क्या है किसानों का मजबूत शेतकारी संगठन, जो कर रहा है कृषि कानूनों का समर्थन

शेतकारी संगठन (Shetkari Sanghatana) किसान बिल (New Farm Bill) का समर्थन कर रहा है जबकि हजारों किसान इसका विरोध कर रहे हैं. 
 (फोटो साभार- PTI)

शेतकारी संगठन (Shetkari Sanghatana) किसान बिल (New Farm Bill) का समर्थन कर रहा है जबकि हजारों किसान इसका विरोध कर रहे हैं. (फोटो साभार- PTI)

कृषि कानून (Farm laws) का समर्थन करने वाले किसान संगठनों (Farmer Organisations) में शेतकारी संगठन (Shetkari Sanghatana) भी शामिल है जो दशकों से किसानों के लिए खुले बाजार का समर्थन करता रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 19, 2020, 7:28 PM IST
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नए कृषि कानूनों (Farm laws) को लेकर हो रहा हजारों किसानों (Farmers) का विरोध जारी है. ऐसे में यह दावे भी किए जा रहे हैं कि ज्यादातर किसान कृषि कानूनों का विरोध नहीं कर रहे हैं. इन कानूनों के समर्थन देने वालो किसानों का एक पक्ष सामने तब आया जब कुछ किसान संगठनों (Farmer ogranisation) ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) से हाल ही में मुलाकात की. इनमें से एक शेतकारी संगठन (Shetkari Sanghatana) है जिसे महाराष्ट्र के किसान नेता शरद जोशी ने बनाया था.

कैसे बना शेतकारी संगठन

शरद जोशी एक अर्थशास्त्री हैं जो पहले स्विट्जरलैंड में संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करते थे. वहां से भारत लौटने के बाद महाराष्ट्र के पुणे जिले में खेड़ तालुका के पास खेती करने के लिए जमीन खरीदी. 1979 में जब प्याज की सही कीमत की मांग करते हुए किसानों ने सड़कों पर प्याज फेंक दी और पुणे नासिक हाइवे को जाम कर दिया. इसी समय शेतकारी संगठन का जन्म हुआ था.

किसानों के लिए चलाए ये आंदोलन
जोशी का मानना है कि जब तक ग्रामीण भारत को देश के शहरों को हिसाब से चलाने की कोशिश होती रहेगी उसकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा. उनके आंदोलनों में केवल प्याज ही नहीं बल्कि गन्ना की सही कीमतें और कपास को लेकर महाराष्ट्र राज्य सहकारी कपास मार्केटिंग फेडरेशन के एकाधिकार को खत्म करने की मांग भी शामिल रहे. 1984 में हुए यह आंदोलन पूरी तरह से सफल रहा था और सरकार को अपने कपास के अंतरराज्यीय वितरण पर रोक लगाने वाले कानून को वापस लेना पड़ा था.

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दिल्ली (Delhi) में हजारों किसान (Farmers) लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. (Photo: एपी)


खुले बाजार का समर्थन



शेतकारी संगठन शुरू से ही बाजार का समर्थक रहा है. जोशी का मानना है कि किसानों की समस्याओं का मूल कारण बाजार तक सीमित पहुंच है. वे कहते हैं कि बाजार खुला और प्रतिस्पर्धी होना चाहिए जिससे कि कृषि उत्पादों की सही कीमत मिल सके. उन्होंने सरकारों पर आरोप लगाया था कि वो ग्राहकों को सस्ता माल दिलाने के लिए कृषि उत्पादों की कीमतें जानबूझ कर कम करती हैं.

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जोशी का रवैया

जोशी केवल उन तीन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने वैश्वीकरण और कृषि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश का समर्थन किया था. उनके अलावा भारतीय किसान यूनियन के महेंद्र सिंह टिकैत और कार्नाटक रैथा संघ के एमडी ननजुंदास्वामी ने ऐसा किया था. जोशी गैट समझौते के समर्थन में मोर्चा निकाल चुके हैं और उन्होंने साल 1995 में भारत के विश्व व्यापार संगठन से जुड़ने का स्वागत किया था.

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कृषि कानून (Farm Laws) का समर्थन देश के और भी संगठन कर रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)


वर्तमान कानूनों को लेकर शेतकारी संगठन

शेतकारी संगठन केंद्र सरकार द्वारा घोषित कृषि कानूनों का समर्थन करने वालों में सबसे पहला संगठन है. शुरुआत से ही खुले बाजार का समर्थन करने वाले इस संगठन ने तीनों कानूनों में से कृषि उत्पाद व्यापार और व्यवसाय कानून, 2020 का सबसे ज्यादा समर्थन किया है. संगठन के अध्यक्ष अनिल घनावत का कहना है कि कानून कृषि उत्पाद बाजार समिति की शक्तियों को नियंत्रित करता है और किसानों के लिए मुक्त बाजार को काम करने का मौका देता है.
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