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शरद पवार के मसल मैन और अजित के साले पद्मसिंह का क्या है 'NCP विद्रोह' में रोल

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 3:41 PM IST
शरद पवार के मसल मैन और अजित के साले पद्मसिंह का क्या है 'NCP विद्रोह' में रोल
पद्मसिंह पाटिल लंबे समय तक शरद पवार के बेहद नजदीकियों में शुमार किए जाते थे. वो महाराष्ट्र में कई विभागों के मंत्री रह चुके हैं.

1978 में जब शरद पवार (Sharad Pawar) ने कांग्रेस (यू) से अलग हटकर कांग्रेस (एस) बनाई थी, तकरीबन उसी समय के आस-पास बाजीराव पाटिल (Padamsinh Bajirao Patil) भी उनसे जुड़े थे. बाजीराव को लंबे समय तक शरद पवार के बेहद नजदीकियों में शुमार किया जाता रहा. कहा जाता है कि उनकी पहचान शरद पवार के मसल मैन के रूप में भी होती रही.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 3:41 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने शरद पवार से पार्टी छोड़कर बीजेपी-शिवसेना (BJP-Shiv Sena) की तरफ भाग रहे नेताओं पर सवाल पूछा. पत्रकार ने पूछा कि एनसीपी (NCP) के पुराने नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, कुछ तो आपके नातेभाई (रिश्तेदार) भी हैं. रिश्तेदार का नाम सुनते ही शरद पवार उखड़ गए. कॉन्फ्रेंस से उठकर जाने लगे. बहुत मान-मनौव्वल पर बैठे तो पत्रकार से माफी मांगने के लिए कहने लगे. ये भी बोले कि जिन्हें सवाल पूछने का सलीका न हो, ऐसे पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं आने देना चाहिए. दरअसर पत्रकार ने जिस रिश्तेदार की तरफ इशारा किया था वो थे पद्मसिंह बाजीराव पाटिल (Padamsinh Bajirao Patil).

तब पद्मसिंह और उनके बेटे राणा जगजीत सिंह के बीजेपी ज्वाइन करने की चर्चा थी. दिलचस्प ये है कि पद्मसिंह बेहद नजदीकी रिश्तेदार हैं और अजित पवार के साले हैं. ये सबको मालूम है कि जब रातों-रात बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार बना ली थी. तब अजित पवार ने बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया था. डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली थी. बहुत पारिवारिक मान-मनौव्वल के बाद उनकी घरवापसी हो गई है.

अजित पवार के साले हैं पद्मसिंह
1978 में जब शरद पवार ने कांग्रेस (यू) से अलग हटकर कांग्रेस (एस) बनाई थी, तकरीबन उसी समय के आस-पास बाजीराव पाटिल भी उनसे जुड़े थे. बाजीराव पाटिल को लंबे समय तक शरद पवार के बेहद नजदीकियों में शुमार किया जाता रहा. कहा जाता है कि उनकी पहचान महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार के मसल मैन के रूप में भी होती रही. दोनों नेताओं की नजदीकियां रिश्तेदारी में बदली. तब अजित पवार के साथ पद्मसिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा से शादी हुई.

पद्म सिंह की बहन सुनेत्रा से अजित पवार का विवाह हुआ है.
पद्म सिंह की बहन सुनेत्रा से अजित पवार का विवाह हुआ है.


इस बीच बाजीराव 1978 से लेकर 2009 तक लगातार उस्मानाबाद विधानसभा सीट से विधायक रहे. उनकी लंबे समय तक जीत इस सीट पर उनकी पकड़ दिखाती है. शरद पवार का नजदीकी होने का उन्हें फायद मिला. वो राज्य में लंबे समय तक कई मंत्री पदों पर रहे. वो राज्य के गृहमंत्री और विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे.

इसके अलावा साल 1995 से 1999 तक मनोहर जोशी की अगुवाई वाली शिवसेना-बीजेपी सरकार में लीडर ऑफ ऑपोजिशन भी रहे. साल 2009 में पद्मसिंह पाटिल ने उस्मानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीते.
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भाई की हत्या का आरोप
पद्मसिंह पाटिल को अपने चचेरे भाई पवनराजे निंबालकर की हत्या के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था. हालांकि तब इन आरोपों को शरद पवार और पद्मसिंह के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में भी देखा गया था. तब उन्हें दो लाख रुपए के निजी मुचलके पर छोड़ा गया था. मामले का ट्रायल 2011 में शुरू हुआ था लेकिन अभी तक इसका नतीजा नहीं आया है.

भ्रष्टाचार के आरोप
साल 2005 में पद्मसिंह पाटिल के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, लेकिन ये आरोप सिद्ध नहीं किए जा सके. हालांकि उस समय भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से पाटिल मुश्किल में पड़ गए थे. तब शरद पवार ने उनके बेटे राणा जगजीत सिंह को राज्यमंत्री बनाया था.

चुनाव से पहले जब पद्मसिंह पाटिल बीजेपी में शामिल हुए थे तब राणा जगजीत भी उनके साथ शामिल हुए थे. राणा जगजीत सिंह ने इस बार का विधानसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर ही जीता है. वो उस्मानाबाद की तुलजापुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं.

पद्मसिंह पाटिल के बेटे राणा जगजीत सिंह इस बार ओस्मानाबाद की तुलजापुर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते हैं.
पद्मसिंह पाटिल के बेटे राणा जगजीत सिंह इस बार उस्मानाबाद की तुलजापुर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते हैं.


अजित पवार और बीजेपी का मेल
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अजित पवार के बीजेपी के साथ हाथ मिलाने में मुख्य भूमिका निभाने वालों में बाजीराव पद्मसिंह भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पद्मसिंह ने ही उन्हें बीजेपी के साथ जाने के लिए मनाया था.

तल्ख हो चुके हैं पवार के साथ रिश्ते
बताया जाता है कि चुनाव से पहले एनसीपी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले बाजीराव पद्मसिंह से शरद पवार के रिश्ते ठीक नहीं हैं. शायद यही वजह थी कि चुनाव से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके नाम पर भड़क गए थे. तब शरद पवार ने एनसीपी छोड़ने वालों पर यह भी कहा था कि उन नेताओं का जो भी विकास हुआ वो एनसीपी में हुआ. अब शायद उन्हें बीजेपी और 'विकास 'देना चाहती है.

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First published: November 27, 2019, 11:14 AM IST
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