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जानिए कौन सा शिया नेता बनने वाला है इराक का राष्ट्रप्रमुख

शिया मौलवी मुक्तदा अल बद्र (Muqtada Al-Sadr) इस सदी के इराक के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock/  thomas koch)

शिया मौलवी मुक्तदा अल बद्र (Muqtada Al-Sadr) इस सदी के इराक के सबसे लोकप्रिय व्यक्ति हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock/ thomas koch)

इराक (Iraq) के चुनाव में शिया मौलवी मुक्तदा अल सद्र (Muqtada Al-Sadr) वहां सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं जो इराक के अगले राष्ट्रप्रमुख भी बन सकते हैं.

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    हाल ही में इराक में हुए चुनावों (Iraq Elections 2021) में शिया मुस्लिम धर्मगुरु (Shiite) मुक्तदा अल-सद्र (Muqtada Al-Sadr) इराक के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं. रविवार को हुए चुनावों के शुरुआती नतीजों की ही अंततः पुष्टि हुई और 329 सीटों वाली इराकी संसद में अल-सद्र के आंदोलन वाली पार्टी के गठबंधन को सबसे ज्यादा 73 सीटें मिली हैं. नई सरकार बनने में अभी काफी समय लगेगा क्योंकि फिलहाल किसी एक पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. लेकिन कम से कम यह तय है कि सद्र एक किंग मेकर के तौर पर उभरे हैं लेकिन उम्मीद ये जताई जा रही है कि उनके ही इराक का प्रधानमंत्री बनने की संभावना है.

    कौन हैं अल-सद्र
    1974 को ईराक के नजफ में जन्मे मुक्तदा अल-सद्र इराकी शिया नेता और मौलवी हैं. वो इस सदी के सबसे शक्तिशाली इराकी नेता माने जाते हैं. सद्र इराक को अमेरिका और ईरान दोनों के प्रभाव से मुक्त देखना चाहते हैं. और वो इसी तरह की सरकार बनाने वादा करते रहे हैं. उनके पिता अयातुल्लाह मोहम्मद सादिक अल- सद्र इस्लामिक दुनिया की बहुत बड़ी धार्मिक हस्ती थे.

    ईरान समर्थित शिया के विरोधी हैं सद्र
    साल 2018 में भी इराक में जनादेश बिखरा हुआ मिला था जिसके बाद नई सरकार बनने में 8 महीने लगे थे. राष्ट्रवादी सद्र वैसे तो शिया मौलवी हैं, लेकिन ईरान समर्थित शियाओं के खिलाफ हैं जिन्हें इस चुनाव में बहुत बड़ा झटका लगा है जो 48 से 14 सीटों पर ही सिमट गए है. इसके अलावा सद्र को ईरान समर्थित कट्टरपंथियों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. सद्र के गठबंधन को साल 2018 में 54 सीटें ही मिली थीं.

    इराक में लोकप्रिय
    बेशक सद्दाम हुसैन की मौत के बाद इराक में हुए चुनावों में यह सबसे कम मतदान वाला चुनाव रहा है जिसमें केवल 41 प्रतिशत ही मत पड़े हैं. फिर भी नतीजों के बाद से मुक्तदा अल-सद्र का कद काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है. मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व में ही इराक में सद्र आंदोलन चला जिसे पूरे इराक और विशेष तौर पर उसके शिया मुस्लिमों का व्यापक समर्थन हासिल है. इसका लक्ष्य इराक में धार्मिक कानूनों और रीति रिवाजों को बढ़ावा देना है.

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    2021 के इराकी चुनाव (Iraq Elections 2021) में सबसे कम 41 प्रतिशत मतदान हुआ है.

    ईरान से अलग हैं इराकी शिया
    इराक में वैसे तो शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. यहां 66% शिया, 32% सुन्नी, 1.5% कुर्द (कबीला) और 0.5 % अन्य धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. राजनीति से लेकर व्यापार पर भी ज्यादातर शिया मुस्लिमों का ही कब्जा है लेकिन यहां के शिया ईरान समर्थित शिया नहीं हैं. यही वजह है ईरान का प्रयास यहां के शिया को अपने साथ करने का है. लेकिन सद्र इसके सख्त विरोधी हैं.

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    पिता और ससुर से प्रभावित
    मुक्तदा अल-सद्र पर अपने पिता के अलावा ससुर अयातुल्लाह मोहम्मद बाकिर अल- सद्र  का भी बहुत प्रभाव है जो इराक में इस्लामिक दावाह पार्टी के संस्थापक थे. उन्हें 1980 में सद्दाम हुसैन ने मार दिया था. सद्र पिता और ससुर के परंपरावादी या कट्टरपंथी विचारों को वो एक तरह से आगे ले जाते हुए नजर आते हैं.

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    2021 के इराकी चुनाव (Iraq Elections 2021) में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    सद्दाम के जाने के बाद बढ़ी लोकप्रियता
    साल 1999 में सद्र के पिता और उनके दो भाइयों को इराकी एजेंट्स ने मार दिया था जिससे वो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके थे. इराक में उनकी लोकप्रयिता साल 2003 में सद्दाम हुसैन की सत्ता के खात्मे के बाद बढ़ी. अमेरिका की इराक में मौजूगी तक सद्र ने मेहदी सेना की अगुआई की. उस समय उन्होंने इच्छा जताई थी कि वो इराक में इस्लामिक लोकतंत्र की स्थापना करना चाहते हैं.

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    वैसे तो सद्र का सदर आंदोलन साल 2008 के पहले से चल रहा था, लेकिन इसकी सक्रियता इसी दौरान बढ़ी और धीरे धीरे यह पूरी तरह से राजनैतिक आंदोलन हो गया. साल 2014 में सद्र ने जरूर संन्यास का ऐलान किया, लेकिन वे जल्दी ही अपने आंदोलन से फिर से जुड़ गए. मध्य पूर्व की राजनीति में सक्रिय हो गए. उन्होंने सउदी अरब से संपर्क साधा तो सीरिया की आलोचना करने में भी नहीं चूके.

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