ विदेशों में हैं.

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यहां है इन्द्राक्षी शक्तिपीठ 


श्रीलंका में लंका शक्तिपीठ है. जाफना के नल्लूर में स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी सती की पायल गिरी थी. यहां की शक्ति को इन्द्राक्षी कहा जाता है, यही वजह है कि इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी शक्तिपीठ भी कहते हैं. भगवान राम और देवराज इंद्र ने भी यहां पर देवी की पूजा की थी. रावण के बारे में माना जाता है कि वो शिव और शक्ति का बड़ा उपासक था और उसने भी युद्ध से पहले यहां शक्ति पूजा की थी.

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तिब्बत में मानस शक्तिपीठ स्थित है
यहां सती की बाईं हथेली गिरी थी. मानसरोवर के तट बने इस शक्तिपीठ को काफी प्रभावशाली माना जाता है और न केवल नवरात्र, बल्कि साल के सभी ठीक मौसमों में यहां जाने वालों की भीड़ रहती है. तिब्बती धर्मग्रंथ 'कंगरी करछक' में मानसरोवर की देवी 'दोर्जे फांग्मो' का यहां निवास कहा गया है.

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नेपाल में हैं दो शक्तिपीठ
नेपाल के काठमांडू में एक शक्तिपीठ है, जिसे गुजयेश्वरी मंदिर पीठ कहा जाता है. मान्यता है कि यहां देवी सती के दोनों घुटने गिरे थे. यहां की शक्ति को महाशिरा कहा जाता है. मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर के पास बागमती नदी के तट पर बना हुआ है. मंदिर को 17वीं सदी में नेपाल के राजा राजा प्रताप मल्ल ने बनवाया था.

इसके अलावा नेपाल में एक और शक्तिपीठ है, जिसे गंडकी शक्तिपीठ कहते हैं. यहां सती का कपोल गिरा माना जाता है. यहां की देवी को गंडकी कहते हैं.

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बांग्लादेश में चार पीठ स्थित हैं
पड़ोसी मुस्लिम-बहुल देश बांग्लादेश में देवी के चार शक्तिपीठ स्थित हैं. एक पीठ यहां खुलना नामक क्षेत्र में सुगंध नदी के तट पर बना हुआ है. इसे उग्रतारा देवी का मंदिर कहते हैं, जहां देवी की नासिका यानी नाक गिरी मानी जाती है. यहां की देवी को सुनंदा कहा जाता है.

मुस्लिम-बहुल देश बांग्लादेश में देवी के चार शक्तिपीठ स्थित हैं


इसी देश के भवानीपुर के बेगड़ा में करतोया नदी के किनारे करतोयाघाट शक्तिपीठ है. यहां देवी सती के बाएं पैर की पायल गिरी मानी जाती है. इस मंदिर को अपर्णा शक्तिपीठ भी कहते हैं. यहां की देवी अपर्णा के रूप में पूजी जाती हैं.

बांग्लादेश के ही जैसोर खुलना प्रांत में देवी का एक और पीठ है, जिसे यशोरेश्वरी शक्तिपीठ कहते हैं. यहां देवी सती की बाईं हथेली गिरी बताई जाती है. इस जगह काली पूजा होती है. महाराजा प्रतापादित्य ने इस शक्तिपीठ को खोजा और मंदिर बनवाया था.

इस शक्तिपीठ के पास है गर्म पानी का चमत्कारी सोता
एक और शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव में है, जिसे चट्टल का भवानी शक्तिपीठ कहते हैं. माना जाता है कि यहां माता सती की दाहिनी भुजा गिरी थी. यहां की देवी की भवानी के तौर पर पूजा होती है. इस मंदिर के स्थानीय लोगों के अलावा पूरे देश में मान्यता है और यहां तक कि स्थानीय मुस्लिम भी इसपर आस्था रखते हैं. यहां गर्म पानी के प्राकृतिक सोते हैं, जिनमें नहाने से कई तरह की बीमारियों का इलाज हो जाता है. यही वजह है कि यहां नवरात्रि के अलावा पूरे साल आस्तिक आते और अपनी इच्छाएं पूरी कर लौटते हैं.
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