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Human Cell के अंदर की आधी जानकारी भी नहीं हैं वैज्ञानिकों को - शोध

Human Cell के अंदर की आधी जानकारी भी नहीं हैं वैज्ञानिकों को - शोध


मानव कोशिका (Human Cell) इतनी अधिक जटिल है कि उसके बारे में काफी कुछ पता नहीं चल सका है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मानव कोशिका (Human Cell) इतनी अधिक जटिल है कि उसके बारे में काफी कुछ पता नहीं चल सका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मानवीय कोशिका (Human Cells) के बारे में वैज्ञानिकों को कितनी जानकारी है यह जानकारी आम लोगों को नहीं पता है. इसीलिए यह मालूम होने पर हैरानी होती है कि कोशिकाओं के घटकों के बारे में वैज्ञानिकों को आधी से भी कम जानकारी है. यह जानकारी बीमारियों (Diseases) के इलाज खोजने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होती है. अब नई तकनीक ने इस बार में उम्मीद जगाई है जिसमें आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के जरिए कोशिकाओं केअव्यवयों का एकीकृत नक्शा (Unified Map of Cells) बनाएगा.

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    मानव कोशिका (Human Cells) अपने आप में एक संसार है. इसमें लाखों की संख्या में प्रोटीन होते हैं जो बहुत अधिक सक्रिय प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं जिससे हम इंसानों का जीवन कायम रहता है और हम सक्रिय रह पाते हैं. मानव शरीर की तमाम बीमारियों और विकारों को सही तरह से अध्ययन करने के लिए उन्होंने इन सभी प्रोटीन की जानकारी होना बहुत जरूरी है. वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का उपयोग कर कोशिकाओं की सूक्ष्म तस्वीरों के आंकड़े जमा कर उनके अव्यवयों का एकीकृत नक्शा (Unified Map of Cells) बनाएगी जिसके आधे से अधिक हिस्से अभी तक नहीं देखे जा सके हैं.

    अब संभव होगा नक्शे का काम
    शोधकर्ता अब आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के जरिए माइक्रोस्कोपी तस्वीरों से आंकड़े जमा करेंगे और उनका जैवरासायनिक विश्लेषण करेंगे जिससे कोशिका के घटकों का एकीकृत नक्शा बना सकेगा. सैन डियागो की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के नेटवर्क बायोलॉजिस्ट और कम्प्यूटर वैज्ञानिक टैरी आइकर ने बताया कि वैज्ञानिक काफी समय  पहले से यह जानते थे कि जम जितना जानते हैं उससे कहीं ज्यादा इस बारे में नहीं जानते हैं.

    कोशिकाओं के घटकों पर कार्य
    आइकर ने कहा कि अब हमें एक तरीका पता चल गया है जिससे हमें और बहुत कुछ जान सकते हैं.  कोशिकाएं बहुत महीन होती हैं और उन्हें और उनके घटकों को शक्तिशाली माइक्रोस्कोप के जरिए ही देखा जा सकता है. इसमें ऊर्जा प्रदान करने वाले माइटोकॉन्ड्रिया और प्रोटीन बनाने वाली फैक्ट्री राइबोजोम्स भी शामिल हैं. अब कोशिकों में डाइ डालकर इन प्रोटीनों की पहचान कर उन पर निगरानी तक  रखी जा सकती है.

    और भी बारीक काम हो सकते हैं
    जैवरसायन विज्ञान तकनीक इससे भी आगे जा सकती है और इसके जरिए कई बारीक कार्य भी किए जा सकते हैं जैसे लक्षित एंटीबॉटी को प्रोटीन से बांधना या उसे कोशिकाओं में से निकालना या यह सुनिश्चित करना कि उससे क्या जुड़ा है. इन तरीकों को जोड़कर काम करना कोशिका जीवविज्ञानियों के लिए एक चुनौती भरा काम था.

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    शोधकर्ताओं के लिए कोशिका (Cell) में सूक्ष्म स्तर पर अलग अलग पैमाने पर प्रोटीन जोड़ना मुश्किल काम हो रहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    AI से हो सकता है यह संभव
    आइकर ने बताया कि जीवन विज्ञानों में लंबे समय से एक बाधा यह थी कि माइक्रोन और नैनोमीटर पैमाने बीच का अंतर है वह कैसे दूर किया जाए. ऐसा लगता है कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के जरिए अब बहुत स्रोतों से आंकड़ों का अध्ययन कर और सिस्टम से कोशिका के मॉडल में इन्हें समाहित करने से यह किया जा सकता है.

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    दुनिया भर की तस्वीरें?
    आइकर और उनके साथियों ने दुनिया भर की किताबों में कोशिकाओं के नक्शों में घटकों का अवलोकन किया और उनमें प्रोटीन के आपस में अंतरिक्रिया और उनकी दूरियों को जानने का प्रयास किया.  उपलब्ध नक्शों और ह्यूमन प्रोटीन एटलस लाइब्रेरी की तस्वीरों के आंकड़ों से उन्होंने एक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम बनाया.

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    मानव कोशिकाओं (Human Cells) में इन प्रोटीन की ही अंतरक्रियाओं के बारे में अब पता चल सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    चौंकाने वाली खोज
    इस एल्गोरिदम के जरिए वे प्रोटीन के जोड़ों  के बीच की दूरी निकलना चाहते थे. उनका लक्ष्य असेंबली कहे जाने प्रोटीन के समुदायों को खोजना था, जो कोशिका में 50 नैनोमीटर से लेकर एक माइक्रोमीटर तक के अलग अलग पैमानों पर मौजूद रहती हैं. अलगोरिदम ने 70 प्रोटीन समुदायों का एक समूह निर्धारित किया. नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि नए पहचाने गए आधे से अधिक प्रोटीन घटक इससे पहले विज्ञान जगत के लिए अज्ञात ही थे.

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    इससे पहले भी इंसान की कोशिकाओं का आंतरिक नक्शा बनाने के  प्रयास वैज्ञानिक कर चुके हैं. इस शोध में शोधकर्ताओ ने ऐसी तकनीक भी विकसित की हैं जिससे कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन  की अंतरक्रिया और गतिविधियों  को देखे जा सकने के साथ-साथ उन पर निगरानी भी रखी जा सके. उम्मीदकी जा रही है कि इससे भविष्य में बहुत सी बीमारियों का इलाज खोजने में सहायता मिल सकेगी.

    Tags: Artificial Intelligence, Health, Research, Science

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