होम /न्यूज /ज्ञान /

Shankar Dayal Sharma B’day: स्वच्छ राजनैतिक जीवन की मिसाल थे डॉ शंकर दयाल शर्मा

Shankar Dayal Sharma B’day: स्वच्छ राजनैतिक जीवन की मिसाल थे डॉ शंकर दयाल शर्मा

डॉ शंकर दयाल शर्मा (Dr Shankar Dayal Sharma) कांग्रेस शासित राज्यों में कई मंत्री प्रभार और राज्यपाल के पद संभाले थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

डॉ शंकर दयाल शर्मा (Dr Shankar Dayal Sharma) कांग्रेस शासित राज्यों में कई मंत्री प्रभार और राज्यपाल के पद संभाले थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

Shankar Dayal Sharma Birth anniversary: डॉ शंकर दयाल शर्मा ने जीवन भर एक शालीन राजनेता के चरित्र का परिचय दिया. चाहे उनके दामाद और पुत्री की उनके घर के सामने ही हत्या का मामला हो या फिर उन्हें दिया जाने वाला प्रधानमंत्री पद का प्रस्ताव उन्होंने हमेशा संयम और शालीनता से काम लिया. शिक्षा (Education) में हमेशा ही अव्वल रहे डॉ शर्मा राजनीति (Politics) में जहां भी गए वहां सभी ने उन्हें पसंद किया.

अधिक पढ़ें ...

हाइलाइट्स

डॉ शंकर दयाल शर्मा देश के स्वतंत्रता सेनानी भी थे.
वे भोपाल राज्य के पहले और इकलौते मुख्यमंत्री थे.
उन्हें 1991 में देश का प्रधानमंत्री पद लेने का प्रस्ताव भी दिया गया था.

देश उन्हें भारत के नौवें राष्ट्रपति (President of India) के रूप में जानता है. वे लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे पर कभी किसी विवाद में नहीं आए. उन्हें सत्तापक्ष विपक्ष सभी से सम्मान मिला. राजनेता होने के बाद भी वे एक विद्वान की तरह देखे जाते रहे. राष्ट्रपति पद  तक पहुंचने के बाद भी अपनी जन्मभूमि को कभी नहीं भूले और खुद के हमेशा अपने भोपाल (Bhopal) से जोड़े रहते थे. हम बात कर रहे हैं देश के पूर्व राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानी डॉ शंकर दयाल शर्मा (Dr Shankar Dayal Sharma) की. 19 अगस्त को उनकी जयंती है. उनका जीवन और राजनैतिक सफर एक स्वच्छ राजनैतिक जीवन की मिसाल है.

 पढ़ाई में बहुत ज्यादा थी रुचि
डॉ शर्मा का जन्म मध्यप्रदेश के भोपाल के अमोन गांव में 19 अगस्त 1918 को हुआ था. उनके पिता पंडित खुशीलाल शर्मा एक प्रसिद्ध वैद्य थे और उनकी माता का नाम सुभद्रा देवी था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय दिगंबर जैन स्कूल हुई जिसके बाद उन्होंने सेंट जोंस कॉलेज आगरा, इलाहबाद विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की. कानून के अलावा उन्होंने अंग्रेजी साहित्य, संस्कृत और हिंदी में भी स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की.

पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रखा खुद को
इसके बाद कानून की उच्च पढ़ाई करने के लिए वे इंग्लैंड चले गए जहां पीएचडी हासिल की. कुछ समय तक उनहोंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अध्यापन भी किया और वापस लौट कर लखनऊ विश्वविद्यालय में भी कानून पढ़ाया. लेकिन वे केवल किताबी कीड़े नहीं थे. पढ़ाई में अव्वल होने के साथ ही वे क्रॉस कंट्री धावक और विजेता तैराक भी थे.

