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हिंदू राज के लिए छत्रपति शिवाजी ने 15 साल की उम्र में लिखी थी चिट्ठी

News18Hindi
Updated: January 14, 2020, 5:01 PM IST
हिंदू राज के लिए छत्रपति शिवाजी ने 15 साल की उम्र में लिखी थी चिट्ठी
हिंदवी स्वराज्य या स्वदेशी लोगों के शासन को लेकर ये खत बाजी प्रभु देशपांडे ( जो बाद में शिवाजी के सेनानायक भी बने ) को लिखा गया था.

किशोरावस्था में ही शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) ने एक खत में 'हिंदवी स्वराज्य' (Hindavi Swarajya) के कॉन्सेप्ट पर बात की थी. चूंकि उस समय देश में मुगल सल्तनत (Mughal Empire) थी इसलिए शिवाजी ने स्वदेशी लोगों के शासन की बात की थी.

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  • Last Updated: January 14, 2020, 5:01 PM IST
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मराठा शासक छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) न सिर्फ महाराष्ट्र में बल्कि देश के बड़े हिस्से में आदर्श के तौर पर देखे जाते हैं. दिल्ली की गद्दी पर आसीन रहे मुगल शासन के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले शिवाजी को अक्सर हिंदू अस्मिता के प्रतीक के तौर पर भी प्रदर्शित किया जाता है. अमेरिकी इतिहासकार स्टैनली वोलपर्ट (Stanley Wolpert) लिखते हैं कि शिवाजी की विरासत पर कई अलग-अलग समीक्षाकारों और इतिहासकारों की विभिन्न राय हैं. लेकिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी छवि राष्ट्रवादी और एक हिंदू शासक की बनकर उभरी.

शिवाजी अपने जीवनकाल के दौरान मुख्य रूप से मुगल सल्तनत और गोलकोंडा सल्तनत से लड़ते रहे और मराठा शासन का विस्तार करते रहे. शिवाजी पर अपनी मां जीजाबाई का विशेष प्रभाव था. किशोरावस्था में ही शिवाजी ने एक खत में 'हिंदवी स्वराज्य' के कॉन्सेप्ट पर बात की थी. चूंकि उस समय देश में मुगल सल्तनत थी इसलिए शिवाजी ने स्वदेशी लोगों के शासन की बात की थी.

हिंदवी स्वराज्य या स्वदेशी लोगों के शासन को लेकर ये खत प्रभु देशपांडे (जो बाद में शिवाजी के सेनानायक भी बने) को लिखा गया था. इस खत में एक जीत का जिक्र करते हुए शिवाजी ने अपने से 15 साल बड़े प्रभु देशपांडे को लिखा-  'हमें ये जीत भगवान रोहिरेश्वर की कृपा से नसीब हुई है. और वो ही हमें हिंदवी स्वराज्य के सपने को पूरा करने में मदद करेंगे. ये भगवान की इच्छा है कि ये साम्राज्य स्थापित होगा.'

प्रभु देशपांडे को शिवाजी के बेहद नजदीकियों में शुमार किया जाता था.
प्रभु देशपांडे को शिवाजी के बेहद नजदीकियों में शुमार किया जाता था.


बाद में जब एक शासक के तौर पर शिवाजी ने अपना साम्राज्य विस्तार करना शुरू किया तब भी कहा जाता है कि उन्होंने रायरेश्वर (रोहिरेश्वर) में जाकर स्वराज की शपथ ली थी. ये जगह पुणे से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

इतिहासकारों का मत है कि शिवाजी ने अपनी किशोरावस्था में ही ताकतवर मुगल साम्राज्य के खिलाफ खड़ा होने की ठान ली थी. इसी वजह से उन्होंने रायरेश्वर मंदिर में अपने नजदीकी दोस्तों और सिपहसालारों को इकट्ठा किया था. उस समय इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था इस वजह से भी इस जगह को प्लानिंग के लिहाज से बेहतरीन माना गया था.

हालांकि इस मुलाकात को लेकर कोई लिखित प्रमाण नहीं है लेकिन आज भी इस गांव के लोगों का मानना है कि शिवाजी ने यहां अपनी उंगली काटकर शपथ ली थी. उन्होंने कहा था, 'दोस्तों अब रास्ता साफ है. हम सभी को अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए साथ काम करना होगा. अब हमारा साम्राज्य होगा और हमारा शासन. ये साम्राज्य मेरा, तुम्हारा और उन सभी लोगों का होगा, जो इसमें रहेंगे. हम अब दास के रूप में रहना अस्वीकार करते हैं. इस शपथ में भगवान रायरेश्वर साक्षी हैं. भगवान चाहते हैं कि ये साम्राज्य एक हिंदवी स्वराज्य बने (हिंदू साम्राज्य) बने. हमें तय करना होगा कि भगवान की इच्छा पूरी हो.'
शिवाजी ने खुद को छत्रपति घोषित किया था.
शिवाजी ने खुद को छत्रपति घोषित किया था.


इतिहासकारों में मतभेद
इतिहासकार स्टैनली वोलपर्ट ने शिवाजी के इस खत को स्वदेशी लोगों के शासन से जोड़कर देखा है. उनका मानना था कि चूंकि शिवाजी के सामने दोनों ही बड़े साम्राज्य इस्लामिक थे (मुगल और गोलकोंडा सल्तनत) इस वजह से यह बात हिंदुओं के लिए कही गई होगी. यह बात बाद में मराठा शासन के दौरान शिवाजी द्वारा लिए गए कई फैसलों से भी जाहिर होती है. वहीं एक इतिहासकार सेतुमाधवराव ने लिखा है कि शिवाजी को लेकर कई साक्ष्य जाली हैं और ये साक्ष्य महाराष्ट्र के धनाड्य लोगों ने शिवाजी से नजदीकी प्रदर्शित करने के लिए इतिहासकारों को मुहैया कराए. सेतु माधवराव ने हिंदवी का संदर्भ भारत के लोगों से जोड़कर देखा है.


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First published: January 14, 2020, 4:11 PM IST
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