मंगल ग्रह पर दिखाई दिए खिसकते हुए रेत के टीले, बदली वैज्ञानिकों की ये धारणा

मंगल ग्रह पर दिखाई दिए खिसकते हुए रेत के टीले, बदली वैज्ञानिकों की ये धारणा
वैज्ञानिकों ने लंबे समय से ली गईं मंगल ग्रह की तस्वीरों के अध्ययन से पाया की वहां रेत के टीले खिसक रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मंगल ग्रह (Mars) के दो इलाकों की तस्वीरों के अध्ययन से वहां खिसकते हुए रेत की टीले (Sand dunes) दिखे हैं, जिसने वैज्ञानिकों की कई धारणाओं को बदल दिया है.

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मंगल ग्रह (Mars) के बारे में कहा जाता है कि वहां हवा (Wind) नहीं चलती है. यानि वहां धूल भरी आंधी नहीं आती है. लेकिन ताजा अध्ययन में जब नासा (NASA) वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रहों की तस्वीरों का विस्तृत अध्ययन किया तो उन्हें पाया कि वहां रेत के टीले (Sand dunes) खिसक रहे हैं. इस अध्ययन के नतीजों ने वैज्ञानिकों को अपनी कई धारणाएं बदलने पर मजबूर कर दिया.

तस्वीरों के अध्ययन से पता चली यह बात
नासा के मार्स रिकोनायसेंस ऑर्बिटर ने हाल ही में मंगल ग्रह पर रेत के टीलों की तस्वीर खींची है. इन तस्वीरों से प्लैनटरी साइंस्टिट की एक टीम ने दर्शाया है कि इन रेत के टीलों की कुछ संरचनाएं खिसक रही हैं यानि अपनी जगह छोड़ रही हैं.

अध्ययन के लिए दो जगहों पर लगाया ध्यान
शोधकर्ताओं ने लाल ग्रह के दो इलाकों पर खासतौर पर ध्यान दिया. ग्रह की भूमध्यरेखा के पास के दोनों इलाकों पर उन्होंने पाया कि यहां फैले रेत के टीलों के ये ढेर धीरे धीरे अपनी जगह से खिसक रहे हैं. इस प्रक्रिया को उन्होंने मेगारिपल्स (Megaripples) नाम दिया है. कई बार तो ये टीले इतनी धीरे हिलते हैं कि ये आसानी से मैप्स और तस्वीरों में समझ में नहीं आते.



कितने टीले दिखे ऐसे
टीम ने इन दो इलाकों की तस्वीरों का अध्ययन किया और पाया कि मक्लॉगलिन क्रेटर में इस तरह के करीब 1100 मेगारिपल्स मौजूद हैं.  यह क्रेटर करीब 4 अरब साल पहले बना था जो 92 किलोमीटर चौड़ा है. इन तस्वीरों में 7.6 साल का अंतर था. इनके अलावा निलि फोसाए इलाके में क इस तरह की सरकती हुई रेत के 300 ढेर देखे गए हैं जो मंगल के रहस्मयी इलाकों में से एक है. इनकी तस्वीरों में 9.4 साल का फर्क था.



किस गति से खिसक रहे हैं ये टीले
जर्नल ऑफ जियोफिजिक्स रिसर्च: प्लेनेट्स में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों ही इलाकों में इस तरह के बहुत से संकेत हैं जो इन मेगारिपस्ल की उपस्थिति बताते हैं. ये मेगारिपल्स 10 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की गति से खिसक रहे हैं. यह खोज उस लंबे समय से चली आ रहे मत को तोड़ती दिख रही है जिसके तहत माना जा रहा था की यह खास प्रकार के टीले स्थायी हैं और हजारों साल पहले जब ये टीले बने थे तब से ये हिले नहीं हैं.

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दूसरे शोधकर्ता भी हैरान
इस खोज से कई शोधकर्ता हैरान हैं, स्मिथसनियन इंस्टीट्यूट के एयर एंड स्पेस म्यूजियम के प्लैनेटरी जियॉजिस्ट जिम जिमबेलमैन ने साइंस को बताया कि दशकों से इस बात के कोई प्रमाण नहीं  थे जिससे यह पता चलता कि मंगल ग्रह की मिट्टी में गतिविधि होती है. किसी ने नहीं सोचा था कि वहां हवा इतनी तेज होगी.

पृथ्वी पर भी पाए जाते हैं ऐसे टीले
साइंस मैग्जीन की रिपोर्ट के मुताबिक इसी तरह के धीरे से चलने वाले मेगारिपल्स पृथ्वी पर भी पाए जाते हैं. इरान के लुट रेगिस्तान में इस तरह के हिलने वाले रेत के टीले पाए जाते हैं. यह अध्ययन उन मतों क समर्थन करता दिखता है जिनके अनुसार मंगल ग्रह पर अब तक जितना सोचा जा रहा था उससे कहीं तेजी से हवा चलती है.

MARS
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क्या यह रोवर भी आंधी की कारण हुए है जाम?
शोधकर्ता मानते हैं कि जिस तरह के मेगारिपल्स उन्होंने खोजे हैं उससे साफ जाहिर है कि यहां बहती हवा के होने के संकेत हैं, इस बहती हवा से धूल भरी आंधी भी आ सकती है. मंगल के ऑपर्च्यूनिटी रोवर के बारे में कहा जाता है कि यह काफी महीनों से वहां की आंधियों में फंसा हुआ है. नासा की जेपीएल की क्यूरोसिटी साइंस टीम को संदेह है कि आंधी की धूल से ही रोवर के सोलर पैनल ढंक गए हैं जिससे उसके संकतों को भेजने और पाने की क्षमता महीनों से ठप्प पड़ी है.

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सरकती हुई रेत गियर जैसे मशीनी पुर्जों को भी जाम कर सकती है. आने वाले मंगल अभियानों के लिए चाहे वह मानव सहित हो या केवल रोवर के लिए दोनों के ही लिए वैज्ञानिकों को इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा.
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