राजनैतिक जीवन की शुरुआत
डॉ शर्मा के जीवन में साल 1940 परिवर्तनकारी रहा. इस साल उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस शुरू की और साथ ही अपने राजनैतिक जीवन का सफर भी शुरू किया. वे कांग्रेस से जुड़े और 1942 में गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में भी सक्रिय रहे और जेल भी गए. इतना ही नहीं भारत की आजादी के समय जब भोपाल के नवाब ने भारत में विलय से इनकार कर दिया तो डॉ शर्मा ने उनकी भी खिलाफत शुरू कर दी और इसके लिए वे फिर से जेल भी गए.

History, Madhya Pradesh, Bhopal, Dr Shankar Dayal Sharma, Shankar Dayal Sharma, President of India, former president of India, Indian freedom Struggle, Congress,

डॉ शंकर दयाल शर्मा (Dr Shankar Dayal Sharma) को एक बार देश का प्रधानमंत्री बनने का अवसर भी मिला था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

मध्य प्रदेश सरकार में कई मंत्री पद
1949 में जब भोपाल की रियासत का भारत में विलय तो डॉ शर्मा भोपाल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और 1956 तक इस पद पर बने रहे जिसके बाद भोपाल एक बड़े मध्यप्रदेश का हिससा हो गया. मध्यप्रदेश के गठन के बाद निर्वाचित सरकार में भी डॉ शर्मा 1967 तक विभिन्न विभागों के मंत्री बने. 1960 के दशक में उन्होंने इंदिरागांधी का समर्थन किया जिसके बाद आउनका राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश हुआ.

यह भी पढ़ें: Vijaya Lakshmi Pandit B’day: भारतीय महिला शक्ति को दी थी अंतरराष्ट्रीय पहचान

राज्यपाल बनने का सिलसिला
1971 में डॉ शर्मा लोकसभा के लिए चुन लिए गए और देश के संचारमंत्री बने.  इसी बीच वे कांग्रेस से राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने. इसके बाद 1980 में वे भोपाल से लोकसभा के लिए चुने गए. 1984 में फिर उनके राजनैतिक जीवन में बदलाव आया जब वे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने. इसी बीच उनकी बेटी गीतंजली माकन और दामाद  ललित माकन की सिख आंतंकियों ने उनके घर के सामने ही हत्या कर दी. 1985 में वे पंजाब के राज्यपाल बनाए गए. फिर 1986 में ही वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बना दिए गए.

History, Madhya Pradesh, Bhopal, Dr Shankar Dayal Sharma, Shankar Dayal Sharma, President of India, former president of India, Indian freedom Struggle, Congress,

डॉ शंकर दयाल शर्मा (Dr Shankar Dayal Sharma) ने ऊंचे पदों पर पहुंचने के बाद भी अपना विनम्र स्वभाव नहीं छोड़ा था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

प्रधानमंत्री पद का प्रस्ताव
साल 1987 एक बार फिर उनके राजनैतिक जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आया जब उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया और फिर वे देश के 8वे उपराष्ट्रपति चुने गए. साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया. उस समय उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष और देश का प्रधानमंत्री पद संभालने का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने उसे विनम्रता से ठुकरा दिया, नहीं तो नरसिम्हाराव की जगह वे देश के प्रधानमंत्री होते.

यह भी पढ़ें: Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: सभी को ‘अच्छे’ क्यों लगते थे वाजपेयी?

साल 1992 में डॉ शर्मा भारत के नवें राष्ट्रपति चुन लिए गए. इसकार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के तीन नए प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाई थी. 1997 में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा और 26 दिसंबर 1999 को उन्हें गंभीर दिल का दौरा पड़ा और उन्हें दिल्ली में अस्पताल में भर्ती करना पड़ा जहां उनका निधन हो गया. अपने पूरे जीवनकाल में वे प्रमुख तौर पर एक राजनेता कम और शिक्षाविद की तरह ज्यादा रहे और उनकी खास बात यह रही के उन्होंने कभी किसी से प्रतिद्वंदता नहीं की.

Tags: History, India, Research, मध्य प्रदेश

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर